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Bijnor News: चोला बदलते रालोद को चमत्कार की उम्मीद

Mon, 08 Apr 2024 01:18 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर Updated Mon, 08 Apr 2024 01:18 AM IST
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Changing clothes, RLD hopes for a miracle
बिजनौर। चुनाव-दर-चुनाव गठबंधन का चोला बदलते राष्ट्रीय लोकदल को एक बार फिर भाजपा के साथ से चमत्कार की उम्मीद है। 2009 के लोकसभा चुनाव में रालोद ने भाजपा के साथ मिलकर सात सीटों पर चुनाव लड़ा और पांच पर जीत दर्ज की थीं। इस बार फिर दोनों दल मिलकर चुनाव मैदान में हैं, लेकिन रालोद को केवल दो ही सीटें दी गईं हैं। इन्हीं के बूते रालोद एक दशक का सूखा खत्म करना चाहती है।
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पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में अहम भूमिका निभाने वाला राष्ट्रीय लोकदल बार-बार अपना चुनावी साथी बदल लेता है। इसमें केवल भाजपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ने में ही उसे सबसे ज्यादा फायदा हुआ है। 2004 में रालोद ने समाजवादी पार्टी के साथ मिलकर चुनाव लड़ा और दस सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे। इनमें से मात्र तीन बागपत से रालोद मुखिया चौधरी अजित सिंह, कैराना से अनुराधा चौधरी और बिजनौर से मुंशीराम पाल ने जीत दर्ज की थी।
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2009 में 15वीं लोकसभा के लिए रालोद ने गठबंधन बदल लिया और भाजपा के साथ मिल गई। इस चुनाव में रालोद के प्रत्याशी सात सीटों पर चुनाव लड़े, जिनमें कैराना, नगीना, हाथरस, बागपत, बिजनौर, अमरोहा और मथुरा शामिल थीं। इनमें से पांच सीटों पर जीत मिली थी। बागपत से चौधरी अजित सिंह, बिजनौर से संजय चौहान, अमरोहा से देवेंद्र नागपाल, हाथरस से सारिका बघेल और मथुरा से जयंत चौधरी सांसद चुने गए थे। यह रालोद के इतिहास में लोकसभा की सबसे बड़ी जीत थी।
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चुनाव खत्म होने के कुछ समय बाद ही दाेनों दलों में दूरियां बढ़ने लगीं थीं। 2013 में मुजफ्फरनगर दंगे ने इन दूरियों को और बढ़ा दिया। इस दंगे के बाद रालोद अपनी जमीन खोती गई और नैपथ्य में चली गई। 2014 के चुनाव में रालोद ने अपना साथी बदलते हुए कांग्रेस से हाथ मिला लिया। इस चुनाव में रालोद ने आठ सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे लेकिन एक भी जीत की दहलीज तक नहीं पहुंच सका। खुद रालोद मुखिया चौधरी अजित सिंह बागपत, जयंत चौधरी मथुरा से चुनाव हार गए। बिजनौर सीट पर सिने तारिका जयाप्रदा चौथे नंबर पर पहुंच गईं थीं।

रालोद का ऐसा ही हाल 2019 के चुनाव में भी हुआ। इस बार रालोद महा गठबंधन के साथ था। सपा और बसपा ने भी रालोद का साथ दिया। रालोद मुखिया चौधरी अजित सिंह मुजफ्फरनगर, बागपत से जयंत चौधरी और मथुरा से कुंवर नरेंद्र सिंह चुनाव लड़े लेकिन तीनों को ही हार का सामना करना पड़ा। लोकसभा में रालोद का एक दशक से सूखा चल रहा है। चौधरी अजित सिंह के निधन के बाद चौधरी जयंत सिंह के हाथों में पार्टी की कमान है। वर्तमान में चल रहे चुनाव से पहले चौधरी जयंत सिंह ने एक बार फिर भाजपा से हाथ मिला लिया। काफी जद्दोजहद के बाद रालोद को मात्र दो बिजनौर और बागपत सीट ही मिल पाईं हैं। बागपत से राजकुमार सांगवान और बिजनौर सीट पर चंदन चौहान चुनाव मैदान में हैं। चंदन चौहान 2009 में रालोद-भाजपा गठबंधन से सांसद चुने गए संजय चौहान के पुत्र हैं। 2009 के परिणाम को देखते हुए इस चुनाव में रालोद को बीते दो चुनावों का सूखा खत्म होने की उम्मीद है।
- बीते चुनावों में वेस्ट यूपी में रालोद की स्थिति
चुनाव वर्ष चुनाव लड़े प्रत्याशी जीते उम्मीदवार
1999 07 02
2004 10 03
2009 07 05
2014 08 00
2019 03 00
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