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जैव विविधता पार्क: तीस प्रतिशत काम पूरा, अब बजट का इंतजार

Sun, 03 May 2026 12:58 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 03 May 2026 12:58 AM IST
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Biodiversity Park: 30% work completed, now waiting for budget
बिजनौर। विदुरकुटी के रूप में जिले को एक और पर्यटन स्थल के रूप में पहचान मिलने वाली है। जहां एक ओर पर्यटन विभाग विदुरकुटी के सुंदरीकरण, कैफे, गेस्ट हाउस तक बना रहा है, वहीं वन विभाग गंगा में जैव विविधता पार्क बना रहा है। अब तक तीस प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। अब वन विभाग आगे के बजट का इंतजार कर रहा है। इस साल के अंत तक इसका काम पूरा करने का लक्ष्य भी रखा गया है।
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बिजनौर जिला मुख्यालय से 10 किमी दूर विदुरकुटी के पास वन विभाग जैव विविधता पार्क बना रहा है। इसके लिए साढ़े छह करोड़ रुपये का बजट पास हुआ था। इसके तहत फेंसिंग, पार्क में लगने वाले पौधों की नर्सरी, हट, पार्क के द्वार, नलकूप तैयार हो गए हैं। कुल मिलाकर अभी 30 प्रतिशत काम पूरा हो गया है। वन विभाग का कहना है कि आगे की किस्त का इंतजार किया जा रहा है। यदि बजट मिल जाता है तो इसी साल के अंत में यह पार्क लोगों के घूमने के लिए खोल दिया जाएगा।
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डीएफओ जय सिंह कुशवाह ने बताया कि अभी जैव विविधता पार्क में हर्बल वाटिका, नक्षत्र वाटिका, ट्रैक आदि के बनने का काम बचा हुआ है। बंबू सैटअप तैयार है, लेकिन पार्क के अंदर की सफाई कराई जाएगी।
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- नक्षत्र वाटिका और पंचवटी बढ़ाएंगी शोभा
विदुरकुटी पर विकसित किए जाने वाले पार्क में अलग-अलग वाटिकाएं बनेंगी। जिसमें नक्षत्र वाटिका, पंचवटी वाटिका खास होगी। इनमें ग्रह नक्षत्रों के अनुसार पौधे लगाए जाएंगे। ये पौधे जनपद में मुश्किल से ही दिखाई देते हैं। इसके अलावा फलदार और छायादार पौधे भी लगेंगे। रुद्रा वन भी बनेगा, जिसमें भगवान शिव से संबंधित पौधे लगेंगे। कल्पतरु वन भी बनेगा। जलीय परितंत्र भी विकसित किया जाएगा, जिसमें कमल, मछली और कछुआ आदि रहेंगे। खुशबू देने वाले पौधे भी रोपे जाएंगे।





बजट की डिमांड की गई है: डीएफओ

डीएफओ जय सिंह कुशवाह ने बताया कि जो बजट की किस्त आई थी। उससे काम करा दिया गया है। अब अगली किस्त का इंतजार किया जा रहा है। यदि समय पर बजट मिला तो इसी साल के अंत तक काम पूरा हो जाएगा।

पौराणिक महत्व रखती है विदुरकुटी
विदुर कुटी का पौराणिक महत्व है। इस जमीन पर भगवान श्रीकृष्ण के चरण भी पड़ चुके हैं। महाभारत का युद्ध शुरू होने से पहले महात्मा विदुर ने संन्यास लेकर गंगा किनारे अपना आश्रम बना लिया था। भगवान श्रीकृष्ण ने दुर्योधन के 56 भोग त्यागकर महात्मा विदुर की कुटिया में जाकर बथुए का साग खाया था। यहां पर बथुआ आज भी 12 महीने मिलता है।
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