बस फिजा में बिखर गया राहत..
नजीबाबाद। बज्म-ए-जिगर की ओर से शेरी नशिस्त में शायरों ने राहत इंदौरी को अपने कलाम के माध्यम से खिराज-ए-अकीदत पेश की।
बज्म-ए-जिगर की ओर से मोहल्ला नवाबपुरा में राहत इंदौरी की याद में शेरी नशिस्त आयोजित की गई। डॉ.तय्यब जमाल ने तिलावत-ए-कलाम पाक से नशिस्त की शुरूआत की। शायर मौसूफ वासिफ का कलाम काम ऐसा वो कर गया राहत, बस फिजा में बिखर गया राहत.., अकरम जलालाबादी ने अपना कलाम पेश करते हुए फरमाया हमको उर्दू का सबक याद कराने वाला, हर घड़ी याद आएगा बहुत जाने वाला.., शकील अहमद वफा का कलाम हमारी आंख से पोशीदा हो गए राहत, हमारे आईना-ए-दिल में उनकी सूरत है.., डॉ.तय्यब जमाल का कलाम जो कुछ भी मेरे पास था सब कुछ लुटा गया.. काफी पसंद किया गया। शेरी नशिस्त में मौसूफ वासिफ, शादाब जफर शादाब, अबरार सलमानी, डॉ.रईस भारती, अदीब शादाब, अफशान सलमानी, असद मंसूब ने भी कलाम पेश किए।