{"_id":"62e2d2fffb6115218a186920","slug":"aparajita-the-message-of-nature-conservation-given-by-making-a-picture-bijnor-news-mrt5988767178","type":"story","status":"publish","title_hn":"अपराजिता : चित्र बनाकर दिया प्रकृति संरक्षण का संदेश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अपराजिता : चित्र बनाकर दिया प्रकृति संरक्षण का संदेश
विज्ञापन
बिजनौर के कृष्णा कॉलेज में अमर उजाला और वन्य जीव संस्थान की ओर से विश्व प्रकृति दिवस पर आयोजित का?
- फोटो : BIJNOR
बिजनौर। प्रकृति के बिगड़ रहे पर्यावरण को छात्राओं ने कागज पर उकेर दिया और चित्र बनाकर प्रकृति के संरक्षण का संदेश दिया। मौका था, विश्व प्रकृति दिवस एवं बाघ दिवस के तहत चित्रकला प्रतियोगिता के आयोजन किया। वहीं अमर उजाला अपराजिता के तहत छात्राओं को जागरूक भी किया गया। छात्राओं ने भी प्रकृति के संरक्षण की शपथ ली।
बृहस्पतिवार को कृष्णा कॉलेज बिजनौर में अमर उजाला और वन्य जीव संस्थान की ओर से विश्व प्रकृति दिवस पर कार्यक्रम का आयोजन हुआ। कॉलेज के विधि विभाग में आयोजित कार्यक्रम में सबसे पहले चित्रकला प्रतियोगिता हुई। जिसमें विद्यार्थियों ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि रहे एसडीएम सदर मोहित कुमार, विशिष्ट अतिथि वन विभाग के एसडीओ ज्ञान सिंह और कॉलेज के प्रबंधक पवन कुमार ने चित्रकारी का अवलोकन किया। जिन्होंने प्रकृति संरक्षण का संदेश देते हुए उकेरे गए चित्रों की सराहना की। महिमा विश्नोई, विराल और सराहना की पेंटिंग सर्वश्रेष्ठ रही। जिन्हें पुरस्कार और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।
इसके बाद आयोजित कार्यक्रम में प्रकृति और बाघ संरक्षण के मुद्दे पर छात्राओं को जागरूक किया गया। अपराजिता के तहत भी छात्राओं को उनके अधिकारों के बारे में बताया गया। छात्रा महिमा विश्नोई ने अतिथियों का स्वागत किया।
विज्ञापन
छात्राएं निभाएं संरक्षण में जिम्मेदारी : एसडीएम
मुख्य अतिथि एसडीएम सदर मोहित कुमार ने कहा कि लगातार पर्यावरण संतुलन बिगड़ता जा रहा है। हमें प्रकृति की चिंता करनी होगी। यह तभी हो सकता है जब हम रोजाना की दिनचर्या में प्रकृति के संरक्षण को लेकर जागरूक रहे। सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग करने से परहेज किया जाए। बाजार जाएं तो थैला लेकर जाएं। जिस बदलाव की अपेक्षा हम दूसरों से करते हैं, वह हमें खुद में करना होगा। कहा कि विद्यार्थी कल का भविष्य हैं। खासकर छात्राओं की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है क्योंकि उनका परिवार में दखल ज्यादा होता है, ऐसे में परिवार को भी बदलाव के लिए प्रेरित करें। जिससे प्रकृति को बचाया जा सके।
घर से ही करें शुरूआत, तभी संरक्षण संभव : एसडीओ
विशिष्ट अतिथि रहे वन विभाग के एसडीओ ज्ञान सिंह ने कहा कि विश्व प्रकृति सरंक्षण दिवस 1948 से मनाया जा रहा है। जिसका मकसद है कि प्रकृति को लेकर लोगों के बीच जागरूकता पैदा हो सके। प्रकृति, पर्यावरण और वन्य जीव सभी एक दूसरे को पूरक है। मानव का जीवन भी प्रकृति के चक्र पर ही टिका हुआ है। संरक्षण के लिए खुद जागरूक होकर औरों को भी प्रेरित करने का काम करें।
प्रकृति संरक्षण में भूमिका निभाएं: पवन कुमार
कृष्णा कॉलेज के प्रबंध निदेशक पवन कुमार ने कहा कि छोटी छोटी बातों पर भी गौर करें। जैसे गौरेया के लिए अपने घर और आस पास में घोंसला लगा दें। पक्के हो चुके मकानों और घरों में छत के पंखे की वजह से गौरेया अंदर आना नहीं चाहती। वह रहना आबादी के बीच में चाहती है। इसलिए लकड़ी के घौंसले घर के आस पास कम ऊंचाई पर लगाएं। इन छोटी छोटी बातों से ही प्रकृति का संरक्षण हो सकेगा।
