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अमानगढ़ रेंज में बढ़ा रॉयल बंगाल टाइगर का कुनबा
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बिजनौर: अमानगढ़ वन रेंज में वाटर हॉल में पानी पीता बाघ।
- फोटो : BIJNOR
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रेंज में बाघों की गणना के लिए लगाए गए कैमरे
बिजनौर। अमानगढ़ वन रेंज में बाघ का कुनबा बढ़ गया है। अमानगढ़ वन रेंज में 22 बाघ मिलने की सूचना है। बाघों की संख्या और ज्यादा भी हो सकती है। 2009 में पहली बार हुई गणना में अमानगढ़ रेंज में 12 बाघ मिले थे। बाघों की संख्या बढ़ने से वन विभाग के अधिकारी भी गदगद हैं। हालांकि अभी बाघों की संख्या की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
बाघों की संख्या बढ़ाने के लिए अनेक प्रयास किए जा रहे हैं। देश में पहली बार बाघों की गणना कैमरों की मदद से की गई है। 2009 में पहली बार जब बाघों की गणना हुई थी तब अमानगढ़ रेंज में 12 बाघ मिले थे। लेकिन हाल ही में हुई बाघों की संख्या में इजाफा हुआ है। बाघों की संख्या बढ़कर 22 हो गई है। अमानगढ़ रेंज में बाघों का कुनबा बढ़ गया है। रेंज में बाघों की गणना के लिए 90 कैमरे लगाए गए थे। इन कैमरों में अलग अलग जगह पर बाघों की तस्वीर कैद हुई। कद, काठी, हाव भाव आदि के आधार पर विशेषज्ञों की टीम ने बाघों की गणना की। गणना में विशेषज्ञों ने अमानगढ़ रेंज में 22 बाघ होने की पुष्टि की है। हालांकि यह भी माना जा रहा है कि कुछ बाघ कैमरे के सर्विलांस में आने से रह गए होंगे। अमानगढ़ वन रेंज कार्बेट पार्क से सटा हुआ है। बाघों का कार्बेट पार्क से अमानगढ़ रेंज में आनाजाना है। बाघों की मौजूदगी के कारण अमानगढ़ रेंज जिले का मशहूर पर्यटन केंद्र है। यहां पर देश भर से सेलानी वन्य पशुओं को देखने के लिए आते हैं। वहीं पूर्व डीएफओ नरेंद्र सिंह के अनुसार अगर अमानगढ़ वन रेंज में बाघों की संख्या बढ़ी है तो यह एक सुखद खबर है। बाघों की संख्या बढ़ाने के लिए उनके और संरक्षण की जरूरत है।
कभी जोड़े में नहीं रहता बाघ
बाघिन एक बार में एक से छह बच्चे तक को जन्म दे सकती है। बाघ कभी जोड़े में नहीं रहते हैं। केवल प्रणय के समय ही बाघिन व बाघ कुछ समय के लिए साथ रहते हैं। बाघिन अकेले ही अपने बच्चों को पालती है। वयस्क नर व वयस्क मादा कभी साथ नहीं रहते।
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बाघिन ही सिखाती है शिकार
बाघिन ही अपने बच्चों को शिकार करना, तैरना आदि सिखाती है। लेकिन बच्चों के बड़े होने पर शिकार का ज्यादा हिस्सा खाने को लेकर झगड़ा होने लगता है। तब बच्चे खुद ही मां के पास से भाग जाते हैं।
कुदरती रूप से भी इलाके का राजा
बाघ तीन साल में वयस्क होता है। बाघ कुदरती रूप से भी अपने इलाके का राजा होता है। वयस्क बाघ अपना इलाका खुद तय करता है। वह अपने इलाके की सीमा के पेड़ों पर अपने पंजे से खरोंच के निशान लगाता है। उसके इलाके में कोई और बाघ या बाघिन घुस आए तो दोनों में वर्चस्व के लिए लड़ाई होती है। ऐसी लड़ाइयों में कभी कभी बूढ़े बाघों को अपनी जान से हाथ भी धोना पड़ जाता है।
