{"_id":"5fb40e348ebc3e1a231f11e3","slug":"asthma-patients-increased-twice-due-to-weather-changes-bijnor-news-mrt511350950","type":"story","status":"publish","title_hn":"मौसम परिवर्तन से दोगुना बढ़े अस्थमा के मरीज दोगुना","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मौसम परिवर्तन से दोगुना बढ़े अस्थमा के मरीज दोगुना
विज्ञापन
बिजनौर जिला अस्पताल में मरीजों की भीड़।
- फोटो : BIJNOR
मौसम परिवर्तन से दोगुना बढ़े अस्थमा के मरीज
बिजनौर। मौसम परिवर्तन के कारण अस्पतालों में अस्थमा और सांस के मरीज बढ़ रहे हैं। जिला अस्पताल की ओपीडी में पिछले सप्ताह सांस के दस से 20 मरीज प्रतिदिन आ रहे थे, वहीं अब इनकी संख्या 30 से 40 तक पहुंच गई है।
दिन के मौसम में गरमाहट और सुबह तथा शाम के समय बढ़ रही ठंड ने अस्थमा के रोगियों की परेशानी बढ़ा दी है। ऐसे में सांस लेने में दिक्कत, गले में खराश हो रही है। अस्थमा-सांस रोगियों का मर्ज बिगड़ रहा है। रोजाना अस्थमा अटैक के तीन से पांच मरीजों को इमरजेंसी में भर्ती करना पड़ रहा है। जिला अस्पताल के चेस्ट फिजीशियन डा. हरिओम गुप्ता ने बताया कि पिछले लगभग एक सप्ताह से लगातार हो रहे मौसम में परिवर्तन से पुराने मरीजों में मर्ज बिगड़ा हुआ मिला। इनकी डोज बढ़ाई गई और जरूरत पड़ने पर इन्हें भर्ती भी करना पड़ रहा है। इसके अतिरिक्त सर्दी वाले स्वस्थ लोगों में सीने में जकड़न, छींक, खराश की परेशानी देखने को मिल रही है।
जुकाम-खांसी के मामले बढ़े
सूफिया मेमोरियल हॉस्पिटल की चेस्ट फिजीशियन डा. तजीन आरिफ बताती हैं कि धूल और धुआं लोगों में एलर्जी पैदा कर रहे हैं, इससे जुकाम-खांसी और गले में खराश के मरीज दोगुने हो गए हैं। वर्तमान में स्थिति ये है कि हर घर में एक मरीज है। आजकल ओपीडी फुल चल रही है। टेलीमेडिसिन में भी रोजाना 20 से अधिक नए मरीज फोन पर परामर्श ले रहे हैं।
विज्ञापन
रोज कर रहे पांच से सात मरीज भर्ती
पंडित चंद्रकांत आत्रेय मेमोरियल हॉस्पिटल के क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ डा. अवधेश वशिष्ठ के अनुसार मौसम बदलने से सांस के मरीजों की समस्या बढ़ जाती है। धूम्रपान की वजह से जिन मरीजों के फेफड़े कमजोर पड़ जाते हैं, ऐसे में इन रोगियों की समस्या बढ़ जाती है। यदि खांसी के साथ पीला बलगम आए तो तुरंत ही अपने चिकित्सक को अवश्य दिखाएं। हवा में नमी होने पर वाहनों का धुआं, धूल और हवा में खतरनाक गैस आसमान पर अधिक ऊंचाई पर नहीं जा पाती, बेहद नीचे इनकी एक परत बन जाती है, जिसके संपर्क में रहने से सांस के जरिये धूल-धुआं फेफड़ों में पहुंचते हैं। इससे सांस के रोगियों को काफी दिक्कत होती है। रोजाना तीन से पांच मरीज भर्ती कर रहे हैं। टीबी मरीजों का ज्यादा बुरा हाल है।
