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बासमती धान में दाना नहीं पड़ने की जांच पूरी
ब्यूरो/अमर उजाला, बिजनौर
Updated Thu, 10 Nov 2016 12:35 AM IST
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बिजनौर में बासमती धान की पैदावार जांच में औसतन पांच क्विंटल प्रति हेक्टेयर निकली है। जांच टीम ने इसकी वजह तापमान अधिक होने से बीमारी का प्रकोप होना माना है। जांच रिपोर्ट मुआवजे पर निर्णय के लिए शासन को भेजी जाएगी।
भाकियू ने बासमती धान की प्रजाति पीबी 06 में दाना नहीं पड़ने को लेकर जिला कृषि अधिकारी कार्यालय में तालाबंदी करके धरना दिया था। सीडीओ डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी द्वारा हस्तक्षेप करने के बाद जांच टीम बनाई गई। उपनिदेशक कृषि जसपाल के अनुसार उन्होेने स्वयं हल्दौर ब्लाक में क्राप कटिंग कराई। खेत में पांच क्विंटल प्रति हेक्टेयर धान निकला। जिला कृषि अधिकारी प्रमोद सिरोही ने कोतवाली ब्लाक में क्राप कटिंग कराई। वहां 15 क्विंटल प्रति हेक्टेअर धान निकला है। जलीलपुर ब्लाक में एआर सहकारिता एके सिंह ने क्राप कटिंग कराई। वहां साढ़े पांच क्विंटल प्रति हेक्टेयर धान निकला है। किरतपुर ब्लाक में कृषि रक्षा अधिकारी अमरपाल तथा नजीबाबाद ब्लाक में जिला पशुधन अधिकारी जांच के लिए गए। परंतु वहां किसान धान काट चुके थे।
उपनिदेशक के मुताबिक किसानों ने जांच टीम को सबसे खराब प्लाट दिखाए हैं। इनमें ब्राउन हॉपर तथा शीतब्लास्ट बीमारी का प्रकोप था। यह बीमारी तापमान अधिक होने पर लगती है। धान की सुगंधित प्रजाति में इस बीमारी का ज्यादा प्रकोप होता है। धान में बाल आई परंतु दाने नहीं पड़े। जांच में बीज की गुणावत्ता में कोई कमी सामने नहीं आई है। जिले के कुछ इलाकों में 25 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक धान निकला है।
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भाकियू ने बासमती धान की प्रजाति पीबी 06 में दाना नहीं पड़ने को लेकर जिला कृषि अधिकारी कार्यालय में तालाबंदी करके धरना दिया था। सीडीओ डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी द्वारा हस्तक्षेप करने के बाद जांच टीम बनाई गई। उपनिदेशक कृषि जसपाल के अनुसार उन्होेने स्वयं हल्दौर ब्लाक में क्राप कटिंग कराई। खेत में पांच क्विंटल प्रति हेक्टेयर धान निकला। जिला कृषि अधिकारी प्रमोद सिरोही ने कोतवाली ब्लाक में क्राप कटिंग कराई। वहां 15 क्विंटल प्रति हेक्टेअर धान निकला है। जलीलपुर ब्लाक में एआर सहकारिता एके सिंह ने क्राप कटिंग कराई। वहां साढ़े पांच क्विंटल प्रति हेक्टेयर धान निकला है। किरतपुर ब्लाक में कृषि रक्षा अधिकारी अमरपाल तथा नजीबाबाद ब्लाक में जिला पशुधन अधिकारी जांच के लिए गए। परंतु वहां किसान धान काट चुके थे।
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उपनिदेशक के मुताबिक किसानों ने जांच टीम को सबसे खराब प्लाट दिखाए हैं। इनमें ब्राउन हॉपर तथा शीतब्लास्ट बीमारी का प्रकोप था। यह बीमारी तापमान अधिक होने पर लगती है। धान की सुगंधित प्रजाति में इस बीमारी का ज्यादा प्रकोप होता है। धान में बाल आई परंतु दाने नहीं पड़े। जांच में बीज की गुणावत्ता में कोई कमी सामने नहीं आई है। जिले के कुछ इलाकों में 25 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक धान निकला है।
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