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पर्यावरण संतुलन के लिए जैव विविधता जरूरी

Sat, 22 May 2021 12:28 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 22 May 2021 12:28 AM IST
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Biodiversity is essential for environmental balance
पर्यावरण संतुलन के लिए जैव विविधता जरूरी
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बिजनौर। आज जब बात जैव विविधता की हो रही है तो गंगा में टूटी इस चेन को दोबारा जोड़ने के लिए अभी और प्रयासों की जरूरत है। ब्रिटिशकाल में गंगा से विलुप्त हुए घड़ियालों का पुनर्वास तो कराया गया, लेकिन अभी इसमें भी कई चुनौतियां आनी बाकी है। आंकड़ों पर नजर डालें तो अब तक गंगा में बिजनौर बैराज से मकदूमपुर घाट तक ही 828 घड़ियाल छोड़े जा चुके हैं। वहीं तीन हजार कछुए गंगा में छोड़े गए, ताकि गंगा की जैव विविधता बनी रहे। लोगों को भी जैवविविधता के बारे में जागरूक करने की जरूरत है।
डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के सीनियर कॉआर्डिनेटर संजीव यादव ने बताया कि हमने वर्ष 2009 में घड़ियाल पुनर्वास का अभियान शुरू किया था। अब तक 828 घड़ियाल छोड़े जा चुके हैं। इनमें से 17 मादा घड़ियाल प्रजनन के लिए तैयार हैं, लेकिन हमारे पास उनके बराबर नर नहीं हैं। वन विभाग के साथ मिलकर इनकी उम्र और लंबाई का नर लगाने का प्रयास चल रहा है। ताकि गंगा में घड़ियाल फिर से स्थापित हो सकें।
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वहीं बिजनौर गंगा बैराज पर हैदरपुर वेटलैंड पक्षियों के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं, लेकिन यहां संरक्षण की बहुत ज्यादा चुनौतियां अभी बाकी है, जिन्हें दूर करना भी जरूरी है। पिछले साल जलकुंभी की परेशानी सबसे ज्यादा थी। पानी रहते तो वन विभाग ने इसे निकलवाया, लेकिन जब पानी सूखा तो भूल गया। अब जब फिर पानी आएगा तो वह हरी हो जाएगी। इसके अलावा फरवरी के बाद मार्च के अंत तक इस झील में पानी रोकने पर भी काम नहीं किया गया है।
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उद्घाटन हुआ, अभी तक नहीं बना गंगा इंटरपिटिशन सेंटर
दो साल पहले गंगा बैराज पर बर्ड फेस्टिवल हुआ था, जिसमें दिल्ली से नमामि गंगे प्रोजेक्ट के बड़े अधिकारी शामिल हुए थे। उस समय गंगा इंटरपिटिशन सेंटर का उद्घाटन भी हुआ, लेकिन आज तक इसका निर्माण नहीं हो पाया। इसे बचाने का मकसद गंगा से जुड़ी सभी जानकारी एक स्थान पर उपलब्ध कराना था।
संतुलन बनाने के लिए जरूरी है घड़ियाल और कछुए
घड़ियाल और कछुए गंगा में संतुलन बनाने का काम भी करते हैं। जैसे बीमार मछलियों और अन्य जानवरों के अवशेषों को ये खा लेते हैं, वहीं तेजी से बढ़ती मछलियों की संख्या को खाकर उन्हें नियंत्रित रखते हैं, इससे दूसरी प्राजतियों को भी पनपने का मौका मिलता है।
गंगा में शिकार रोकना बड़ी चुनौती
वन विभाग को गंगा में बैराज के दोनों ओर वोट उपलब्ध कराई गई, ताकि समय समय पर निरीक्षण हो सके। इसके बावजूद निरीक्षण के नाम पर कुछ खास नहीं होता। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि मुजफ्फरनगर पुलिस ने दो दिन पहले ही हैदरपुर वेटलैंड के आसपास से तस्करी के लिए ले जाए जा रहे 30 से ज्यादा कछुए और दो पाइथन पकड़े हैं, जबकि वन विभाग को इसकी भनक तक नहीं थी।

वर्जन
गंगा में जलीय जीवों का शिकार नहीं होने दिया जाएगा। बिजनौर में इसे लेकर सख्ती बढ़ाई जाएगी। शिकार रोकने के लिए पेट्रोलिंग कराई जाएगी, मुखबिर तंत्र भी मजबूत किया जाएगा।
- विजय सिंह, वन संरक्षक मुरादाबाद मंडल
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