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नवगठित पंचायतों की तस्वीर बदली

Fri, 04 Jun 2021 12:04 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 04 Jun 2021 12:04 AM IST
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Changed the picture of newly formed panchayats
नवगठित पंचायतों की तस्वीर बदली
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बिजनौर। नवगठित ग्राम पंचायतों की तस्वीर बदली नजर आएगी। जिले की पंचायतों में इस बार करीब 98 प्रतिशत महिला पढ़ी लिखी हैं। करीब 88 महिला प्रधान स्नातक व स्नातकोत्तर हैं। पढ़ी लिखी महिला प्रधान पंचायतों में पुरुषों का वर्चस्व तोड़ेंगी। उनका कहना है कि वे स्वयं गांव के विकास की कमान संभालेंगी।
वर्ष 2021 की ग्राम पंचायत पिछली पंचायतों से कई मायनों में अलग दिखाई देगी। जिले में 1123 पंचायत हैं। इस बार 617 पुरुष तथा 506 महिला प्रधान हैं। काफी संख्या में ऐसी महिला प्रधान हैं जो अनारक्षित पंचायतों में पुरुषों के सामने कड़े मुकाबले में चुनाव जीतकर आई हैं। नवगठित पंचायतों में मात्र 13 महिला प्रधान निरक्षर हैं। 40 महिला प्रधान स्नातकोत्तर है और 48 महिला प्रधान स्नातक हैं। बाकी 405 महिला प्रधान पांचवीं, आठवीं, हाईस्कूल व इंटर तक पढ़ी हैं।
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पंचायत लोकतंत्र का पहला पायदान माना जाता है। इसलिए नवगठित पंचायतों में पढ़ी लिखी महिलाओं की संख्या बढ़ना लोकतंत्र का मजबूत होना माना जा रहा है। पढ़ी लिखी नवनिर्वाचित प्रधानों के इरादे से भी इसकी झलक मिल रही है। अभी तक यह देखने में आया है कि महिला प्रधान की जगह उनके पति या परिजन प्रधानी करते हैं। इस बार उनका दावा है कि वे स्वयं पंचायतों के विकास कि कमान संभालेंगी। उनके इन मजबूत इरादों से पुरुषों का वर्चस्व टूटने की उम्मीद नजर आ रही है।
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स्वयं लेंगे निर्णय, सबका लिया जाएगा सहयोग
अलका रानी हल्दौर ब्लॉक की ग्राम पंचायत धनौरी की प्रधान हैं। वह अनारक्षित सीट पर पुरुष प्रत्याशी के मुकाबले चुनाव जीती हैं। अलका स्नातक हैं, परिवार राजनीतिक व सामाजिक गतिविधियों से जुड़ा है। वह कहती हैं कि महिला देश की राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री रही है। सूबों की मुख्यमंत्री तथा राजनीतिक दलों की अध्यक्ष महिला हैं। महिलाएं केंद्रों व राज्य में मंत्री हैं, फिर महिला क्यों नहीं पंचायत चला सकती है। कहा कि वह पंचायत का सारा काम खुद देखेंगी। महिलाओं को आगे बढ़ाया जाएगा। सबका सहयोग लिया जाएगा, निर्णय स्वयं लिए जाएंगे।
नहीं होने दी जाएगी किसी की मनमानी
फरहाना परवीन नूरपुर ब्लॉक की राजा का ताजपुर की प्रधान हैं। पहली बार प्रधान बनी हैं। विकास कार्य करने का जोश हैं। वह कहती हैं कि पंचायत के हर काम का संचालन खुद करेंगी। सभी का सहयोग लिया जाएगा। महिलाओं को निडर बनाया जाएगा। समय बदल गया है महिलाओं को अपने हक के लिए आगे आना है। शुरुआत गांव से करनी है। किसी की दखलंदाजी सहन नहीं होगी। जोगेंद्री देवी हल्दौर ब्लाक की पेंदी की प्रधान हैं और स्नातक हैं। वह कहती हैं कि चुनाव में काफी सोच समझकर उतरे थे। पंचायत को नंबर वन बनाने का संकल्प मन में है। इसके लिए स्वयं पंचायत के हर कामकाज पर निगाह रखी जाएगी। किसी की मनमानी नहीं हो दी जाएगी।
बेवजह दखलंदाजी बर्दाश्त नहीं करेंगे
आंचल राजपूत हल्दौर ब्लाक की कुम्हारपुरा पंचायत की प्रधान हैं और उन्होंने बीए पास किया है। वह कहती हैं कि ग्रामीणों का सहयोग लेकर आगे बढ़ेंगे। किसी की बेवजह दखलंदाजी सहन नहीं होगी, गांव के लिए सभी की राय ली जाएगी। परंतु वहीं होगा जो नियमानुसार सही होगा। सभी ग्रामीणों के सुझावों का स्वागत किया जाएगा। लेकिन मनमानी किसी की नहीं चलेगी। सभी को साथ लेकर ग्राम पंचायत को आगे बढ़ाया जाएगा।

क्या है नियम
डीपीआरओ सतीश कुमार बताते हैं कि पंचायत या ग्राम विकास की अन्य बैठकों में निर्वाचित प्रतिनिधि ही शामिल हो सकता है। यदि कोई प्रधान का पति या दूसरा व्यक्ति आता है तो पहले उसे चेतावनी दी जाएगी। इसके बाद भी यदि सुधार नहीं होता है तो विधिक कार्रवाई हो सकती है।
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