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श्रम कानून में बदलाव अन्याय है : गिरीशचंद्र
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श्रम कानून में बदलाव अन्याय है : गिरीशचंद्र
धामपुर। नगीना लोकसभा क्षेत्र के बसपा सांसद गिरीश चंद्र ने भारत सरकार के श्रम एवं रोजगार राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संतोष कुमार गंगवार को पत्र लिखा है। जिसमें उन्होंने श्रम कानून में किए गए बदलाव को श्रमिकों के साथ अन्याय बताया है।
पत्र भेजकर उन्होंने कहा है कि लॉकडाउन की वजह से व्यापारी, मजदूर सभी वर्ग के लोग परेशान है। सरकार द्वारा श्रम कानून में बदलाव करना उद्योगपतियों के लिए तो सरल है। परंतु कुछ ऐसे बदलाव कर दिए है जिससे श्रमिकों का शोषण बढ़ेगा। बाबा साहेब डा. भीमराव अंबेडकर ने श्रमिकों के लिए 12 घंटे नहीं, आठ घंटे श्रम या फिर इससे ज्यादा काम लेने पर ओवरटाइम देने की कानून में व्यवस्था की थी। आठ घंटे के बजाय 12 घंटे काम लेने की शोषणकारी व्यवस्था उचित नहीं है। इससे श्रमिक बंधुआ मजदूर की तरह हो जाएंगे। उद्योगपतियों की तानाशाही चलने लगेगी। हायर फायर की नीति से शोषण बढ़ेगा। श्रम असंतोष औद्योगिक वातावरण को अशांति की ओर ले जाएगा। वर्तमान में बेरोजगारी और भुखमरी से तड़प रहे करोड़ों श्रमिकों कामगारों के विरुद्ध सरकार की ओर से लाया गया यह कानून दुखद व दुर्भाग्यपूर्ण है। इसलिए श्रमिकों के लिए सरल कानून की व्यवस्था की जाए। जिससे उनका शोषण न हो।
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धामपुर। नगीना लोकसभा क्षेत्र के बसपा सांसद गिरीश चंद्र ने भारत सरकार के श्रम एवं रोजगार राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संतोष कुमार गंगवार को पत्र लिखा है। जिसमें उन्होंने श्रम कानून में किए गए बदलाव को श्रमिकों के साथ अन्याय बताया है।
पत्र भेजकर उन्होंने कहा है कि लॉकडाउन की वजह से व्यापारी, मजदूर सभी वर्ग के लोग परेशान है। सरकार द्वारा श्रम कानून में बदलाव करना उद्योगपतियों के लिए तो सरल है। परंतु कुछ ऐसे बदलाव कर दिए है जिससे श्रमिकों का शोषण बढ़ेगा। बाबा साहेब डा. भीमराव अंबेडकर ने श्रमिकों के लिए 12 घंटे नहीं, आठ घंटे श्रम या फिर इससे ज्यादा काम लेने पर ओवरटाइम देने की कानून में व्यवस्था की थी। आठ घंटे के बजाय 12 घंटे काम लेने की शोषणकारी व्यवस्था उचित नहीं है। इससे श्रमिक बंधुआ मजदूर की तरह हो जाएंगे। उद्योगपतियों की तानाशाही चलने लगेगी। हायर फायर की नीति से शोषण बढ़ेगा। श्रम असंतोष औद्योगिक वातावरण को अशांति की ओर ले जाएगा। वर्तमान में बेरोजगारी और भुखमरी से तड़प रहे करोड़ों श्रमिकों कामगारों के विरुद्ध सरकार की ओर से लाया गया यह कानून दुखद व दुर्भाग्यपूर्ण है। इसलिए श्रमिकों के लिए सरल कानून की व्यवस्था की जाए। जिससे उनका शोषण न हो।
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