Bijnor: गुलदार ने वृद्धा को मार डाला, ड्रोन में नहीं आया नजर, जंगल में पिंजरा लगाकर तलाश शुरू
बिजनौर के अजुपुरा जट जंगल में वृद्धा बीरो देवी की मौत के बाद वन विभाग ने गुलदार की तलाश में पांच किलोमीटर के दायरे में ड्रोन उड़ाया, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। पिंजरा लगाया गया है।
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बिजनौर के हीमपुर दीपा क्षेत्र में वृद्धा बीरो देवी की मौत के बाद वन विभाग ने गुलदार की तलाश तेज कर दी है। अजुपुरा जट गांव के जंगल में पांच किलोमीटर के दायरे में ड्रोन उड़ाकर करीब आधे घंटे तक सर्च अभियान चलाया गया, लेकिन गुलदार की तस्वीर या कोई हलचल कैमरे में कैद नहीं हो सकी। वन विभाग ने गुलदार को पकड़ने के लिए जंगल में पिंजरा लगा दिया है। हालांकि, विभाग बीरो देवी की मौत को प्रथम दृष्टया संदिग्ध भी मान रहा है।
पांच किलोमीटर के जंगल में ड्रोन से तलाश, नहीं मिला सुराग
सोमवार देर शाम 65 वर्षीय बीरो देवी अपने बेटे बहाल सिंह उर्फ मनिया के साथ पशुओं के लिए चारा लेने जंगल गई थीं। इसी दौरान गुलदार ने उन पर हमला कर दिया। दूसरे खेत में चारा काट रहे बेटे ने अपनी मां को बचाने के लिए गुलदार से भिड़ने का प्रयास किया, लेकिन वह बीरो देवी को नहीं बचा सका।
घटना के बाद रेंजर दुष्यंत मावी के नेतृत्व में वन विभाग की टीम ने रात में सघन तलाशी अभियान चलाया। करीब पांच किलोमीटर के दायरे में ड्रोन उड़ाया गया। लगभग आधे घंटे तक चले अभियान के बावजूद ड्रोन कैमरे में गुलदार की तस्वीर या किसी तरह की हलचल कैद नहीं हुई।
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गुलदार पकड़ने के लिए लगाया गया पिंजरा
वन विभाग ने गुलदार को पकड़ने के लिए जंगल में पिंजरा लगा दिया है। टीम लगातार क्षेत्र में निगरानी कर रही है और गुलदार की गतिविधियों का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है।
हालांकि, वन विभाग बीरो देवी की मौत को लेकर अभी पूरी तरह आश्वस्त नहीं है। रेंजर दुष्यंत मावी के अनुसार, प्रथम दृष्टया जांच में मामला संदिग्ध लग रहा है, क्योंकि मृतका के शरीर पर गुलदार के पंजों के निशान नहीं मिले हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के कारणों को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
ग्रामीणों में वन विभाग के खिलाफ आक्रोश
घटना के बाद ग्रामीणों में वन विभाग के खिलाफ आक्रोश है। ग्रामीणों ने विभाग पर लापरवाही और उदासीनता बरतने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि यदि वन विभाग ने समय रहते सक्रियता दिखाई होती तो बीरो देवी की जान बचाई जा सकती थी।
ग्रामीणों के अनुसार, दो अप्रैल को इसी जंगल में चचेरे भाई संदीप और मुनीष पर भी गुलदार ने हमला कर उन्हें घायल कर दिया था। उस समय ग्रामीणों की मांग पर वन विभाग ने पिंजरा लगाया था, लेकिन कुछ दिन बाद उसे वहां से हटा लिया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि इसके बाद भी क्षेत्र में गुलदार की मौजूदगी को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई गई।