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Bijnor News: सी श्रेणी वाले मरीजों की होगी स्वाइन फ्लू की जांच

Mon, 07 Sep 2026 12:56 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Mon, 07 Sep 2026 12:56 AM IST
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Category C patients will be tested for swine flu
बिजनौर। वायरल बुखार और स्वाइन फ्लू के शुरुआती लक्षण मिलते जुलते ही हैं। ऐसे में बुखार को साधारण समझने की गलती बिल्कुल न करें। शासन के नियमों के बीच श्रेणी ए और बी के मरीजों की स्वाइन फ्लू जांच नहीं की जा रही है। श्रेणी सी की चपेट में आने वाले मरीजों की आरटीपीसीआर जांच की जा जाएगी।
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मेडिकल कॉलेज में रोजाना बुखार, जुकाम, खांसी के लक्षणों वाले करीब 100 मरीज तक पहुंच रहे हैं। इन दिनों मौसम में लगातार उतार-चढ़ाव बना हुआ है। कभी बारिश तो कभी धूप निकलने से तापमान में बदलाव हो रहा है। ऐसे मौसम में वायरल संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। दरअसल, स्वाइन फ्लू और सामान्य वायरल संक्रमण में शुरुआत में एक जैसे ही लक्षण दिखाई देते हैं। इसी वजह से बिना जांच के बीमारी को लेकर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है। मेडिकल कॉलेज में फिजिशियन कक्ष में रोजाना करीब 30 मरीज और बाल रोग विभाग में 60 से 70 मरीज तक इन लक्षणों वाले पहुंच रहे हैं।
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सामान्य रोगी (श्रेणी ए)
स्वास्थ्य विभाग की गाइडलाइन के अनुसार हल्के बुखार, खांसी, गले की खराश, बदन दर्द, सिर दर्द, दस्त और उल्टी के लक्षण वाले रोगी श्रेणी ए में आते हैं। इनका लक्षणों के आधार पर इलाज होता है। इन मरीजों को स्वयं अपने घरों में रहकर उपचार कराएं। घर-परिवार के उच्च जोखिम वाले सदस्यों के संपर्क से बचें। इसमें जांच की आवश्यकता नहीं है।
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गंभीर रोगी (श्रेणी बी)
गाइडलाइन के अनुसार रोगी को उच्च ज्वर, गले में गंभीर खराश होने पर घर में ही दूसरे कक्ष में स्वास्थ्य लाभ करना चाहिए। उन्हें ओसेल्टामिविर औषधि आवश्यकतानुसार दी जानी चाहिए। इसके अलावा हल्की बीमारी से ग्रसित बच्चे, गर्भवती महिलाएं, 65 वर्ष या अधिक आयु के व्यक्ति, फेफड़े, हृदय, यकृत, गुर्दा के रोगों से ग्रसित व्यक्ति, रक्त विकार, मधुमेह, तंत्रिकीय विकार, कैंसर, एचआईवी से ग्रसित व्यक्ति को अधिक खतरा रहता है। ऐसे रोगियों को ओसेल्टामिविर औषधि दी जानी चाहिए। इन रोगियों को इन्फ्लुएन्जा ए की प्रयोगशाला जांच की आवश्यकता नहीं होगी है।
अति गंभीर (श्रेणी सी)
गाइडलाइन के मुताबिक इन मरीजों को सांस फूलना, सीने में दर्द, रक्तचाप का कम होना, रक्त युक्त बलगम, नाखूनों का नीला पड़ना जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। इन मरीजों की जांच आवश्यक होती है। साथ ही अस्पताल में भर्ती कर उपचार करने की आवश्यकता होती है।

स्वाइन फ्लू से ग्रसित श्रेणी सी के मरीजों की आरटीपीसीआर जांच करने का नियम है। श्रेणी एक और बी के मरीजों को केवल लक्षणों के आधार पर दवाई एवं होम आइसोलेशन के लिए बताया जाता है। मेडिकल कॉलेज में श्रेणी सी के मरीजों की जांच की जाएगी। ....डॉ. ललिता चौधरी, प्राचार्या, मेडिकल कॉलेज, बिजनौर
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