Budget 2024 : मोदी सरकार के बजट से किसान निराश, बोले- छलने का किया काम, सपने दिखाए पर फायदा कुछ नहीं
Budget 2024 : केंद्र सरकार के बजट से किसान निराश हैं। सभी किसान नेताओं ने अंतरिम बजट पर अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं। किसानों ने कहा कि बजट में छलने का काम किया है।
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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपना अंतरिम बजट पेश किया। बजट में उन्होंने किसान हित और उनके विकास के लिए कई योजनाओं के फायदे बताएं और किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए योजनाओं को बताया। पेश अंतरिम बजट को किसानों ने छलने वाला बजट बताया। किसान और विपक्षी नेताओं ने कहा कि बजट में पिछली योजनाओं का गुणगान किया है और भविष्य के लिए धरातल के सपने दिखाने की बात की।
- भारतीय किसान यूनियन टिकैत के जिलाध्यक्ष चौधरी सत्यवीर सिंह सोनू ने बताया कि बजट में किसानों और युवाओं को छलने का काम किया है। फसल बीमा योजना की बात की गई, लेकिन किसानों के फसलों के मूल्य के एमएसपी कानून बनाने का जिक्र नहीं है। उर्वरकों की कीमत न बढ़ाकर वजन कम कर महंगाई से कमर तोड़ी जा रही है।
- राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के पश्चिमी उत्तर प्रदेश महासचिव कैलाश लांबा ने बताया कि ये चुनावी बजट है। बजट में शब्दों का खेल है और किसानों के लिए कुछ खास घोषणा नहीं है। किसान, कृषि कल्याण के लिए योजनाएं बनाई जा रही हैं, लेकिन धरातल पर आती नहीं है।
- भारतीय किसान यूनियन अराजनैतिक के जिलाध्यक्ष चौधरी नितिन सिरोही ने बताया कि इस बजट से किसानों को ज्यादा उम्मीद नहीं थी। एक देश एक टैक्स को लागू कर सकते हैं तो एक फसल एक मूल्य को लागू किया जा सकता है। बजट में कोई नई योजना कृषि कल्याण के लिए नहीं लाई गई है।
- राष्ट्रीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष महिपाल तोमर ने बताया कि सरकार को कृषि क्षेत्र में सुविधाएं बढ़ाए जाने की जरूरत थी। इस बजट से किसानों को निराशा मिली है। बजट में फसल मूल्य व उर्वरकों के मूल्य कम या अनुदान बढ़ाने के लिए कुछ नहीं है। चुनाव के माहौल में किसानों की अनदेखी।
- भारतीय किसान यूनियन चढ़ूनी के युवा प्रदेशाध्यक्ष विकास चौधरी ने बताया कि किसान, मध्यवर्गीय नागरिकों और कर्मचारियों के लिए बजट खास नहीं है। कर्मचारियों के लिए आयकर में कोई राहत नहीं दी। क्या ये सिर्फ चुनावी बजट है? किसानों की आय बढ़ाने, बेरोजगार युवाओं और छात्रों के लिए कुछ नहीं किया।
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- रालोद महिला मोर्चा की पूर्व जिलाध्यक्ष पूनम चौधरी ने बताया कि अंतिम बजट में किसानों के उर्वरक, बीज और दवाइयों पर कोई छूट का जिक्र नहीं किया गया। छुट्टा पशुओं से होने वाले नुकसान की भरपाई कैसे हो, यह भी नहीं बताया गया। गांव की गृहिणियों के लिए भी इस बजट में कुछ खास नहीं है।
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