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बिजनौर। अमानगढ़ वन रेंज में बाघ का कुनबा बढ़ गया है। अमानगढ़ वन रेंज में 22 बाघ मिलने की सूचना है। बाघों की संख्या और ज्यादा भी हो सकती है। 2009 में पहली बार हुई गणना में अमानगढ़ रेंज में 12 बाघ मिले थे। बाघों की संख्या बढ़ने से वन विभाग के अधिकारी भी गदगद हैं। हालांकि अभी बाघों की संख्या की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
बाघों की संख्या बढ़ाने के लिए अनेक प्रयास किए जा रहे हैं। देश में पहली बार बाघों की गणना कैमरों की मदद से की गई है। 2009 में पहली बार जब बाघों की गणना हुई थी तब अमानगढ़ रेंज में 12 बाघ मिले थे। लेकिन हाल ही में हुई बाघों की संख्या में इजाफा हुआ है। बाघों की संख्या बढ़कर 22 हो गई है। अमानगढ़ रेंज में बाघों का कुनबा बढ़ गया है। रेंज में बाघों की गणना के लिए 90 कैमरे लगाए गए थे। इन कैमरों में अलग अलग जगह पर बाघों की तस्वीर कैद हुई। कद, काठी, हाव भाव आदि के आधार पर विशेषज्ञों की टीम ने बाघों की गणना की। गणना में विशेषज्ञों ने अमानगढ़ रेंज में 22 बाघ होने की पुष्टि की है। हालांकि यह भी माना जा रहा है कि कुछ बाघ कैमरे के सर्विलांस में आने से रह गए होंगे। अमानगढ़ वन रेंज कार्बेट पार्क से सटा हुआ है। बाघों का कार्बेट पार्क से अमानगढ़ रेंज में आनाजाना है। बाघों की मौजूदगी के कारण अमानगढ़ रेंज जिले का मशहूर पर्यटन केंद्र है। यहां पर देश भर से सेलानी वन्य पशुओं को देखने के लिए आते हैं। वहीं पूर्व डीएफओ नरेंद्र सिंह के अनुसार अगर अमानगढ़ वन रेंज में बाघों की संख्या बढ़ी है तो यह एक सुखद खबर है। बाघों की संख्या बढ़ाने के लिए उनके और संरक्षण की जरूरत है।
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कभी जोड़े में नहीं रहता बाघ
बाघिन एक बार में एक से छह बच्चे तक को जन्म दे सकती है। बाघ कभी जोड़े में नहीं रहते हैं। केवल प्रणय के समय ही बाघिन व बाघ कुछ समय के लिए साथ रहते हैं। बाघिन अकेले ही अपने बच्चों को पालती है। वयस्क नर व वयस्क मादा कभी साथ नहीं रहते।
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बाघिन ही सिखाती है शिकार
बाघिन ही अपने बच्चों को शिकार करना, तैरना आदि सिखाती है। लेकिन बच्चों के बड़े होने पर शिकार का ज्यादा हिस्सा खाने को लेकर झगड़ा होने लगता है। तब बच्चे खुद ही मां के पास से भाग जाते हैं।
कुदरती रूप से भी इलाके का राजा
बाघ तीन साल में वयस्क होता है। बाघ कुदरती रूप से भी अपने इलाके का राजा होता है। वयस्क बाघ अपना इलाका खुद तय करता है। वह अपने इलाके की सीमा के पेड़ों पर अपने पंजे से खरोंच के निशान लगाता है। उसके इलाके में कोई और बाघ या बाघिन घुस आए तो दोनों में वर्चस्व के लिए लड़ाई होती है। ऐसी लड़ाइयों में कभी कभी बूढ़े बाघों को अपनी जान से हाथ भी धोना पड़ जाता है।