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Bijnor News: सही नहीं हो रहा बायोमेडिकल वेस्ट का निस्तारण
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बिजनौर मेडिकल अस्पताल में स्थित बायोमेडिकल वेस्ट का कक्ष।
जान से खिलवाड़
-निजी अस्पताल बायोमेडिकल वेस्ट निस्तारण में बरत रहे लापरवाही
-बायोमेडिकल वेस्ट जमीन में दबाने का नहीं है नियम
-नजीबाबाद में एक निजी अस्पताल में ऑपरेशन के बाद मिट्टी में दबाया गया पैर
-422 निजी अस्पतालों ने बायोमेडिकल वेस्ट कंपनियों से ले रखा है लाइसेंस
-40 अस्पतालों पर बायोमेडिकल वेस्ट में लापरवाही बरतने पर पिछले साल लगा जुर्माना
अमन कुमार शर्मा
बिजनौर। निजी अस्पताल लोगों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं। बायोमेडिकल वेस्ट का सही से निस्तारण नहीं किया जा रहा है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि नजीबाबाद में एक कटा हुआ पैर मिला, जो गैंगरीन होने पर ऑपरेशन के बाद काटा गया था। खुले में बायोमेडिकल वेस्ट डालना लोगों के लिए खतरा है।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से बायोमेडिकल वेस्ट का सही निस्तारण नहीं करने पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। जिले में तीन बायोमेडिकल वेस्ट कंपनियां काम कर रही हैं, जो निजी अस्पतालों से चिकित्सा अपशिष्ट को लेकर जाती हैं। इन कंपनियों से 420 निजी अस्पतालों ने अपना लाइसेंस ले रखा है। इसके बावजूद भी निजी अस्पताल बायोमेडिकल वेस्ट के निस्तारण में लापरवाही बरत रहे हैं। बृहस्पतिवार को नजीबाबाद में कटा हुआ पैर मिला।
इसके बाद पुलिस ने मालन नदी क्षेत्र में जांच पड़ताल की थी। इस पर लाइफलाइन ट्रामा सेंटर के डॉ. रजाउद्दीन ने सीओ अनिल कुमार सिंह को बताया कि उन्होंने गैंगरीन होने पर नहटौर के गांव छजुपुरा निवासी 70 वर्षीय समरपाल का पैर पांच फरवरी को काटा था। मिट्टी में पैर दबा होने से लोगों को इंफेक्शन फैलने का खतरा रहता है।
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खुले में बायोमेडिकल वेस्ट डालने का नहीं है नियम
डॉ. हितेंद्र कुमार ने बताया कि बायोमेडिकल वेस्ट को खुले में डालने का नियम नहीं है। इसके लिए जिले में तीन कंपनियां काम कर रही हैं। अस्पतालों को उन्हें बायोमेडिकल वेस्ट देना चाहिए।
बायोमेडिकल वेस्ट से लोगों को फैल सकता है इंफेक्शन
डॉ. विशाल कुमार कहना है कि जैसे नजीबाबाद में खुले में गैंगरीन से पीड़ित व्यक्ति का कटा हुआ पैर मिला है। इसे कुत्तों ने खाया और नोचा है। अगर अब कुत्ते किसी स्वस्थ व्यक्ति के दांत मारते हैं तो उस व्यक्ति को भी इंफेक्शन फैलने का अधिक खतरा है। ऐसे ही अन्य बायोमेडिकल वेस्ट लोगों के लिए खतरा है। इसलिए इसे खुले में नहीं डालना चाहिए।
पिछले साल भी अस्पतालों पर लगाया गया जुर्माना
सीएमओ कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार स्वास्थ्य विभाग की टीम ने नगरपालिका के साथ मिलकर पिछले साल भी अभियान चलाया था। बायोमेडिकल वेस्ट का सही से निस्तारण नहीं करने पर साल 2023 में करीब 40 अस्पतालों पर जुर्माना लगाया गया। इसके बाद भी अस्पताल संचालक लापरवाही बरत रहे हैं।
बायोमेडिकल वेस्ट को खुले में नहीं डाला जा सकता है। मानव अंग भी ऑपरेशन के बाद बायोमेडिकल वेस्ट ही है। अगर कोई अस्पताल खुले में बायोमेडिकल वेस्ट डालता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। पहले भी अस्पतालों पर इस संबंध में जुर्माना लगाया गया है। - डॉ. विजय कुमार गोयल, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, बिजनौर
