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Bijnor News: गुलदार का गढ़ बन गया जिला बिजनौर
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बढ़ापुर क्षेत्र के गांव रसूलपुर मुजफ्फर उर्फ मुजफ्फरनगर में पकड़ा गया गुलदार।
-बढ़ापुर में दस दिन में पकड़े गए पांच गुलदार
रजनीश त्यागी
बिजनौर। ऐतिहासिक और पौराणिक स्थलों और महापुरुषों की स्थली कहे जाने वाला बिजनौर अब गुलदार के नाम से भी जाना जा रहा है। यह कहना गलत न होगा कि जिला बिजनौर अब गुलदार का गढ़ बन चुका है। आंकड़े इसकी गवाही दे रहे हैं। इस साल 18 लोगों की मौत गुलदार के हमलों में हो गई। वहीं अब तक 37 छोटे-बड़े गुलदार पकड़े जा चुके हैं, वहीं 06 गुलदारों की मौत दुर्घटनाओं में हो चुकी है। इस साल कुल 43 गुलदार मिले हैं। वहीं बढ़ापुर क्षेत्र के गांव रसूलपुर में एक आठ माह का गुलदार पिंजरे में फंस गया। इस क्षेत्र में पिछले दस दिनों में पकड़े जाने वाला यह पांचवां गुलदार है।
वन विभाग दे रहा मुखौटा लगाने की सलाह
वन विभाग ने ग्रामीणों को सुंदरवन की तर्ज पर मुखौटा लगाने की सलाह दी है। वन विशेषज्ञों की मानना है कि गुलदार अक्सर पीछे से हमला करता है। मुखौटा लगाने से वह भ्रमित हो जाता है। यह प्रयोग सुंदरवन में नरभक्षी बाघों से बचने के लिए हुआ और काफी हद तक सफल भी हुआ है। अब इसे बिजनौर में भी इसे अपनाया जाएगा। जल्द ही संवेदनशील 73 गांवों में मास्क का वितरण किया जाएगा।
हाथ खड़े कर रहे चिड़ियाघर, परेशान वन विभाग
इस साल की शुरुआत में वन विभाग ने पकड़े गए गुलदारों को अमानगढ़ रेंज में छोड़ा था। इसके बाद हमले बढ़े तो यहां पर गुलदार छोड़ने पर रोक लगा दी गई। इसके बाद करीब 20 छोटे-बड़े गुलदार गोरखपुर, कानपुर, लखनऊ चिड़ियाघर, इटावा लायन सफारी भेजे गए। अब वहां की क्षमता अकेले बिजनौर के गुलदारों ने पूरी कर दी। ऐसे में अब उन्होंने भी गुलदार लेने से हाथ खड़े कर दिए। पांच दिन पहले जो गुलदार पकड़ा गया था, उसे भी शिवालिक के जंगल सहारनपुर जिले में छोड़ा गया था।
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जंगल में बाघ था, गन्ने के खेत में गुलदार की राजा
रिजर्व फॉरेस्ट में गुलदार को बाघ से खतरा रहता था, लेकिन गन्ने के खेत में गुलदार सबसे हिंसक जानवर हो गया। अब वह गन्ने के खेतों का राजा बन गया है। जिले में तीन लाख हेक्टेयर से ज्यादा में गन्ना है। ऐसे में गुलदार को यहां सुरक्षा से लेकर आसान शिकार सबकुछ मिल रहा है। इनकी संख्या बढ़ने के पीछे इसे भी मुख्य कारण माना जा रहा है।
आंकड़ों में गुलदार
-03 गुलदार वर्ष 2021 में पकड़े गए
-07 गुलदार वर्ष 2022 में पकड़े गए
-43 गुलदार वर्ष 2023 में कुल मिले
- 18 लोगों की जान इस साल गुलदार के हमलों में गई
- 50 से ज्यादा लोग इस साल गुलदार के हमलों में घायल हुए
- 06 गुलदार की दुर्घटना या अन्य कारण से मौत हुई
-400 से ज्यादा गुलदार गन्ने के खेतों में होने की संभावना
जागरुकता ही उपाय : ज्ञान सिंह
जहां भी गुलदार दिखने या हमले के बारे में पता चलता है, वहां पिंजरे लगवाए जा रहे हैं। तमाम विभागों के साथ मिलकर ग्रामीणों को गुलदार से बचने के बारे में जागरुक किया जा रहा है। जागरुकता ही एक उपाय है, जिससे यह संघर्ष रुक सकता है।
