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देशी छोड़ अंग्रेजी शराब मांग रहे छुट भैय्या
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देशी छोड़ अंग्रेजी शराब मांग रहे छुट भैय्या
बिजनौर। देशी हजम नहीं होती, अंग्रेजी शराब का पव्वा दिलवा दो...यह बातें उम्मीदवारों के कार्यालय के आसपास सुनने को मिल जाएंगी। फिलहाल चुनाव होने तक छुट भैय्या नेताओं की मौज है। बिना व्यवस्था नारेेबाजी भी नहीं हो पाती। शाम को प्रचार के बाद लौटते हैं, तो शराब से लेकर भोजन तक की व्यवस्था करना उम्मीदवार की जिम्मेेदारी है।
चुनावी मौसम है। उम्मीदवार पूरे क्षेत्र में तूफानी दौरा कर रहे हैं। उम्मीदवारों के साथ-साथ काफिला भी चल रहा है। इसके अलावा दूसरी गाड़ियों में समर्थक भी अपनी-अपनी बिरादरी के गांवों में घूम कर नेताजी की जीत का आंकड़ा बता रहे हैं। एक-एक उम्मीदवार के पास काफी भीड़ है। यह भीड़ यूं ही जमा नहीं हो जाती। हालांकि इनमें कुछ पार्टी के पदाधिकारी होते हैं, जिन्हें चुनाव में जाना जरूरी है। लेकिन कुछ समर्थक केवल बरसाती मेंढक हैं, जिन्हें छुटभैय्या नेता भी कहा जा रहा है।
एक समर्थक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि कुछ लोग जब प्रचार खत्म होने के बाद शाम को कार्यालय पहुंचते हैं तो शराब से लेकर उनके खाने तक की व्यवस्था होती है। इनमें कुछेक देशी शराब पीने वाले थे, जिन्होंने अब देशी से तौबा कर ली है। एक उम्मीदवार के कार्यालय पर एक समर्थक को कहते सुना गया है कि देशी शराब हजम नहीं होती है, अंग्रेजी शराब का पव्वा दिलवा दो। जिसके बाद उम्मीदवार ने अंग्रेजी शराब देनी शुरू कर दी।
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बिजनौर। देशी हजम नहीं होती, अंग्रेजी शराब का पव्वा दिलवा दो...यह बातें उम्मीदवारों के कार्यालय के आसपास सुनने को मिल जाएंगी। फिलहाल चुनाव होने तक छुट भैय्या नेताओं की मौज है। बिना व्यवस्था नारेेबाजी भी नहीं हो पाती। शाम को प्रचार के बाद लौटते हैं, तो शराब से लेकर भोजन तक की व्यवस्था करना उम्मीदवार की जिम्मेेदारी है।
चुनावी मौसम है। उम्मीदवार पूरे क्षेत्र में तूफानी दौरा कर रहे हैं। उम्मीदवारों के साथ-साथ काफिला भी चल रहा है। इसके अलावा दूसरी गाड़ियों में समर्थक भी अपनी-अपनी बिरादरी के गांवों में घूम कर नेताजी की जीत का आंकड़ा बता रहे हैं। एक-एक उम्मीदवार के पास काफी भीड़ है। यह भीड़ यूं ही जमा नहीं हो जाती। हालांकि इनमें कुछ पार्टी के पदाधिकारी होते हैं, जिन्हें चुनाव में जाना जरूरी है। लेकिन कुछ समर्थक केवल बरसाती मेंढक हैं, जिन्हें छुटभैय्या नेता भी कहा जा रहा है।
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एक समर्थक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि कुछ लोग जब प्रचार खत्म होने के बाद शाम को कार्यालय पहुंचते हैं तो शराब से लेकर उनके खाने तक की व्यवस्था होती है। इनमें कुछेक देशी शराब पीने वाले थे, जिन्होंने अब देशी से तौबा कर ली है। एक उम्मीदवार के कार्यालय पर एक समर्थक को कहते सुना गया है कि देशी शराब हजम नहीं होती है, अंग्रेजी शराब का पव्वा दिलवा दो। जिसके बाद उम्मीदवार ने अंग्रेजी शराब देनी शुरू कर दी।
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