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-निजी अस्पताल बायोमेडिकल वेस्ट निस्तारण में बरत रहे लापरवाही
-बायोमेडिकल वेस्ट जमीन में दबाने का नहीं है नियम
-नजीबाबाद में एक निजी अस्पताल में ऑपरेशन के बाद मिट्टी में दबाया गया पैर
-422 निजी अस्पतालों ने बायोमेडिकल वेस्ट कंपनियों से ले रखा है लाइसेंस
-40 अस्पतालों पर बायोमेडिकल वेस्ट में लापरवाही बरतने पर पिछले साल लगा जुर्माना
अमन कुमार शर्मा
बिजनौर। निजी अस्पताल लोगों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं। बायोमेडिकल वेस्ट का सही से निस्तारण नहीं किया जा रहा है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि नजीबाबाद में एक कटा हुआ पैर मिला, जो गैंगरीन होने पर ऑपरेशन के बाद काटा गया था। खुले में बायोमेडिकल वेस्ट डालना लोगों के लिए खतरा है।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से बायोमेडिकल वेस्ट का सही निस्तारण नहीं करने पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। जिले में तीन बायोमेडिकल वेस्ट कंपनियां काम कर रही हैं, जो निजी अस्पतालों से चिकित्सा अपशिष्ट को लेकर जाती हैं। इन कंपनियों से 420 निजी अस्पतालों ने अपना लाइसेंस ले रखा है। इसके बावजूद भी निजी अस्पताल बायोमेडिकल वेस्ट के निस्तारण में लापरवाही बरत रहे हैं। बृहस्पतिवार को नजीबाबाद में कटा हुआ पैर मिला।
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इसके बाद पुलिस ने मालन नदी क्षेत्र में जांच पड़ताल की थी। इस पर लाइफलाइन ट्रामा सेंटर के डॉ. रजाउद्दीन ने सीओ अनिल कुमार सिंह को बताया कि उन्होंने गैंगरीन होने पर नहटौर के गांव छजुपुरा निवासी 70 वर्षीय समरपाल का पैर पांच फरवरी को काटा था। मिट्टी में पैर दबा होने से लोगों को इंफेक्शन फैलने का खतरा रहता है।
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खुले में बायोमेडिकल वेस्ट डालने का नहीं है नियम
डॉ. हितेंद्र कुमार ने बताया कि बायोमेडिकल वेस्ट को खुले में डालने का नियम नहीं है। इसके लिए जिले में तीन कंपनियां काम कर रही हैं। अस्पतालों को उन्हें बायोमेडिकल वेस्ट देना चाहिए।
बायोमेडिकल वेस्ट से लोगों को फैल सकता है इंफेक्शन
डॉ. विशाल कुमार कहना है कि जैसे नजीबाबाद में खुले में गैंगरीन से पीड़ित व्यक्ति का कटा हुआ पैर मिला है। इसे कुत्तों ने खाया और नोचा है। अगर अब कुत्ते किसी स्वस्थ व्यक्ति के दांत मारते हैं तो उस व्यक्ति को भी इंफेक्शन फैलने का अधिक खतरा है। ऐसे ही अन्य बायोमेडिकल वेस्ट लोगों के लिए खतरा है। इसलिए इसे खुले में नहीं डालना चाहिए।
पिछले साल भी अस्पतालों पर लगाया गया जुर्माना
सीएमओ कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार स्वास्थ्य विभाग की टीम ने नगरपालिका के साथ मिलकर पिछले साल भी अभियान चलाया था। बायोमेडिकल वेस्ट का सही से निस्तारण नहीं करने पर साल 2023 में करीब 40 अस्पतालों पर जुर्माना लगाया गया। इसके बाद भी अस्पताल संचालक लापरवाही बरत रहे हैं।
बायोमेडिकल वेस्ट को खुले में नहीं डाला जा सकता है। मानव अंग भी ऑपरेशन के बाद बायोमेडिकल वेस्ट ही है। अगर कोई अस्पताल खुले में बायोमेडिकल वेस्ट डालता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। पहले भी अस्पतालों पर इस संबंध में जुर्माना लगाया गया है। - डॉ. विजय कुमार गोयल, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, बिजनौर