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अटूट प्यार का प्रतीक है भाई बहन का मंदिर
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अटूट प्यार का प्रतीक है चुड़ियाखेड़ा में भाई-बहन का मंदिर
हल्दौर(बिजनौर)। यूं तो देशभर में गांवों के बाहर ग्राम देवताओं के थले और मंदिर देखने को मिल जाएंगे, लेकिन भाई-बहन का मंदिर शायद अकेला है। चुड़ियाखेड़ा के जंगल में बना भाई-बहन का मंदिर अटूट प्यार का प्रतीक है। सदियों से भाई-बहन के मंदिर में पूजा अर्चना होती चली आ रही है। दरअसल एक किंवदंती के अनुसार डाकुओं से घिरने के बाद बहन की लाज बचाने के लिए भाई ने ईश्वर से प्रार्थना की थी। जिस पर दोनों भाई-बहन पत्थर की शिला में बदल गए थे। भैयादूज और रक्षाबंधन के मौके पर स्थानीय लोग इस मंदिर की कहानी सुनाते नजर आते हैं।
बिजनौर-नहटौर मार्ग पर स्थित गांव चुड़ियाखेड़ा के जंगल में एक अति प्राचीन सर्व मनोकामना पूर्ण शक्ति पीठ मंदिर है। इस मंदिर में भाई बहन की देवी- देवता के रूप में शिला विराजमान हैं। हालांकि मंदिर में अन्य कई देवी-देवताओं की मूर्तियां भी स्थापित कराई गई हैं। क्षेत्रीय लोग इस मंदिर में अटूट आस्था रखते हैं। लोगों के अनुसार सतयुग के दौरान एक भाई अपनी बहन को उसकी ससुराल से लेकर घर लौट रहा था। चिड़ियाखेड़ा के पास डाकुओं ने बहन भाई को राह में जबरन रोक लिया। डाकुओं ने बहन भाई के साथ दुर्व्यवहार और बदसलूकी करने का प्रयास किया। भाई ने डाकुओं से अपनी बहन का बचाव कराने के लिए ईश्वर से प्रार्थना की और खुद को पाषाण में परिवर्तित करा लिया। तब से अब तक भाई-बहन की दोनों मूर्तियां पत्थर के रूप में मंदिर में विराजमान हैं।
आषाढ़ की पूर्णिमा को होता है भंडारा
मंदिर के पुजारी सुक्खे सिंह बताते हैं कि भाई-बहन की मूर्तियां सतयुग के काल की बताई जाती हैं। मंदिर में हर वर्ष आषाढ़ मास की गुरु पूर्णिमा को भंडारे का आयोजन किया जाता है। प्रत्येक मास में शुक्ल पक्ष हर सोमवार को श्रद्धालु प्रसाद चढ़ाते हैं।
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यहां मिलता है दीर्घायु का आशीर्वाद : मूलचंद
गांव नांगलजट निवासी मूलचंद ने बताया कि मंदिर में भाई-बहन मंदिर में माथा टेक कर सच्चे मन से पूजा अर्चना करते हैं तो देव रूपी भाई बहन के आशीर्वाद से उनकी दीर्घायु होती है।
पूजा अर्चना करते हैं लोग : सोमपाल सिंह
गांव नांगलजट निवासी सोमपाल सिंह का कहना है कि विवाह उपरांत क्षेत्र में विवाहित जोड़े मंदिर में जाकर पूजा अर्चना करते हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से की गई पूजा अर्चना से नए दंपती के जीवन में खुशहाली, प्रगति और उन्हें दीर्घायु प्राप्त होती है।
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हल्दौर(बिजनौर)। यूं तो देशभर में गांवों के बाहर ग्राम देवताओं के थले और मंदिर देखने को मिल जाएंगे, लेकिन भाई-बहन का मंदिर शायद अकेला है। चुड़ियाखेड़ा के जंगल में बना भाई-बहन का मंदिर अटूट प्यार का प्रतीक है। सदियों से भाई-बहन के मंदिर में पूजा अर्चना होती चली आ रही है। दरअसल एक किंवदंती के अनुसार डाकुओं से घिरने के बाद बहन की लाज बचाने के लिए भाई ने ईश्वर से प्रार्थना की थी। जिस पर दोनों भाई-बहन पत्थर की शिला में बदल गए थे। भैयादूज और रक्षाबंधन के मौके पर स्थानीय लोग इस मंदिर की कहानी सुनाते नजर आते हैं।
बिजनौर-नहटौर मार्ग पर स्थित गांव चुड़ियाखेड़ा के जंगल में एक अति प्राचीन सर्व मनोकामना पूर्ण शक्ति पीठ मंदिर है। इस मंदिर में भाई बहन की देवी- देवता के रूप में शिला विराजमान हैं। हालांकि मंदिर में अन्य कई देवी-देवताओं की मूर्तियां भी स्थापित कराई गई हैं। क्षेत्रीय लोग इस मंदिर में अटूट आस्था रखते हैं। लोगों के अनुसार सतयुग के दौरान एक भाई अपनी बहन को उसकी ससुराल से लेकर घर लौट रहा था। चिड़ियाखेड़ा के पास डाकुओं ने बहन भाई को राह में जबरन रोक लिया। डाकुओं ने बहन भाई के साथ दुर्व्यवहार और बदसलूकी करने का प्रयास किया। भाई ने डाकुओं से अपनी बहन का बचाव कराने के लिए ईश्वर से प्रार्थना की और खुद को पाषाण में परिवर्तित करा लिया। तब से अब तक भाई-बहन की दोनों मूर्तियां पत्थर के रूप में मंदिर में विराजमान हैं।
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आषाढ़ की पूर्णिमा को होता है भंडारा
मंदिर के पुजारी सुक्खे सिंह बताते हैं कि भाई-बहन की मूर्तियां सतयुग के काल की बताई जाती हैं। मंदिर में हर वर्ष आषाढ़ मास की गुरु पूर्णिमा को भंडारे का आयोजन किया जाता है। प्रत्येक मास में शुक्ल पक्ष हर सोमवार को श्रद्धालु प्रसाद चढ़ाते हैं।
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यहां मिलता है दीर्घायु का आशीर्वाद : मूलचंद
गांव नांगलजट निवासी मूलचंद ने बताया कि मंदिर में भाई-बहन मंदिर में माथा टेक कर सच्चे मन से पूजा अर्चना करते हैं तो देव रूपी भाई बहन के आशीर्वाद से उनकी दीर्घायु होती है।
पूजा अर्चना करते हैं लोग : सोमपाल सिंह
गांव नांगलजट निवासी सोमपाल सिंह का कहना है कि विवाह उपरांत क्षेत्र में विवाहित जोड़े मंदिर में जाकर पूजा अर्चना करते हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से की गई पूजा अर्चना से नए दंपती के जीवन में खुशहाली, प्रगति और उन्हें दीर्घायु प्राप्त होती है।