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मार्च तक बन जाएगा पुल, एप्रोच में एनओसी की अड़चन
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बिजनौर-बंदायु स्टेट हाईवे पर छोईया नदी का पुराना पुल।
- फोटो : BIJNOR
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पुल निर्माण का कार्य तेजी पर, पहुंच मार्ग की एनओसी नहीं मिली
बिजनौर। बिजनौर-बदायूं स्टेट हाईवे पर छोईया नदी के पुल का निर्माण मार्च तक पूरा हो जाएगा, लेकिन इसके पुल का पहुंच मार्ग एनओसी की अड़चन में फंस गया है। पुल बन जाने के बाद पहुंच मार्ग वन मंत्रालय की एनओसी मिलने तक नहीं कराया जा सकेगा। ऐसे में पुराने पुल से ही वाहनों का आवागमन जारी रहेगा।
2020 में छोइया नदी पर पुल बनाए जाने के लिए तीन करोड़ 75 लाख रुपये का बजट पास हुआ था। 2021 के शुरुआत में ही छोइया नदी पर पुल का निर्माण चालू कर दिया गया। पुल के पिलर बन चुके हैं, गार्डर बनाकर स्लैब आदि बनाना बाकी रह गया है। लोक निर्माण विभाग का मानना है कि मार्च 2023 तक पुल का निर्माण पूरा हो जाएगा। उधर, पुल भले ही बनकर तैयार हो जाएगा, लेकिन सड़क से जोड़ने के लिए एनओसी की जरूरत पड़ेगी। बता दें कि जिस जगह पर पुल का निर्माण कराया जा रहा है, वह हस्तिनापुर वन्य जीव अभयारण्य का क्षेत्र है। ऐसे में भारत सरकार से अनुमति लेना जरूरी होता है।
विभाग ने पुल का निर्माण तो चालू करा दिया था, अब एनओसी फाइलों में फंसी हुई है। हालांकि विभाग की ओर से एनओसी के लिए वन विभाग और वन मंत्रालय को फाइल प्रेषित की जा चुकी है। हालांकि अभी एनओसी मिलने में काफी लंबा वक्त लग सकता है। जब तक एनओसी नहीं मिलेगी, पुल का निर्माण पूरा होने के बाद भी सड़क से नहीं जा सकेगा।
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मुगलकालीन पुल से गुजर रहा ट्रैफिक
फिलहाल छोइया नदी के जिस पुल से ट्रैफिक गुजर रहा है, उसे मुगलकालीन बताया जाता है। पुल संकरा है। इस पुराने पुल में सीमेंट और लोहे का इस्तेमाल नहीं किया गया था। पुल में डाट बने हुए हैं। लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता सुनील सागर बताते हैं कि छोइया नदी का पुराना पुल संभवत: मुगलकाल में बना हुआ लगता है। क्योंकि ब्रिटिश काल में भी लोहे का इस्तेमाल पुल निर्माण में किया जाता था। पुल एतिहासिक होने की वजह से तोड़ा नहीं जाएगा। इसलिए नया पुल बराबर में बनाया जा रहा है। वरना पहले पुराना तोड़कर नया पुल बनाने की योजना था।
छोइया नदी पर बन रहे पुल का निर्माण मार्च तक पूरा हो जाएगा, लेकिन पहुंच मार्ग तब तक नहीं बन पाएगा जब तक वन मंत्रालय से एनओसी न मिल जाए। एनओसी के लिए आवेदन कर रखा है। पुल जिस जगह बन रहा है, वह क्षेत्र हस्तिनापुर वन्य जीव अभ्यारण्य में आता है। पुराने पुल की जर्जर होती हालत को देखते हुए एनओसी के लिए प्रयासों में तेजी लाई जा रही है।
-सुनील सागर, अधिशासी अभियंता लोक निर्माण विभाग
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बिजनौर। बिजनौर-बदायूं स्टेट हाईवे पर छोईया नदी के पुल का निर्माण मार्च तक पूरा हो जाएगा, लेकिन इसके पुल का पहुंच मार्ग एनओसी की अड़चन में फंस गया है। पुल बन जाने के बाद पहुंच मार्ग वन मंत्रालय की एनओसी मिलने तक नहीं कराया जा सकेगा। ऐसे में पुराने पुल से ही वाहनों का आवागमन जारी रहेगा।
2020 में छोइया नदी पर पुल बनाए जाने के लिए तीन करोड़ 75 लाख रुपये का बजट पास हुआ था। 2021 के शुरुआत में ही छोइया नदी पर पुल का निर्माण चालू कर दिया गया। पुल के पिलर बन चुके हैं, गार्डर बनाकर स्लैब आदि बनाना बाकी रह गया है। लोक निर्माण विभाग का मानना है कि मार्च 2023 तक पुल का निर्माण पूरा हो जाएगा। उधर, पुल भले ही बनकर तैयार हो जाएगा, लेकिन सड़क से जोड़ने के लिए एनओसी की जरूरत पड़ेगी। बता दें कि जिस जगह पर पुल का निर्माण कराया जा रहा है, वह हस्तिनापुर वन्य जीव अभयारण्य का क्षेत्र है। ऐसे में भारत सरकार से अनुमति लेना जरूरी होता है।
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विभाग ने पुल का निर्माण तो चालू करा दिया था, अब एनओसी फाइलों में फंसी हुई है। हालांकि विभाग की ओर से एनओसी के लिए वन विभाग और वन मंत्रालय को फाइल प्रेषित की जा चुकी है। हालांकि अभी एनओसी मिलने में काफी लंबा वक्त लग सकता है। जब तक एनओसी नहीं मिलेगी, पुल का निर्माण पूरा होने के बाद भी सड़क से नहीं जा सकेगा।
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मुगलकालीन पुल से गुजर रहा ट्रैफिक
फिलहाल छोइया नदी के जिस पुल से ट्रैफिक गुजर रहा है, उसे मुगलकालीन बताया जाता है। पुल संकरा है। इस पुराने पुल में सीमेंट और लोहे का इस्तेमाल नहीं किया गया था। पुल में डाट बने हुए हैं। लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता सुनील सागर बताते हैं कि छोइया नदी का पुराना पुल संभवत: मुगलकाल में बना हुआ लगता है। क्योंकि ब्रिटिश काल में भी लोहे का इस्तेमाल पुल निर्माण में किया जाता था। पुल एतिहासिक होने की वजह से तोड़ा नहीं जाएगा। इसलिए नया पुल बराबर में बनाया जा रहा है। वरना पहले पुराना तोड़कर नया पुल बनाने की योजना था।
छोइया नदी पर बन रहे पुल का निर्माण मार्च तक पूरा हो जाएगा, लेकिन पहुंच मार्ग तब तक नहीं बन पाएगा जब तक वन मंत्रालय से एनओसी न मिल जाए। एनओसी के लिए आवेदन कर रखा है। पुल जिस जगह बन रहा है, वह क्षेत्र हस्तिनापुर वन्य जीव अभ्यारण्य में आता है। पुराने पुल की जर्जर होती हालत को देखते हुए एनओसी के लिए प्रयासों में तेजी लाई जा रही है।
-सुनील सागर, अधिशासी अभियंता लोक निर्माण विभाग