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कन्या भ्रूण हत्या रोकने को जागरूकता जरूरी : डीएम
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बिजनौर में अपने कार्यालय में पीसीपीएनडीटी से संबंधित समिति की बैठक लेते डीएम रमाकांत पांडेय।
- फोटो : BIJNOR
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कन्या भ्रूण हत्या रोकने को जागरूकता जरूरी : डीएम
बिजनौर। जिलाधिकारी रमाकांत पांडेय ने कहा कि कन्या भ्रूण हत्या को रोकने के लिए समाज में जागरूकता जरूरी है। उन्होंने पीसीपीएनडीटी के नोडल अधिकारी को सप्ताह में कम से कम तीन अल्ट्रासाउंड सेंटरों का निरीक्षण करने के निर्देश दिए और पूरी छानबीन करने के बाद ही अल्ट्रासाउंड सेंटर चलाने के लिए अनुमति प्रदान करने को कहा। उन्होंने कहा कि कन्या भ्रूण की हत्या एक जघन्य अपराध तो है ही, मानवता और प्रकृति के प्रति भी अत्यन्त निदंनीय है। इससे प्राकृतिक लिंगानुपात में असंतुलन पैदा होता है, तो वहीं मानवीय मूल्यों का भी ह्रास होता है।
कलक्ट्रेट सभागार में पीसीपीएनडीटी समिति की बैठक में डीएम रमाकांत पांडेय ने कहा कि लिंगानुपात को बराबरी पर लाने के लिए लोगों को जागरुक करना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि हमारे देश और जिले में लिंगानुपात में भारी कमी का होना गंभीर एवं चिंताजनक समस्या है। उन्होंने कहा कि इस समस्या का समाधान केवल बैठकों से ही संभव नहीं है, बल्कि जन सामान्य को लिंग अनुपात के संकट के प्रति जागरूक करना सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने निर्देश दिए कि जिले में अल्ट्रासाउंड सेंटर्स और नवीनीकरण के मामलों में पूरी छानबीन करने के बाद ही अनुमति प्रदान की जाए और हर सेंटर पर कन्या भ्रूण हत्या से संबंधित कानूनी जानकारी पर आधारित स्पष्ट शब्दों में बोर्ड अथवा दीवार पर आईसी मेटीरियल लिखवाना और अल्ट्रासाउंड कक्ष में सीसीटीवी केमरों की स्थापना को अनिवार्य किया जाए। ऐसा नहीं करने वाले संचालकों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। इस दौरान जिलाधिकारी ने सर्वसम्मति से नवीनीकरण, नई अल्ट्रासाउंड मशीन खरीदने के पश्चात फार्म-बी निर्गत करने तथा स्थान परिवर्तन के तीन-तीन मामलों की स्वीकृति प्रदान की गई तथा दो मामलों में पुरानी अल्ट्रासाउंड मशीन बेचने की अनुमति भी दी गई।
इस अवसर पर पीसीपीएनडीटी नोडल अधिकारी डा. एस.के. निगम, जिला महिला अस्पताल की सीएमएस डा. आभा वर्मा, सदस्य डीजीसी मुकेश त्यागी, डा. बी.आर. सैन सहित समिति के अन्य सदस्य मौजूद थे।
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बिजनौर। जिलाधिकारी रमाकांत पांडेय ने कहा कि कन्या भ्रूण हत्या को रोकने के लिए समाज में जागरूकता जरूरी है। उन्होंने पीसीपीएनडीटी के नोडल अधिकारी को सप्ताह में कम से कम तीन अल्ट्रासाउंड सेंटरों का निरीक्षण करने के निर्देश दिए और पूरी छानबीन करने के बाद ही अल्ट्रासाउंड सेंटर चलाने के लिए अनुमति प्रदान करने को कहा। उन्होंने कहा कि कन्या भ्रूण की हत्या एक जघन्य अपराध तो है ही, मानवता और प्रकृति के प्रति भी अत्यन्त निदंनीय है। इससे प्राकृतिक लिंगानुपात में असंतुलन पैदा होता है, तो वहीं मानवीय मूल्यों का भी ह्रास होता है।
कलक्ट्रेट सभागार में पीसीपीएनडीटी समिति की बैठक में डीएम रमाकांत पांडेय ने कहा कि लिंगानुपात को बराबरी पर लाने के लिए लोगों को जागरुक करना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि हमारे देश और जिले में लिंगानुपात में भारी कमी का होना गंभीर एवं चिंताजनक समस्या है। उन्होंने कहा कि इस समस्या का समाधान केवल बैठकों से ही संभव नहीं है, बल्कि जन सामान्य को लिंग अनुपात के संकट के प्रति जागरूक करना सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने निर्देश दिए कि जिले में अल्ट्रासाउंड सेंटर्स और नवीनीकरण के मामलों में पूरी छानबीन करने के बाद ही अनुमति प्रदान की जाए और हर सेंटर पर कन्या भ्रूण हत्या से संबंधित कानूनी जानकारी पर आधारित स्पष्ट शब्दों में बोर्ड अथवा दीवार पर आईसी मेटीरियल लिखवाना और अल्ट्रासाउंड कक्ष में सीसीटीवी केमरों की स्थापना को अनिवार्य किया जाए। ऐसा नहीं करने वाले संचालकों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। इस दौरान जिलाधिकारी ने सर्वसम्मति से नवीनीकरण, नई अल्ट्रासाउंड मशीन खरीदने के पश्चात फार्म-बी निर्गत करने तथा स्थान परिवर्तन के तीन-तीन मामलों की स्वीकृति प्रदान की गई तथा दो मामलों में पुरानी अल्ट्रासाउंड मशीन बेचने की अनुमति भी दी गई।
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इस अवसर पर पीसीपीएनडीटी नोडल अधिकारी डा. एस.के. निगम, जिला महिला अस्पताल की सीएमएस डा. आभा वर्मा, सदस्य डीजीसी मुकेश त्यागी, डा. बी.आर. सैन सहित समिति के अन्य सदस्य मौजूद थे।
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