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परिषदीय विद्यालयों में नहीं पहुंची किताबें
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परिषदीय विद्यालयों में नहीं पहुंचीं किताबें
बिजनौर। शिक्षा सत्र शुरू हुए चार माह बीत गए, लेकिन परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं के हाथों में किताबें नहीं पहुंची हैं। किताबें नहीं आने से छात्र-छात्राएं पुरानी किताबों से पढ़ने को मजबूर हैं। अभी जनपद में सिर्फ 65 हजार किताबें पहुंची हैं। वह भी सत्यापन के बाद ही विद्यालयों में जाएंगी।
जनपद में 2119 परिषदीय विद्यालयों में से 1354 प्राइमरी विद्यालय, 376 उच्च प्राथमिक विद्यालय और 389 कंपोजिट विद्यालय हैं। इनमें करीब सवा दो लाख छात्र-छात्राएं पढ़ाई कर रहे हैं। परिषदीय प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों का भी शैक्षिक सत्र एक अप्रैल से शुरू होता है। विद्यालय खुले इतने दिन हो गए, लेकिन अभी तक नए शैक्षिक सत्र की किताबें नहीं आई हैं। ऐसे में छात्र-छात्राएं बिना किताबें या पुरानी किताबों के सहारे ही पढ़ाई कर रहे हैं। व्यवस्था बनाने के लिए शिक्षकों ने पुरानी किताबें एकत्र की थी। उन पुरानी किताबों से ही छात्र ज्ञान जुटा रहे हैं। बेसिक शिक्षा विभाग अभी तक छात्रों के हाथों में नई किताबें नहीं थमा पाया है। शिक्षक नेता गुलशन गुप्ता ने बताया कि किताबें आने में देरी से पढ़ाई पर असर आता है। पुरानी किताबों से ही छात्रों को पढ़ाया जा रहा है। शैक्षिक सत्र आरंभ होने से पहले ही किताबें विद्यालयों में पहुंचनी चाहिए।
जनपद में 65 हजार किताबें पहुंच गई हैं। बाकी किताबें मंगाने के लिए संस्था से लगातार संपर्क कर रहे हैं। किताबों का सत्यापन कराकर विद्यालयों भेज दी जाएंगी
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- जयकरन यादव, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी।
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बिजनौर। शिक्षा सत्र शुरू हुए चार माह बीत गए, लेकिन परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं के हाथों में किताबें नहीं पहुंची हैं। किताबें नहीं आने से छात्र-छात्राएं पुरानी किताबों से पढ़ने को मजबूर हैं। अभी जनपद में सिर्फ 65 हजार किताबें पहुंची हैं। वह भी सत्यापन के बाद ही विद्यालयों में जाएंगी।
जनपद में 2119 परिषदीय विद्यालयों में से 1354 प्राइमरी विद्यालय, 376 उच्च प्राथमिक विद्यालय और 389 कंपोजिट विद्यालय हैं। इनमें करीब सवा दो लाख छात्र-छात्राएं पढ़ाई कर रहे हैं। परिषदीय प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों का भी शैक्षिक सत्र एक अप्रैल से शुरू होता है। विद्यालय खुले इतने दिन हो गए, लेकिन अभी तक नए शैक्षिक सत्र की किताबें नहीं आई हैं। ऐसे में छात्र-छात्राएं बिना किताबें या पुरानी किताबों के सहारे ही पढ़ाई कर रहे हैं। व्यवस्था बनाने के लिए शिक्षकों ने पुरानी किताबें एकत्र की थी। उन पुरानी किताबों से ही छात्र ज्ञान जुटा रहे हैं। बेसिक शिक्षा विभाग अभी तक छात्रों के हाथों में नई किताबें नहीं थमा पाया है। शिक्षक नेता गुलशन गुप्ता ने बताया कि किताबें आने में देरी से पढ़ाई पर असर आता है। पुरानी किताबों से ही छात्रों को पढ़ाया जा रहा है। शैक्षिक सत्र आरंभ होने से पहले ही किताबें विद्यालयों में पहुंचनी चाहिए।
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जनपद में 65 हजार किताबें पहुंच गई हैं। बाकी किताबें मंगाने के लिए संस्था से लगातार संपर्क कर रहे हैं। किताबों का सत्यापन कराकर विद्यालयों भेज दी जाएंगी
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- जयकरन यादव, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी।