Bijnor News: जिले में बने लोहे के ब्रांडेड उत्पादों को एप के माध्यम से देश-विदेश में मिलेगी पहचान
बिजनौर जनपद में बने कढाव ,कढाई और तवा देश के कोने-कोने में प्रचलित है। अब इसे एप के जरिए नई पहचान मिलेगी। गाजियाबाद व अन्य नगरों से कच्चा माल लाकर यहां पर विभिन्न प्रकार के प्रोडक्ट को तैयार किया जाता है।
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विस्तार
बिजनौर जनपद के धामपुर नगर के नामचीन लोहा उत्पाद (कढ़ाव, कढ़ाई और तवों ) को जल्द ही ब्रांडेड प्रोडक्ट के रूप में एप के माध्यम से देश और विदेशों में पहचान मिलेगी। कमिश्नर मुरादाबाद के आदेश पर पालिका ने तेजी से इस पर काम शुरू कर दिया है। पालिका की ओर से उत्पाद कारखानों, कारोबारियों, व्यापारियों, दुकानदारों का सर्वे कर लिया गया है। यह कारोबार पिछले करीब साठ वर्षों से होता आ रहा है। लेकिन अब तक इस कारोबार को ब्रांडेड उत्पाद के रूप में पहचान नहीं मिल सकी थी।
पालिका के ईओ सुभाष कुमार ,राजस्व निरीक्षक राजेंद्र सिंह ने बताया कि सरकार की ओर से एक निकाय-एक उत्पाद के रूप में पहचान दिलाने के लिए प्रयास किया जा रहा है। जिस प्रकार से देश में शेरकोट में ब्रश, नगीना की काष्ठ कला, नूरपुर की जैकिट का कारोबार ब्रांडेड रूप में प्रदेश के नाम को रोशन कर रहा है। अब जल्द ही धामपुर का लोहा उद्योग देश के ब्रांडेड उत्पादों के रूप में एप के माध्यम से नामचीन होगा।
पालिका ने नगर में लोहे के कढ़ाव, कढ़ाई और तवों का उत्पाद करने वाले कारोबारियों को सर्व पूरा कर लिया है। बकौल ईओ, नगर में करीब 10 कारखाने हैं। इन कारखानों में 37 कुशल कारीगर काम करते हैं। दस अन्य छोटे मोटे दुकानदार हैं जो केवल व्यापार करते आ रहे हैं। कारोबार का वार्षिक टर्नओवर करीब पांच करोड़ से ज्यादा है। साल 1960 से यह कारोबार दिन दोगुनी और रात चौगुनी तरक्की करता आ रहा है।
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पुश्तैनी कारोबार के आगे बढ़ा रहे कुशल श्रमिक, मालिक
कारखानों में काम करने वाले कुशल कारीगरों, मालिकों शौकत अली, परवेज अख्तर, वसीम अहमद, शाहबाज, मुजीब आदि का कहना है कि यह उनका पुश्तैनी कारोबार है। उनके दादा परदादा भी यहीं करते थे। वे भी इसी तरह से पुश्तैनी धंधे को आगे बढ़ा परिवार का पालन पोषण कर रहे हैं।
परिवार के सभी सदस्य इसी कारोबार में लगे हैं। यहां का कढ़ाव, कढ़ाई और तवा देश के हर कोने में प्रसिद्ध है। गाजियाबाद व अन्य नगरों से कच्चे माल (लोहे की चादरें आदि) को लाकर यहां पर विभिन्न प्रकार के प्रोडक्ट तैयार किया जाते हैं। प्रदेश में बरेली, मुरादाबाद, पीलीभीत, बदायुं, सहारनपुर, मेरठ, अलीगढ़ और आगरा आदि जिलों में पर्याप्त मात्रा में निर्यात होता है।
उन्हें तो लागत के साथ मजदूरी चाहिए
श्रमिकों ने बताया कि छह किलोग्राम वजन की कढ़ाई को तैयार करने में 62 रुपए की लागत आती है जिसे 80 रुपये से ज्यादा की कीमत में बेचा जाता है। एक किलो. वजन के तवे को 58 रुपए की लागत के सापेक्ष 75 से अधिक रुपए में बेचा जाता है। वैसे तो ग्राहक जितना बड़ा और वजन का कढ़ाव चाहे वह बनाकर उपलब्ध करा देते हैं। उन्हें तैयार करने पर लागत और उनकी मजदूरी चाहिए।