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फर्जी नाम से इंश्योरेंस कराकर भुगतान के लिए कंपनी को भेजे बिल
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फर्जी नाम से इंश्योरेंस करा कंपनी को भेजे बिल
बिजनौर/गजरौला शिव। ठगों ने नकली नाम और पते से एक व्यक्ति का हेल्थ इंश्योरेंस करा लिया और एक अस्पताल में इलाज के फर्जी बिल बनाकर भुगतान के लिए कंपनी को भेज दिए। कंपनी प्रतिनिधि जांच को आए तो फर्जीवाड़े का पता चला।
मंडावर मार्ग पर सर्जन डॉ. राजकुमार का शक्ति नर्सिंग होम है। उनके नर्सिंग होम में एक हेल्थ इंश्योरेंस के प्रतिनिधि जांच के लिए पहुंचे। उन्होंने बताया कि नर्सिंग होम में किसी संजय चड्ढा नाम के व्यक्ति ने उपचार कराया है। उसने बीमा कंपनी का हेल्थ इंश्योरेंस ले रखा था। संजय चड्ढा की ओर से भुगतान के लिए बिल कंपनी को भेजे गए हैं। डॉ. राजकुमार ने बताया कि उनके नर्सिंग होम में संजय चड्ढा नाम के किसी व्यक्ति का उपचार नहीं हुआ है। उन्होंने बताया कि वे केवल आयुष्मान कार्ड धारक मरीजों का ही उपचार करते हैं और किसी निजी कंपनी का हेल्थ इंश्योरेंस लेने वाले मरीजों को नहीं देखते हैं।
इस पर कंपनी प्रतिनिधि दंग रह गए। जब वे जांच के लिए इंश्योरेंस में दर्शाए गए पते पर गए तो वहां भी संजय चड्ढा नाम का कोई व्यक्ति नहीं मिला। कंपनी प्रतिनिधियों को तब फर्जीवाड़े का पूरा मामला सामने आया। डॉ. राजकुमार गुप्ता ने बताया कि उनके यहां इस तरह के तीन मामले आ चुके हैं। सभी मामलों में 50 हजार से अधिक के भुगतान के लिए क्लेम किया गया था। जांच में सभी मामले कंपनी प्रतिनिधियों की पकड़ में आ चुके हैं।
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बिजनौर/गजरौला शिव। ठगों ने नकली नाम और पते से एक व्यक्ति का हेल्थ इंश्योरेंस करा लिया और एक अस्पताल में इलाज के फर्जी बिल बनाकर भुगतान के लिए कंपनी को भेज दिए। कंपनी प्रतिनिधि जांच को आए तो फर्जीवाड़े का पता चला।
मंडावर मार्ग पर सर्जन डॉ. राजकुमार का शक्ति नर्सिंग होम है। उनके नर्सिंग होम में एक हेल्थ इंश्योरेंस के प्रतिनिधि जांच के लिए पहुंचे। उन्होंने बताया कि नर्सिंग होम में किसी संजय चड्ढा नाम के व्यक्ति ने उपचार कराया है। उसने बीमा कंपनी का हेल्थ इंश्योरेंस ले रखा था। संजय चड्ढा की ओर से भुगतान के लिए बिल कंपनी को भेजे गए हैं। डॉ. राजकुमार ने बताया कि उनके नर्सिंग होम में संजय चड्ढा नाम के किसी व्यक्ति का उपचार नहीं हुआ है। उन्होंने बताया कि वे केवल आयुष्मान कार्ड धारक मरीजों का ही उपचार करते हैं और किसी निजी कंपनी का हेल्थ इंश्योरेंस लेने वाले मरीजों को नहीं देखते हैं।
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इस पर कंपनी प्रतिनिधि दंग रह गए। जब वे जांच के लिए इंश्योरेंस में दर्शाए गए पते पर गए तो वहां भी संजय चड्ढा नाम का कोई व्यक्ति नहीं मिला। कंपनी प्रतिनिधियों को तब फर्जीवाड़े का पूरा मामला सामने आया। डॉ. राजकुमार गुप्ता ने बताया कि उनके यहां इस तरह के तीन मामले आ चुके हैं। सभी मामलों में 50 हजार से अधिक के भुगतान के लिए क्लेम किया गया था। जांच में सभी मामले कंपनी प्रतिनिधियों की पकड़ में आ चुके हैं।
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