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अधिकारियों को संवेदनशील बनने की नसीहत
ब्यूरो/अमर उजाला, बिजनौर
Updated Wed, 20 Dec 2017 11:56 PM IST
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हेल्पलाइन की कार्यशाला को संबोधित करते मंडलायुक्त राजेश कुमार।
- फोटो : अमर उजाला
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बिजनौर में कमिश्नर ने शासन की महत्वाकांक्षी योजना आईजीआरएस सिस्टम अर्थात इंटिग्रेटिड ग्रीवैंस रिड्रैसल सिस्टम की दो दिवसीय कार्यशाला का विकास भवन में शुभारंभ किया।
इस सिस्टम के द्वारा जमीनी शिकायत सीधे सीएम तक पहुंच सकेंगी। सिस्टम में रूट लेवल के अधिकारी को शिकायतों के निपटारे के लिए जिम्मेदार बनाया गया है। कमिश्नर ने अधिकारियों को आगाह करते हुए शिकायतों के निपटारे में संवेदनशील बनने की हिदायत दी । ऐसा नहीं होने पर अधिकारियों को नौकरी में बने रहने का कोई अधिकार नहीं है। शिकायतों का ज्यादा रहना सरकारी मशीनरी की विफलता है।
कमिश्नर राजेश कुमार ने कहा कि आईजीआरएस सिस्टम सीएम की महत्वाकांक्षी योजना है। शासन की मंशा है कि शिकायतों का निपटारा निचले स्तर पर हो। चकरोड जैसी छोटी मोटी शिकायत कमिश्नर तक पहुंचना प्रशासन के लिए शर्म की बात है। शिकायतों का निस्तारण गुणवत्ता व संतुष्टि पूर्वक हो। व्यक्ति के अधिकारों का हनन होने व प्रशासन के अपेक्षा पर खरा नही उतरने से शिकायतों का अंबार लगता है। इन प्वाइंट को लेकर अधिकारी संवेदनशील नही हैं। अधिकारी इस बात का ध्यान रखें कि शिकायतों का सीएम पोर्टल पर ज्यादा संख्या में जाना उचित नही है। वे इस बात पर निगाह रख रहा हैं कि तहसील दिवस व थाना दिवस ठीक से काम करें। इसके लिए अलग से योजना बना रहा है। यदि अधिकारी ठीक से काम नहीं करते हैं तो उन्हें नौकरी में बने रहने का अधिकार नहीं है। डीएम जगतराज ने अधिकारियों को शिकायतों के निपटारे के लिए हर समय तैयार रहने को कहा।
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पुलिस को नसीहत दे गए कमिश्नर
बिजनौर। कमिश्नर बातों बातों में पुलिस को संवेदनशील बनकर दायित्वों का निर्वाह करने की नसीहत दे गए। पहले लाल टोपी वाला एक गश्ती सिपाही बलवा व डकैती जैसे मामलों को कंट्रोल कर लेता था। कमिश्नर ने कहा कि यहां बहुत सारे वर्दी वाले बैठे हैं। उन्होंने सवालिया अंदाज में कहा कि क्या कारण है कि आज आपराधिक मामलों के निपटारे के लिए बड़ी बड़ी पुलिस गारद लगाई जाती है।
लेखपालों पर साधा निशाना
बिजनौर। कमिश्र राजेश कुमार ने अपने संबोधन में लेखपालों पर भी जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पहले लेखपाल अपने हल्के के बारे में सब कुछ जानता था। गांव में बैठकर ही राजस्व समस्याओं को सुलझा देता था। आज लेखपाल गांवों में नहीं जाते। फरियादी शिकायत लेकर दफ्तरों में धक्के खाता फिरता है। फिर भी उसके हाथ निराशा लगती है। लेवल वन अर्थात निचले स्तर के अधिकारी काम ठीक से नही कर रहे हैं।
कमिश्नर लेंगे लेखपाल की बैठक
बिजनौर। कमिश्नर ने कहा कि सबसे अधिक शिकायत राजस्व से जुड़ी होती हैं। इसके लिए लेखपाल को संवेदनशील बनना जरूरी है। वह जिलों में जाकर स्वयं लेखपाल की मीटिंग करेंगे। उन्हें सीएम की मंशा से अवगत कराएंगे। कमिश्नर ने कहा कि सीएम का स्पष्ट मत है कि निचले स्तर के अधिकारी शिकायतों के निपटारे में सक्रिय व संवेदनशील नही है।
टोल फ्री नंबर 1076 पर शिकायत करें डायल
बिजनौर। आईजीआरएस सिस्टम में कोई भी व्यक्ति अपनी शिकायत को टोल फ्री नंबर 1076 पर डायल करके पंजीकृत करा सकता है। वहां से शिकायत स्वयं संबंधित विभाग में पहुंच जाएगी। सुबह सात से रात 11 बजे तक शिकायत सातों दिन दर्ज होंगी। शिकायत दर्ज होने पर सीधे लेवल वन अधिकारी जैसे लेखपाल, एसओ के पास पहुंच जाएगी।
रही अव्यवस्था
बिजनौर। कार्यशाला के पहले दिन अव्यवस्था रही। विकास भवन के सभागार की संख्या से ज्यादा अधिकारी कार्यशाला में बुला लिए गए। अधिकारी गेट के बाहर बरामदे में खड़े रहे। उन्हें अंदर का कुछ सुनाई नहीं दे रहा था। अधिकारी आखिर तक एक दूसरे से यह पूछते रहे कि कमिश्नर साहब क्या कह गए है? बहुत से अधिकारी तो कमिश्नर के जाने के बाद आए। जब उन्हें पता चला कि कमिश्नर चले गए तो वे भी आते ही खिसक लिए। कमिश्नर के जाने के बाद अफरा तफरी का माहौल हो गया। इससे पहले कमिश्नर ने स्टेडियम में जाकर खिलाड़ियों से बात की।
