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Bushes growing in wedding halls, how will marriages take place here
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बरातघरों में उग रही झाड़ियां, कैसे होंगी यहां शादियां
मंडावली/नजीबाबाद। मंडावली क्षेत्र के गांवों में ग्रामीणों की सुविधा के लिए बनाए गए बरातघरों को ग्रामीणों को कोई लाभ नहीं मिल रहा है। बरातघर पिछले एक दशक से क्षतिग्रस्त है। देखभाल और सफाई न होने यहां घास और झाड़ियां भी उग गई हैं। जिस कारण ग्रामीण बरातघरों में शादी समारोह का आयोजन करने से परहेज कर रहे हैं।
बसपा सरकार के शासन में वर्ष 1995 में गांव प्रेमपुरी, मोहनपुर, शेखुपुरा आलम में लाखों की लागत से बरातघर का निर्माण कराया गया था। ग्रामीण मनीराम, राजेंद्र सिंह, हेतराम सिंह, मोहनपुर, विपिन कुमार, रवि कुमार का कहना है कि बरातघरों में पंखे, कुर्सियां और मेज भी उपलब्ध कराए गए थे। कुछ सामान बरातघरों से चोरी हो गया तो कई सामानों को शरारती तत्वों ने तोड़ दिया। देखरेख के अभाव में ये बरातघर बदहाल हो गए। जिस कारण पिछले 17 वर्षों में सिर्फ एक-दो कार्यक्रम ही आयोजित हो सके। बरातघरों के क्षतिग्रस्त होने से ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा है।
ग्रामीणों का कहना है कि बरातघरों में सफाई व्यवस्था दुरुस्त न होने से ग्रामीणों का बरातघरों से रुझान खत्म हो गया। शादी विवाह व अन्य समारोह के लिए ग्रामीणों को इधर-उधर दौड़ लगानी पड़ी। ग्रामीणों ने कई बार प्रशासन से बरातघर की मरम्मत कराने की मांग की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। देखरेख के अभाव में सभी बरातघर वीरान पड़े है।
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डेढ़ माह पहले बरातघर की सफाई कराई गई थी, लेकिन कुछ ग्रामीण वहां गंदगी डाल रहे हैं। जिनकी शिकायत की जाएगी। - भगीरथ सिंह, ग्राम प्रधान, शेखुपुरा आलम।
बरातघर की सफाई के लिए धनराशि उपलब्ध नहीं है, धनराशि आने के बाद ही बरातघर में सफाई कराई जाएगी। - दीपक कुमार, ग्राम प्रधान, प्रेमपुरी।
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मंडावली/नजीबाबाद। मंडावली क्षेत्र के गांवों में ग्रामीणों की सुविधा के लिए बनाए गए बरातघरों को ग्रामीणों को कोई लाभ नहीं मिल रहा है। बरातघर पिछले एक दशक से क्षतिग्रस्त है। देखभाल और सफाई न होने यहां घास और झाड़ियां भी उग गई हैं। जिस कारण ग्रामीण बरातघरों में शादी समारोह का आयोजन करने से परहेज कर रहे हैं।
बसपा सरकार के शासन में वर्ष 1995 में गांव प्रेमपुरी, मोहनपुर, शेखुपुरा आलम में लाखों की लागत से बरातघर का निर्माण कराया गया था। ग्रामीण मनीराम, राजेंद्र सिंह, हेतराम सिंह, मोहनपुर, विपिन कुमार, रवि कुमार का कहना है कि बरातघरों में पंखे, कुर्सियां और मेज भी उपलब्ध कराए गए थे। कुछ सामान बरातघरों से चोरी हो गया तो कई सामानों को शरारती तत्वों ने तोड़ दिया। देखरेख के अभाव में ये बरातघर बदहाल हो गए। जिस कारण पिछले 17 वर्षों में सिर्फ एक-दो कार्यक्रम ही आयोजित हो सके। बरातघरों के क्षतिग्रस्त होने से ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा है।
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ग्रामीणों का कहना है कि बरातघरों में सफाई व्यवस्था दुरुस्त न होने से ग्रामीणों का बरातघरों से रुझान खत्म हो गया। शादी विवाह व अन्य समारोह के लिए ग्रामीणों को इधर-उधर दौड़ लगानी पड़ी। ग्रामीणों ने कई बार प्रशासन से बरातघर की मरम्मत कराने की मांग की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। देखरेख के अभाव में सभी बरातघर वीरान पड़े है।
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डेढ़ माह पहले बरातघर की सफाई कराई गई थी, लेकिन कुछ ग्रामीण वहां गंदगी डाल रहे हैं। जिनकी शिकायत की जाएगी। - भगीरथ सिंह, ग्राम प्रधान, शेखुपुरा आलम।
बरातघर की सफाई के लिए धनराशि उपलब्ध नहीं है, धनराशि आने के बाद ही बरातघर में सफाई कराई जाएगी। - दीपक कुमार, ग्राम प्रधान, प्रेमपुरी।