फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bijnor News ›   Babu Kishan Singh became active at the age of 20

Bijnor News: धामपुर - 20 साल की उम्र में सक्रिय हो गए थे बाबू किशन सिंह

Mon, 14 Aug 2023 12:44 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर Updated Mon, 14 Aug 2023 12:44 AM IST
विज्ञापन
Babu Kishan Singh became active at the age of 20
स्वतंत्रता संग्राम सैनानी स्व.. बाबू किशन सिंह। फाइल फोटो
- कई बार जेल गए और देश की स्वतंत्रता के लिए यातनाएं झेलीं
विज्ञापन

फोटो समाचार



सतीश शर्मा

धामपुर। उदयपुर निवासी स्व. स्वतंत्रता संग्राम सेनानी बाबू किशन सिंह के आंदोलन को कभी नहीं भुलाया जा सकता। बाबू किशन सिंह 20 साल की आयु में महात्मा गांधी के आंदोलन में देश को आजादी दिलाने में सक्रिय हो गए थे। वह कई बार जेल गए और देश की स्वतंत्रता के लिए यातनाएं झेलीं।
19वीं शताब्दी के तीसरे दशक में महात्मा गांधी के नेतृत्व में स्वतंत्रता आंदोलन परवान चढ़ चुका था। शहर हो या गांव हर क्षेत्र से महिला और पुरुषों की टोलियां घर बार छोड़ गांधी जी के पीछे चल पड़ी थीं। उस दौर में सड़कों, यातायात की सुविधाएं न के बराबर होती थीं। उस दौर में जिले के अफजलगढ़ क्षेत्र के गांव उदयपुर निवासी बाबू किशन सिंह भी आंदोलन में सक्रिय हो गए थे। उस जमाने में गांव उदयपुर को काला पानी के रूप में जाना जाता था। क्योंकि यह गांव रामगंगा, खो, बनेली आदि नदियों को पार करके धामपुर तहसील क्षेत्र का सुदूर गांव है। इसी गांव के लाल सिंह के सुपुत्र बाबू किशन सिंह 20 वर्ष की उम्र में ही गांधी जी के आंदोलनों से जुड़ गए।
विज्ञापन

हाईस्कूल की शिक्षा पूर्ण कर बाबूजी अपने परिवार के अन्य सदस्यों के साथ आंदोलन में पूरी तरह भाग लेने लगे थे। बाबू किशन सिंह को सन 1932 में सत्याग्रह करने के आरोप में मुरादाबाद जिला मजिस्ट्रेट ने छह महीने का कठोर कारावास, 30 रुपये अर्थदंड की सजा दी थी। जेल से रिहाई पर 1940 के बाद किशन सिंह ने गन्ना विभाग में सुपरवाइजर के पद पर नौकरी शुरू की। वह जीवन पर्यंत गन्ना विभाग में एक ईमानदार अधिकारी के रूप में जाने जाते रहे। बाबूजी का जन्म वर्ष 1909 में ग्राम उदयपुर में ही हुआ था। देहावसान साल 1996 में धामपुर में हुआ। इनके पांच पुत्रों में से साहित्यकार सत्यराज सबसे छोटे हैं। आजकल रानी बाग कॉलोनी धामपुर में अपने परिवार के साथ रहते हैं। सत्यराज ने बताया कि उनके परिवार के आठ सदस्यों ने एक साथ आजादी की लड़ाई में प्रतिभाग किया था। (संवाद)
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed