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पुलों के निर्माण के लिए बनाए गए बाईपास छोड़ दिए कच्चे
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बिजनौर कोतवाली मार्ग में सड़क पर भरे पानी से जमा कीचड़।
- फोटो : BIJNOR
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बिजनौर। हाईवे का निर्माण होने तक सड़क की एक पटरी को सुरक्षित किया जाना था लेकिन ऐसा नहीं किया गया। यातायात की सुगमता का बिलकुल ख्याल नहीं रखा गया है। पुलों के निर्माण के लिए बनाए गए छोटे-छोटे बाईपास भी कच्चे ही छोड़ दिए गए। सड़क काली बनाने के बजाए बजरी डालकर ही छोड़ दिया गया। जिनमें गड्ढे हो गए हैं। मिट्टी और गड्ढों की वजह से ट्रैफिक के संचालन में दिक्कत खड़ी हो रही है।
बिजनौर से कोतवाली मार्ग पानीपत-खटीमा नेशनल हाईवे का हिस्सा है। हाईवे के मानकों पर सड़क का निर्माण किया जा रहा है। हाईवे बन जाने पर लोगों को सुविधा तो होगी लेकिन निर्माण की अवधि में यातायात का सुगम नहीं है। निर्माण विभाग से संबंधित सूत्रों की मानें तो सड़क बनाते हुए पहले एक लेन तैयार करनी थी। वहीं एक लेन को ट्रैफिक के लिए छोड़ा जाना था। नई सड़क की एक लेन तैयार होने के बाद ही दूसरी पर निर्माण किए जाने का प्रावधान होता है। हालांकि कोतवाली मार्ग के निर्माण में एजेंसी ने तमाम मानकों को दरकिनार कर दिया।
बता दें कि मार्ग में दस से अधिक पुल और पुलियों का निर्माण चल रहा है। जिनके लिए छोटे छोटे बाईपास बनाए गए है। मौके की हकीकत देखकर ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि आखिर इस सड़क पर ट्रैफिक चल कैसे रहा है। बाईपास पर बजरी डालकर इतिश्री कर ली गई। बजरी भी मिट्टी में धंस चुकी है, अब ऊपर मिट्टी उड़ती हुई साफ दिखाई दे रही है।
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गड्ढों में भरे पानी में फिसल रहे बाइक सवार
बरुकी के पास के मंडप के सामने निर्माण एजेंसी की ओर से बनाए गए वैकल्पिक मार्ग में पानी भरा हुआ है। कारण है गहरे गड्ढों में पानी भरना। कीचड़ में बाइक सवार फिसलकर गिर रहे हैं। चार पहिया वाहनों का भी निकलना मुश्किल रहता है।
जून तक एक लेन तैयार करने का दावा
यूं तो निर्माण कंपनी सड़क की एक लेन जून तक तैयार करने का दावा कर ही है लेकिन तब तक ट्रैफिक चलेगा कैसे यह सवाल बना हुआ है। क्योंकि लोगों को दिक्कत भारी हो रही है। कार और बाइक वालों ने दूसरे रास्तों से निकलना शुरु कर दिया है। लोग लंबी दूरी तय कर दूसरे रास्तों से बिजनौर पहुंच रहे हैं। सड़क पर सिर्फ निजी और रोडवेज की बस ही चल रही हैं, जिनका संचालन बनाए रखना मजबूरी है। रोडवेज के भी कई चालक इस सड़क पर बस ले जाने से इनकार कर देते हैं।
वर्जन::
जून तक एक लेन तैयार कर ली जाएगी। धूल नहीं उड़े इसके लिए टैंकर से पानी डलवाया जा रहा है। पानी के छिड़काव को तीन टैंकर और बढ़ा दिए हैं। सड़क के निर्माण के समय में यातायात में परेशानी नहीं हो, इसके लिए पूरे प्रयास किए जा रहे हैं। जो डायवर्जन लंबे चलने है, उन्हें पक्का बनाया जाएगा। बाकी थोड़े समय के लिए किए गए डायवर्जन पर पक्की सड़क नहीं बनती है।
- सत्येंद्र पांडेय, प्रोजेक्ट मैनेजर
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बिजनौर से कोतवाली मार्ग पानीपत-खटीमा नेशनल हाईवे का हिस्सा है। हाईवे के मानकों पर सड़क का निर्माण किया जा रहा है। हाईवे बन जाने पर लोगों को सुविधा तो होगी लेकिन निर्माण की अवधि में यातायात का सुगम नहीं है। निर्माण विभाग से संबंधित सूत्रों की मानें तो सड़क बनाते हुए पहले एक लेन तैयार करनी थी। वहीं एक लेन को ट्रैफिक के लिए छोड़ा जाना था। नई सड़क की एक लेन तैयार होने के बाद ही दूसरी पर निर्माण किए जाने का प्रावधान होता है। हालांकि कोतवाली मार्ग के निर्माण में एजेंसी ने तमाम मानकों को दरकिनार कर दिया।
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बता दें कि मार्ग में दस से अधिक पुल और पुलियों का निर्माण चल रहा है। जिनके लिए छोटे छोटे बाईपास बनाए गए है। मौके की हकीकत देखकर ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि आखिर इस सड़क पर ट्रैफिक चल कैसे रहा है। बाईपास पर बजरी डालकर इतिश्री कर ली गई। बजरी भी मिट्टी में धंस चुकी है, अब ऊपर मिट्टी उड़ती हुई साफ दिखाई दे रही है।
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गड्ढों में भरे पानी में फिसल रहे बाइक सवार
बरुकी के पास के मंडप के सामने निर्माण एजेंसी की ओर से बनाए गए वैकल्पिक मार्ग में पानी भरा हुआ है। कारण है गहरे गड्ढों में पानी भरना। कीचड़ में बाइक सवार फिसलकर गिर रहे हैं। चार पहिया वाहनों का भी निकलना मुश्किल रहता है।
जून तक एक लेन तैयार करने का दावा
यूं तो निर्माण कंपनी सड़क की एक लेन जून तक तैयार करने का दावा कर ही है लेकिन तब तक ट्रैफिक चलेगा कैसे यह सवाल बना हुआ है। क्योंकि लोगों को दिक्कत भारी हो रही है। कार और बाइक वालों ने दूसरे रास्तों से निकलना शुरु कर दिया है। लोग लंबी दूरी तय कर दूसरे रास्तों से बिजनौर पहुंच रहे हैं। सड़क पर सिर्फ निजी और रोडवेज की बस ही चल रही हैं, जिनका संचालन बनाए रखना मजबूरी है। रोडवेज के भी कई चालक इस सड़क पर बस ले जाने से इनकार कर देते हैं।
वर्जन::
जून तक एक लेन तैयार कर ली जाएगी। धूल नहीं उड़े इसके लिए टैंकर से पानी डलवाया जा रहा है। पानी के छिड़काव को तीन टैंकर और बढ़ा दिए हैं। सड़क के निर्माण के समय में यातायात में परेशानी नहीं हो, इसके लिए पूरे प्रयास किए जा रहे हैं। जो डायवर्जन लंबे चलने है, उन्हें पक्का बनाया जाएगा। बाकी थोड़े समय के लिए किए गए डायवर्जन पर पक्की सड़क नहीं बनती है।
- सत्येंद्र पांडेय, प्रोजेक्ट मैनेजर