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माध्यमिक विद्यालयों पर शासन सख्त
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माध्यमिक विद्यालयों पर शासन सख्त
बिजनौर। शासन माध्यमिक विद्यालयों में पढ़ाई का माहौल बनाने में लगा है। अब विद्यालयों की मॉनिटरिंग राज्य मुख्यालय से होगी। शिक्षक विद्यालय छोड़कर नहीं जा सकें, इसके लिए विद्यालयों को इलेक्ट्रानिक सूचना संसाधनों से लैस किया जा रहा है। इसके लिए विद्यालयों में राउटर लगाना अनिवार्य किया गया है। डीआईओएस राजेश कुमार के अनुसार विद्यालयों को निर्देश दे दिए गए हैं।
जिले में 387 माध्यमिक विद्यालय हैं। इनमें राजकीय 32, सहायता प्राप्त 73 और वित्तविहीन 282 है। शासन को माध्यमिक विद्यालयों में पढ़ाई नहीं होने तथा शिक्षकों के कक्षाएं छोड़कर ईधर उधर चले जाने की शिकायत मिल रही थी। कक्षाओं में छात्रों की उपस्थिति भी कम रहने और किसी भी प्रकार के सह कार्यक्रम होने की बात सामने आ रही थी। शासन ने मामले को गंभीरता से लिया है। डीआईओएस राजेश कुमार ने बताया कि अब माध्यमिक विद्यालयों की गतिविधियों की मॉनिटरिंग राज्य, मंडल व जिला स्तर पर होगी।
विद्यालयों को राउटर लगवाना अनिवार्य किया गया है। विद्यालयों में सीसीटीवी, वायस रिकार्डिंग पहले ही लगे हैं। राउटर लगने के बाद किसी भी विद्यालय की गतिविधियों को सीधा देखा जा सकेगा। शासन रेंडम चेकिंग करेगा। शिकायतों का निगरानी करके निपटारा होगा। बकौल डीआईओएस निर्देश के अनुपालन में कोताही के लिए प्रधानाचार्य जिम्मेदार होंगे। विद्यालयों में शासकीय पंचांग के अनुसार पढ़ाई नहीं होने की शिकायत आ रही हैं। नोडल अधिकारियों से विद्यालयवार रिपोर्ट मंगाई जा रही है।
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परीक्षा केंद्र बनाने पर सख्ती
डीआईओएस राजेश कुमार के अनुसार शासन बोर्ड परीक्षा केंद्र बनाने को लेकर सख्त है। शासन की प्राथमिकता नकल विहीन परीक्षा कराने की है। पिछले साल 129 बोर्ड परीक्षा केंद्र थे। इस साल केंद्र बनाने की प्रक्रिया चल रही हैं। शासन ने तय किया है कि वे ही विद्यालय बोर्ड परीक्षा केंद्र बनेंगे जिनमें तय मानकों के पूरा होने के साथ राउटर अनिवार्य रूप से लगा होगा। केंद्र की संख्या छात्रों की संख्या के अनुसार कम अधिक हो सकती है।
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बिजनौर। शासन माध्यमिक विद्यालयों में पढ़ाई का माहौल बनाने में लगा है। अब विद्यालयों की मॉनिटरिंग राज्य मुख्यालय से होगी। शिक्षक विद्यालय छोड़कर नहीं जा सकें, इसके लिए विद्यालयों को इलेक्ट्रानिक सूचना संसाधनों से लैस किया जा रहा है। इसके लिए विद्यालयों में राउटर लगाना अनिवार्य किया गया है। डीआईओएस राजेश कुमार के अनुसार विद्यालयों को निर्देश दे दिए गए हैं।
जिले में 387 माध्यमिक विद्यालय हैं। इनमें राजकीय 32, सहायता प्राप्त 73 और वित्तविहीन 282 है। शासन को माध्यमिक विद्यालयों में पढ़ाई नहीं होने तथा शिक्षकों के कक्षाएं छोड़कर ईधर उधर चले जाने की शिकायत मिल रही थी। कक्षाओं में छात्रों की उपस्थिति भी कम रहने और किसी भी प्रकार के सह कार्यक्रम होने की बात सामने आ रही थी। शासन ने मामले को गंभीरता से लिया है। डीआईओएस राजेश कुमार ने बताया कि अब माध्यमिक विद्यालयों की गतिविधियों की मॉनिटरिंग राज्य, मंडल व जिला स्तर पर होगी।
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विद्यालयों को राउटर लगवाना अनिवार्य किया गया है। विद्यालयों में सीसीटीवी, वायस रिकार्डिंग पहले ही लगे हैं। राउटर लगने के बाद किसी भी विद्यालय की गतिविधियों को सीधा देखा जा सकेगा। शासन रेंडम चेकिंग करेगा। शिकायतों का निगरानी करके निपटारा होगा। बकौल डीआईओएस निर्देश के अनुपालन में कोताही के लिए प्रधानाचार्य जिम्मेदार होंगे। विद्यालयों में शासकीय पंचांग के अनुसार पढ़ाई नहीं होने की शिकायत आ रही हैं। नोडल अधिकारियों से विद्यालयवार रिपोर्ट मंगाई जा रही है।
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परीक्षा केंद्र बनाने पर सख्ती
डीआईओएस राजेश कुमार के अनुसार शासन बोर्ड परीक्षा केंद्र बनाने को लेकर सख्त है। शासन की प्राथमिकता नकल विहीन परीक्षा कराने की है। पिछले साल 129 बोर्ड परीक्षा केंद्र थे। इस साल केंद्र बनाने की प्रक्रिया चल रही हैं। शासन ने तय किया है कि वे ही विद्यालय बोर्ड परीक्षा केंद्र बनेंगे जिनमें तय मानकों के पूरा होने के साथ राउटर अनिवार्य रूप से लगा होगा। केंद्र की संख्या छात्रों की संख्या के अनुसार कम अधिक हो सकती है।