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Bijnor News: डीएवी कॉलेज संस्थापक के पौत्र और प्रधानाचार्य पर केस
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बिजनौर। डीएवी इंटर कॉलेज के संस्थापक के पौत्र और मौजूदा प्रधानाचार्य समेत तीन के खिलाफ धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज हुई है। पूर्व प्रधानाचार्य की ओर से यह केस दर्ज कराया गया है। पुलिस ने कोर्ट के आदेश पर केस दर्ज करते हुए जांच शुरू कर दी है।
साल 2015 में वीआरएस लेने वाले डीएवी इंटर कॉलेज के पूर्व प्रधानाचार्य सुबोध चंद्र शर्मा ने कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया था। अब कोर्ट के आदेश पर शहर कोतवाली पुलिस ने आलोक आर्य पुत्र अशोक आर्य, आशा रानी और मनोज कुमार निवासी बिजनौर के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली है। बता दें कि मनोज कुमार मौजूदा प्रधानाचार्य हैं जबकि आलोक आर्य इस स्कूल के संस्थापक ईश्वर दयाल आर्य के पौत्र हैं। आरोप है कि प्रधानाचार्य मनोज कुमार कुछ असामाजिक तत्वों के संपर्क में आए और प्रबंध समिति में अपने खास लोगों को सदस्य बनाने का दबाव बनाने लगे। आरोप है कि षड़यंत्र के तहत फर्जी व कूट रचित कागज तैैयार करते हुए अलग से एक प्रबंध समिति बना ली। जिसका अनुमोदन भी विद्यालय समिति से नहीं कराया। डीआईओएस से भी अनुमोदन नहीं कराया। कहा कि प्रार्थी की प्रबंध समिति अनुमोदित है और कार्य कर रही है। आरोप है कि प्रधानाचार्य मनोज कुमार ने अपनी सर्विस बुक खो जाने की जानकारी दी थी। बाद में सर्विस बुक भी प्रमाणित करा ली। आरोप लगाया कि आरोपी अब भी इस संस्था को नुकसान देने की फिराक में हैं।
कॉलेज को दुकानों से होती है आमदनी
दयानंद इंटर कॉलेज बिजनौर शहर में मुख्य सड़क पर स्थित है। सड़क से लगी बाउंड्री में कॉलेज की काफी दुकानें बनी हुई है। जिनसे काफी आमदनी भी होती है। तमाम वजहों को लेकर काफी सालों से इस कॉलेज में विवाद चल रहा है। पहले भी मारपीट तक हो चुकी हैं। मामले पुलिस तक पहुंचे और केस भी दर्ज हुआ था। प्रबंध समिति में वर्चस्व को लेकर भी रार चली आ रही है। फिलहाल मौजूदा समय में इस स्कूल की प्रबंधक समिति में प्रबंधक भाजपा के जिलाध्यक्ष सुभाष वाल्मीकि हैं।
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स्कूल पर टिकी थी नजर : मनोज कुमार
मौजूदा प्रधानाचार्य मनोज कुमार ने सभी आरोपों को निराधार बताया। उन्होंने बताया कि सुबोध चंद्र शर्मा जब प्रधानाचार्य थे, उनकी नजर स्कूल पर थी। संस्थापक ईश्वर दयाल आर्य थे। उनका बेटे अशोक कुमार आर्य प्रबंधक रहे उनकी मौत के बाद फर्जी सदस्य बनाते हुए चुनाव कराया गया। पूर्व प्रधानाचार्य ने नया रजिस्ट्रेशन कराते 1956 के विद्यालय को 2010 की सोसायटी से चलाना शुरू कर दिया था। जिनके दादा ने स्कूल खोला, वो सदस्य नहीं बनाए। सुबोध चंद्र शर्मा और उनके परिवार के सभी लोग नई संस्था में सदस्य हैं। इस फर्जी कमेटी को लेकर संयुक्त शिक्षा निदेशक ने यह निर्णय दिया था कि यह कमेटी गलत है।
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साल 2015 में वीआरएस लेने वाले डीएवी इंटर कॉलेज के पूर्व प्रधानाचार्य सुबोध चंद्र शर्मा ने कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया था। अब कोर्ट के आदेश पर शहर कोतवाली पुलिस ने आलोक आर्य पुत्र अशोक आर्य, आशा रानी और मनोज कुमार निवासी बिजनौर के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली है। बता दें कि मनोज कुमार मौजूदा प्रधानाचार्य हैं जबकि आलोक आर्य इस स्कूल के संस्थापक ईश्वर दयाल आर्य के पौत्र हैं। आरोप है कि प्रधानाचार्य मनोज कुमार कुछ असामाजिक तत्वों के संपर्क में आए और प्रबंध समिति में अपने खास लोगों को सदस्य बनाने का दबाव बनाने लगे। आरोप है कि षड़यंत्र के तहत फर्जी व कूट रचित कागज तैैयार करते हुए अलग से एक प्रबंध समिति बना ली। जिसका अनुमोदन भी विद्यालय समिति से नहीं कराया। डीआईओएस से भी अनुमोदन नहीं कराया। कहा कि प्रार्थी की प्रबंध समिति अनुमोदित है और कार्य कर रही है। आरोप है कि प्रधानाचार्य मनोज कुमार ने अपनी सर्विस बुक खो जाने की जानकारी दी थी। बाद में सर्विस बुक भी प्रमाणित करा ली। आरोप लगाया कि आरोपी अब भी इस संस्था को नुकसान देने की फिराक में हैं।
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कॉलेज को दुकानों से होती है आमदनी
दयानंद इंटर कॉलेज बिजनौर शहर में मुख्य सड़क पर स्थित है। सड़क से लगी बाउंड्री में कॉलेज की काफी दुकानें बनी हुई है। जिनसे काफी आमदनी भी होती है। तमाम वजहों को लेकर काफी सालों से इस कॉलेज में विवाद चल रहा है। पहले भी मारपीट तक हो चुकी हैं। मामले पुलिस तक पहुंचे और केस भी दर्ज हुआ था। प्रबंध समिति में वर्चस्व को लेकर भी रार चली आ रही है। फिलहाल मौजूदा समय में इस स्कूल की प्रबंधक समिति में प्रबंधक भाजपा के जिलाध्यक्ष सुभाष वाल्मीकि हैं।
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स्कूल पर टिकी थी नजर : मनोज कुमार
मौजूदा प्रधानाचार्य मनोज कुमार ने सभी आरोपों को निराधार बताया। उन्होंने बताया कि सुबोध चंद्र शर्मा जब प्रधानाचार्य थे, उनकी नजर स्कूल पर थी। संस्थापक ईश्वर दयाल आर्य थे। उनका बेटे अशोक कुमार आर्य प्रबंधक रहे उनकी मौत के बाद फर्जी सदस्य बनाते हुए चुनाव कराया गया। पूर्व प्रधानाचार्य ने नया रजिस्ट्रेशन कराते 1956 के विद्यालय को 2010 की सोसायटी से चलाना शुरू कर दिया था। जिनके दादा ने स्कूल खोला, वो सदस्य नहीं बनाए। सुबोध चंद्र शर्मा और उनके परिवार के सभी लोग नई संस्था में सदस्य हैं। इस फर्जी कमेटी को लेकर संयुक्त शिक्षा निदेशक ने यह निर्णय दिया था कि यह कमेटी गलत है।