{"_id":"5f08b4758ebc3e63c62b7205","slug":"bijnor-hunters-called-to-kill-cannibal-guldar-in-almora-dhampur-news-mrt4906287134","type":"story","status":"publish","title_hn":"बिजनौर के जांबाज शिकारी अल्मोड़ा में नरभक्षी गुलदार को मारने के लिए बुलाए गए","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बिजनौर के जांबाज शिकारी अल्मोड़ा में नरभक्षी गुलदार को मारने के लिए बुलाए गए
विज्ञापन
शिकारी नवाब सैदबिन आसिफ
- फोटो : DHAMPUR
अल्मोड़ा में नरभक्षी गुलदार को मारने के लिए बुलाए बिजनौर के शिकारी
धामपुर। बिजनौर के जांबाज शिकारी नवाब सैदबिन आसिफ अल्मोड़ा मेें नरभक्षी गुलदार के शिकार के लिए पहुंच गए हैं। वह अब तक आठ नरभक्षी गुलदार को अपनी रायफल की गोली की निशाना बना चुके हैं।
सैदबिन आसिफ ने बताया कि अल्मोड़ा के भैंसियाछाना ब्लाक के उडल गांव मेें एक नरभक्षी गुलदार के शिकार के लिए वन विभाग ने बाकायदा उन्हें परमिट जारी किया है। डूंगरी पंचायत में गुलदार ने अब तक चार लोगों की जान ले ली है। वन विभाग इस गुलदार को काबू नहीं कर पाया है। उत्तराखंड के वन्यजीव प्रतिपालन वन्य जंतु ने गुलदार को नरभक्षी घोषित कर उसे मारने के लिए परमिट जारी कर दिया है। सैदबिन आसिफ अपने साथी स्योहारा निवासी कुंवर राणा प्रताप सिंह के साथ अल्मोड़ा पहुंच गए है और गुलदार जिस इलाके में सक्रिय है, वहां उसका जायजा ले रहे हैं। अल्मोड़ा में पहले भी वह चार साल पहले जैती में एक मादा नरभक्षी गुलदार को मौत की नींद सुला चुके है। इसके अलावा गढ़वाल, दुगडा आदि में भी नरभक्षी गुलदार उनकी रायफल का निशाना बन चुके हैं। अब तक के इस सफर में आठ नरभक्षी गुलदार उनकी रायफल का निशाना बन चुके हैं।
पिता भी थे जाने माने शूटर
नवाब सैदबिन आसिफ कहते हैं कि शेरकोट रियासत में उनके पिता नवाब आसिफ विकार जिले के जाने माने शूटर रह चुके हैं। वन एवं वन्यजीवों से उनका वास्ता रहा है। वह प्रकृति प्रेमी थे। वन एवं वन्यजीव संरक्षण में उनका योगदान छिपा नहीं है। बचपन से ही रायफल और पिस्टल से निशाना लगाने कसा शौक रहा है। शूटिंग चैंपियनशिप भी अछूती नही रही। यह सब पिता से विरासत में मिला है। अब उनके बेटे बेटी भी इस विरासत को कायम रखेंगे । कार्बेट नेशनल पार्क, राजाजी राष्ट्रीय उद्यान के अलावा उत्तराखंड के वनों में आना जाना उनका खास शौक है।
विज्ञापन
विज्ञापन
धामपुर। बिजनौर के जांबाज शिकारी नवाब सैदबिन आसिफ अल्मोड़ा मेें नरभक्षी गुलदार के शिकार के लिए पहुंच गए हैं। वह अब तक आठ नरभक्षी गुलदार को अपनी रायफल की गोली की निशाना बना चुके हैं।
सैदबिन आसिफ ने बताया कि अल्मोड़ा के भैंसियाछाना ब्लाक के उडल गांव मेें एक नरभक्षी गुलदार के शिकार के लिए वन विभाग ने बाकायदा उन्हें परमिट जारी किया है। डूंगरी पंचायत में गुलदार ने अब तक चार लोगों की जान ले ली है। वन विभाग इस गुलदार को काबू नहीं कर पाया है। उत्तराखंड के वन्यजीव प्रतिपालन वन्य जंतु ने गुलदार को नरभक्षी घोषित कर उसे मारने के लिए परमिट जारी कर दिया है। सैदबिन आसिफ अपने साथी स्योहारा निवासी कुंवर राणा प्रताप सिंह के साथ अल्मोड़ा पहुंच गए है और गुलदार जिस इलाके में सक्रिय है, वहां उसका जायजा ले रहे हैं। अल्मोड़ा में पहले भी वह चार साल पहले जैती में एक मादा नरभक्षी गुलदार को मौत की नींद सुला चुके है। इसके अलावा गढ़वाल, दुगडा आदि में भी नरभक्षी गुलदार उनकी रायफल का निशाना बन चुके हैं। अब तक के इस सफर में आठ नरभक्षी गुलदार उनकी रायफल का निशाना बन चुके हैं।
विज्ञापन
पिता भी थे जाने माने शूटर
नवाब सैदबिन आसिफ कहते हैं कि शेरकोट रियासत में उनके पिता नवाब आसिफ विकार जिले के जाने माने शूटर रह चुके हैं। वन एवं वन्यजीवों से उनका वास्ता रहा है। वह प्रकृति प्रेमी थे। वन एवं वन्यजीव संरक्षण में उनका योगदान छिपा नहीं है। बचपन से ही रायफल और पिस्टल से निशाना लगाने कसा शौक रहा है। शूटिंग चैंपियनशिप भी अछूती नही रही। यह सब पिता से विरासत में मिला है। अब उनके बेटे बेटी भी इस विरासत को कायम रखेंगे । कार्बेट नेशनल पार्क, राजाजी राष्ट्रीय उद्यान के अलावा उत्तराखंड के वनों में आना जाना उनका खास शौक है।
विज्ञापन