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रजनीश त्यागी
बिजनौर। ऐतिहासिक और पौराणिक स्थलों और महापुरुषों की स्थली कहे जाने वाला बिजनौर अब गुलदार के नाम से भी जाना जा रहा है। यह कहना गलत न होगा कि जिला बिजनौर अब गुलदार का गढ़ बन चुका है। आंकड़े इसकी गवाही दे रहे हैं। इस साल 18 लोगों की मौत गुलदार के हमलों में हो गई। वहीं अब तक 37 छोटे-बड़े गुलदार पकड़े जा चुके हैं, वहीं 06 गुलदारों की मौत दुर्घटनाओं में हो चुकी है। इस साल कुल 43 गुलदार मिले हैं। वहीं बढ़ापुर क्षेत्र के गांव रसूलपुर में एक आठ माह का गुलदार पिंजरे में फंस गया। इस क्षेत्र में पिछले दस दिनों में पकड़े जाने वाला यह पांचवां गुलदार है।
वन विभाग दे रहा मुखौटा लगाने की सलाह
वन विभाग ने ग्रामीणों को सुंदरवन की तर्ज पर मुखौटा लगाने की सलाह दी है। वन विशेषज्ञों की मानना है कि गुलदार अक्सर पीछे से हमला करता है। मुखौटा लगाने से वह भ्रमित हो जाता है। यह प्रयोग सुंदरवन में नरभक्षी बाघों से बचने के लिए हुआ और काफी हद तक सफल भी हुआ है। अब इसे बिजनौर में भी इसे अपनाया जाएगा। जल्द ही संवेदनशील 73 गांवों में मास्क का वितरण किया जाएगा।
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हाथ खड़े कर रहे चिड़ियाघर, परेशान वन विभाग
इस साल की शुरुआत में वन विभाग ने पकड़े गए गुलदारों को अमानगढ़ रेंज में छोड़ा था। इसके बाद हमले बढ़े तो यहां पर गुलदार छोड़ने पर रोक लगा दी गई। इसके बाद करीब 20 छोटे-बड़े गुलदार गोरखपुर, कानपुर, लखनऊ चिड़ियाघर, इटावा लायन सफारी भेजे गए। अब वहां की क्षमता अकेले बिजनौर के गुलदारों ने पूरी कर दी। ऐसे में अब उन्होंने भी गुलदार लेने से हाथ खड़े कर दिए। पांच दिन पहले जो गुलदार पकड़ा गया था, उसे भी शिवालिक के जंगल सहारनपुर जिले में छोड़ा गया था।
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जंगल में बाघ था, गन्ने के खेत में गुलदार की राजा
रिजर्व फॉरेस्ट में गुलदार को बाघ से खतरा रहता था, लेकिन गन्ने के खेत में गुलदार सबसे हिंसक जानवर हो गया। अब वह गन्ने के खेतों का राजा बन गया है। जिले में तीन लाख हेक्टेयर से ज्यादा में गन्ना है। ऐसे में गुलदार को यहां सुरक्षा से लेकर आसान शिकार सबकुछ मिल रहा है। इनकी संख्या बढ़ने के पीछे इसे भी मुख्य कारण माना जा रहा है।
आंकड़ों में गुलदार
-03 गुलदार वर्ष 2021 में पकड़े गए
-07 गुलदार वर्ष 2022 में पकड़े गए
-43 गुलदार वर्ष 2023 में कुल मिले
- 18 लोगों की जान इस साल गुलदार के हमलों में गई
- 50 से ज्यादा लोग इस साल गुलदार के हमलों में घायल हुए
- 06 गुलदार की दुर्घटना या अन्य कारण से मौत हुई
-400 से ज्यादा गुलदार गन्ने के खेतों में होने की संभावना
जागरुकता ही उपाय : ज्ञान सिंह
जहां भी गुलदार दिखने या हमले के बारे में पता चलता है, वहां पिंजरे लगवाए जा रहे हैं। तमाम विभागों के साथ मिलकर ग्रामीणों को गुलदार से बचने के बारे में जागरुक किया जा रहा है। जागरुकता ही एक उपाय है, जिससे यह संघर्ष रुक सकता है।