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इस सिस्टम के द्वारा जमीनी शिकायत सीधे सीएम तक पहुंच सकेंगी। सिस्टम में रूट लेवल के अधिकारी को शिकायतों के निपटारे के लिए जिम्मेदार बनाया गया है। कमिश्नर ने अधिकारियों को आगाह करते हुए शिकायतों के निपटारे में संवेदनशील बनने की हिदायत दी । ऐसा नहीं होने पर अधिकारियों को नौकरी में बने रहने का कोई अधिकार नहीं है। शिकायतों का ज्यादा रहना सरकारी मशीनरी की विफलता है।
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कमिश्नर राजेश कुमार ने कहा कि आईजीआरएस सिस्टम सीएम की महत्वाकांक्षी योजना है। शासन की मंशा है कि शिकायतों का निपटारा निचले स्तर पर हो। चकरोड जैसी छोटी मोटी शिकायत कमिश्नर तक पहुंचना प्रशासन के लिए शर्म की बात है। शिकायतों का निस्तारण गुणवत्ता व संतुष्टि पूर्वक हो। व्यक्ति के अधिकारों का हनन होने व प्रशासन के अपेक्षा पर खरा नही उतरने से शिकायतों का अंबार लगता है। इन प्वाइंट को लेकर अधिकारी संवेदनशील नही हैं। अधिकारी इस बात का ध्यान रखें कि शिकायतों का सीएम पोर्टल पर ज्यादा संख्या में जाना उचित नही है। वे इस बात पर निगाह रख रहा हैं कि तहसील दिवस व थाना दिवस ठीक से काम करें। इसके लिए अलग से योजना बना रहा है। यदि अधिकारी ठीक से काम नहीं करते हैं तो उन्हें नौकरी में बने रहने का अधिकार नहीं है। डीएम जगतराज ने अधिकारियों को शिकायतों के निपटारे के लिए हर समय तैयार रहने को कहा।
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पुलिस को नसीहत दे गए कमिश्नर
बिजनौर। कमिश्नर बातों बातों में पुलिस को संवेदनशील बनकर दायित्वों का निर्वाह करने की नसीहत दे गए। पहले लाल टोपी वाला एक गश्ती सिपाही बलवा व डकैती जैसे मामलों को कंट्रोल कर लेता था। कमिश्नर ने कहा कि यहां बहुत सारे वर्दी वाले बैठे हैं। उन्होंने सवालिया अंदाज में कहा कि क्या कारण है कि आज आपराधिक मामलों के निपटारे के लिए बड़ी बड़ी पुलिस गारद लगाई जाती है।
लेखपालों पर साधा निशाना
बिजनौर। कमिश्र राजेश कुमार ने अपने संबोधन में लेखपालों पर भी जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पहले लेखपाल अपने हल्के के बारे में सब कुछ जानता था। गांव में बैठकर ही राजस्व समस्याओं को सुलझा देता था। आज लेखपाल गांवों में नहीं जाते। फरियादी शिकायत लेकर दफ्तरों में धक्के खाता फिरता है। फिर भी उसके हाथ निराशा लगती है। लेवल वन अर्थात निचले स्तर के अधिकारी काम ठीक से नही कर रहे हैं।
कमिश्नर लेंगे लेखपाल की बैठक
बिजनौर। कमिश्नर ने कहा कि सबसे अधिक शिकायत राजस्व से जुड़ी होती हैं। इसके लिए लेखपाल को संवेदनशील बनना जरूरी है। वह जिलों में जाकर स्वयं लेखपाल की मीटिंग करेंगे। उन्हें सीएम की मंशा से अवगत कराएंगे। कमिश्नर ने कहा कि सीएम का स्पष्ट मत है कि निचले स्तर के अधिकारी शिकायतों के निपटारे में सक्रिय व संवेदनशील नही है।
टोल फ्री नंबर 1076 पर शिकायत करें डायल
बिजनौर। आईजीआरएस सिस्टम में कोई भी व्यक्ति अपनी शिकायत को टोल फ्री नंबर 1076 पर डायल करके पंजीकृत करा सकता है। वहां से शिकायत स्वयं संबंधित विभाग में पहुंच जाएगी। सुबह सात से रात 11 बजे तक शिकायत सातों दिन दर्ज होंगी। शिकायत दर्ज होने पर सीधे लेवल वन अधिकारी जैसे लेखपाल, एसओ के पास पहुंच जाएगी।
रही अव्यवस्था
बिजनौर। कार्यशाला के पहले दिन अव्यवस्था रही। विकास भवन के सभागार की संख्या से ज्यादा अधिकारी कार्यशाला में बुला लिए गए। अधिकारी गेट के बाहर बरामदे में खड़े रहे। उन्हें अंदर का कुछ सुनाई नहीं दे रहा था। अधिकारी आखिर तक एक दूसरे से यह पूछते रहे कि कमिश्नर साहब क्या कह गए है? बहुत से अधिकारी तो कमिश्नर के जाने के बाद आए। जब उन्हें पता चला कि कमिश्नर चले गए तो वे भी आते ही खिसक लिए। कमिश्नर के जाने के बाद अफरा तफरी का माहौल हो गया। इससे पहले कमिश्नर ने स्टेडियम में जाकर खिलाड़ियों से बात की।