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हवलदार असद ने गंवाया था बायां हाथ

Thu, 16 Jan 2020 12:30 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 16 Jan 2020 12:30 AM IST
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Bijnor News: Havildar Mohammad Asad
कारगिल युद्ध में दुश्मनों से लोहा लेते हुए अपना हाथ गंवाने वाले मोहम्मद असद । - फोटो : BIJNOR
हवलदार असद ने गंवाया था बायां हाथ
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बिजनौर। सेवानिवृत्त सैनिकों द्वारा सेना दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में देश की सीमा पर दुश्मनों से लोहा लेते हुए शहीद जांबाजों को श्रद्धांजलि दी गई। भारत-पाकिस्तान के बीच 1999 में हुई कारगिल की जंग में नजीबाबाद क्षेत्र के गांव ताहरपुर इरशाद उर्फ गाजी निवासी हवलदार मोहम्मद असद ने दुश्मनों से लोहा लेते हुए बायां हाथ गवां दिया था।
1999 में कारगिल क्षेत्र में पाकिस्तान ने भारत की कुछ चौकियों पर धोखे से कब्जा कर लिया था। इसके बाद भारत को अपनी चौकियों को वापस पाने के लिए पाकिस्तान से जंग करनी पड़ी। दुश्मन से लोहा लेते हुए भारत के 500 से अधिक सैनिक शहीद हो गए थे जबकि 1500 से ज्यादा घायल हो गए थे। इनमें से कई वीर सैनिकों ने शरीर के महत्वपूर्ण अंग गवा दिए थे। कारगिल जंग में नजीबाबाद क्षेत्र के गांव ताहरपुर इरशाद उर्फ गाजी निवासी हवलदार मोहम्मद असद ने दुश्मनों से लोहा लेते हुए अपना बायां हाथ खो दिया था।
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मो. सद का जन्म 1972 में ताहरपुर इरशाद गांव में हुआ था। उनके पिता स्वर्गीय आबिद हुसैन कालागढ़ में सिंचाई विभाग में वरिष्ठ लिपिक के पद पर तैनात थे। मो. असद की प्रारंभिक शिक्षा कालागढ़ में ही हुई। 1990 में कक्षा 11 में पढ़ाई के दौरान ही उनका स्पोर्ट्स कोटे से सेना में चयन हो गया था। वह हॉकी के खिलाड़ी थे और राज्य स्तर पर कई प्रतियोगिताएं खेल चुके थे। उन्होंने बताया कि कारगिल युद्ध के दौरान वे 18 गढ़वाल में हवलदार के पद पर द्रास सेक्टर में तैनात थे।
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13 जून 1999 को दुश्मन के कब्जे से चौकी वापस हासिल करने के दौरान दुश्मन द्वारा दागे गए मोर्टार का छर्रा लगने से गंभीर रूप से घायल हो गए थे। घायल होने के बावजूद करीब पांच किमी पैदल चलकर खुद ही कैंप तक आए। जहां से उन्हें अस्पताल ले जाया गया। खून अधिक बह जाने के कारण चिकित्सक को उनका बायां हाथ काटना पड़ा।

2000 में उन्हें मेडिकल के आधार पर रिटायरमेंट दे दिया गया। 2002 में उन्होंने बिजनौर आकर कृष्णा कॉलेज के सामने सैनिक कोटे से मिला पेट्रोल पंप खोल लिया। 2003 में उन्होंने किरतपुर निवासी निशात अंजुम से शादी कर ली। उनके तीन बच्चे हैं। दो बेटे मो. सैस और मो. जैद तथा एक बेटी नबानाज। इस समय वह बिजनौर के रहमत कॉलोनी में अपना मकान बनाकर रहते हैं।
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