इन बातों का रखें ख्याल
-गुनगुना पानी पीएं, रोजाना भाप लें।
-डॉक्टरी परामर्श पर इन्हेलर की डोज बढ़ा दें।
-बिना मास्क और चश्मे के घर से बाहर न जाएं।
-गुनगुने पानी से गरारे करें।
-शाम को दूध पीएं, गुड़ खाएं।
विज्ञापन
बिजनौर। मौसम परिवर्तन के कारण अस्पतालों में अस्थमा और सांस के मरीज बढ़ रहे हैं। जिला अस्पताल की ओपीडी में पिछले सप्ताह सांस के दस से 20 मरीज प्रतिदिन आ रहे थे, वहीं अब इनकी संख्या 30 से 40 तक पहुंच गई है।
दिन के मौसम में गरमाहट और सुबह तथा शाम के समय बढ़ रही ठंड ने अस्थमा के रोगियों की परेशानी बढ़ा दी है। ऐसे में सांस लेने में दिक्कत, गले में खराश हो रही है। अस्थमा-सांस रोगियों का मर्ज बिगड़ रहा है। रोजाना अस्थमा अटैक के तीन से पांच मरीजों को इमरजेंसी में भर्ती करना पड़ रहा है। जिला अस्पताल के चेस्ट फिजीशियन डा. हरिओम गुप्ता ने बताया कि पिछले लगभग एक सप्ताह से लगातार हो रहे मौसम में परिवर्तन से पुराने मरीजों में मर्ज बिगड़ा हुआ मिला। इनकी डोज बढ़ाई गई और जरूरत पड़ने पर इन्हें भर्ती भी करना पड़ रहा है। इसके अतिरिक्त सर्दी वाले स्वस्थ लोगों में सीने में जकड़न, छींक, खराश की परेशानी देखने को मिल रही है।
विज्ञापन
जुकाम-खांसी के मामले बढ़े
सूफिया मेमोरियल हॉस्पिटल की चेस्ट फिजीशियन डा. तजीन आरिफ बताती हैं कि धूल और धुआं लोगों में एलर्जी पैदा कर रहे हैं, इससे जुकाम-खांसी और गले में खराश के मरीज दोगुने हो गए हैं। वर्तमान में स्थिति ये है कि हर घर में एक मरीज है। आजकल ओपीडी फुल चल रही है। टेलीमेडिसिन में भी रोजाना 20 से अधिक नए मरीज फोन पर परामर्श ले रहे हैं।
विज्ञापन
रोज कर रहे पांच से सात मरीज भर्ती
पंडित चंद्रकांत आत्रेय मेमोरियल हॉस्पिटल के क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ डा. अवधेश वशिष्ठ के अनुसार मौसम बदलने से सांस के मरीजों की समस्या बढ़ जाती है। धूम्रपान की वजह से जिन मरीजों के फेफड़े कमजोर पड़ जाते हैं, ऐसे में इन रोगियों की समस्या बढ़ जाती है। यदि खांसी के साथ पीला बलगम आए तो तुरंत ही अपने चिकित्सक को अवश्य दिखाएं। हवा में नमी होने पर वाहनों का धुआं, धूल और हवा में खतरनाक गैस आसमान पर अधिक ऊंचाई पर नहीं जा पाती, बेहद नीचे इनकी एक परत बन जाती है, जिसके संपर्क में रहने से सांस के जरिये धूल-धुआं फेफड़ों में पहुंचते हैं। इससे सांस के रोगियों को काफी दिक्कत होती है। रोजाना तीन से पांच मरीज भर्ती कर रहे हैं। टीबी मरीजों का ज्यादा बुरा हाल है।
इन बातों का रखें ख्याल
-गुनगुना पानी पीएं, रोजाना भाप लें।
-डॉक्टरी परामर्श पर इन्हेलर की डोज बढ़ा दें।
-बिना मास्क और चश्मे के घर से बाहर न जाएं।
-गुनगुने पानी से गरारे करें।
-शाम को दूध पीएं, गुड़ खाएं।