प्रकृति संरक्षण को जागरूक होना जरूरी : प्रीति शुक्ला
वन्य जीव संस्थान से पहुंची प्रीति शुक्ला ने छात्राओं से कहा कि वन्य जीवों की सुरक्षा भी जरूरी है। ऐसा कोई काम नहीं करें, जिससे वन्य जीवों की सुरक्षा खतरे में पड़ जाए। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण पर जोर देते हुए प्रकृति के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला। छात्राओं को जागरूक करते हुए उनके अधिकारों के बारे में भी बताया।
विज्ञापन
बृहस्पतिवार को कृष्णा कॉलेज बिजनौर में अमर उजाला और वन्य जीव संस्थान की ओर से विश्व प्रकृति दिवस पर कार्यक्रम का आयोजन हुआ। कॉलेज के विधि विभाग में आयोजित कार्यक्रम में सबसे पहले चित्रकला प्रतियोगिता हुई। जिसमें विद्यार्थियों ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि रहे एसडीएम सदर मोहित कुमार, विशिष्ट अतिथि वन विभाग के एसडीओ ज्ञान सिंह और कॉलेज के प्रबंधक पवन कुमार ने चित्रकारी का अवलोकन किया। जिन्होंने प्रकृति संरक्षण का संदेश देते हुए उकेरे गए चित्रों की सराहना की। महिमा विश्नोई, विराल और सराहना की पेंटिंग सर्वश्रेष्ठ रही। जिन्हें पुरस्कार और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।
विज्ञापन
इसके बाद आयोजित कार्यक्रम में प्रकृति और बाघ संरक्षण के मुद्दे पर छात्राओं को जागरूक किया गया। अपराजिता के तहत भी छात्राओं को उनके अधिकारों के बारे में बताया गया। छात्रा महिमा विश्नोई ने अतिथियों का स्वागत किया।
विज्ञापन
छात्राएं निभाएं संरक्षण में जिम्मेदारी : एसडीएम
मुख्य अतिथि एसडीएम सदर मोहित कुमार ने कहा कि लगातार पर्यावरण संतुलन बिगड़ता जा रहा है। हमें प्रकृति की चिंता करनी होगी। यह तभी हो सकता है जब हम रोजाना की दिनचर्या में प्रकृति के संरक्षण को लेकर जागरूक रहे। सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग करने से परहेज किया जाए। बाजार जाएं तो थैला लेकर जाएं। जिस बदलाव की अपेक्षा हम दूसरों से करते हैं, वह हमें खुद में करना होगा। कहा कि विद्यार्थी कल का भविष्य हैं। खासकर छात्राओं की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है क्योंकि उनका परिवार में दखल ज्यादा होता है, ऐसे में परिवार को भी बदलाव के लिए प्रेरित करें। जिससे प्रकृति को बचाया जा सके।
घर से ही करें शुरूआत, तभी संरक्षण संभव : एसडीओ
विशिष्ट अतिथि रहे वन विभाग के एसडीओ ज्ञान सिंह ने कहा कि विश्व प्रकृति सरंक्षण दिवस 1948 से मनाया जा रहा है। जिसका मकसद है कि प्रकृति को लेकर लोगों के बीच जागरूकता पैदा हो सके। प्रकृति, पर्यावरण और वन्य जीव सभी एक दूसरे को पूरक है। मानव का जीवन भी प्रकृति के चक्र पर ही टिका हुआ है। संरक्षण के लिए खुद जागरूक होकर औरों को भी प्रेरित करने का काम करें।
प्रकृति संरक्षण में भूमिका निभाएं: पवन कुमार
कृष्णा कॉलेज के प्रबंध निदेशक पवन कुमार ने कहा कि छोटी छोटी बातों पर भी गौर करें। जैसे गौरेया के लिए अपने घर और आस पास में घोंसला लगा दें। पक्के हो चुके मकानों और घरों में छत के पंखे की वजह से गौरेया अंदर आना नहीं चाहती। वह रहना आबादी के बीच में चाहती है। इसलिए लकड़ी के घौंसले घर के आस पास कम ऊंचाई पर लगाएं। इन छोटी छोटी बातों से ही प्रकृति का संरक्षण हो सकेगा।
प्रकृति संरक्षण को जागरूक होना जरूरी : प्रीति शुक्ला
वन्य जीव संस्थान से पहुंची प्रीति शुक्ला ने छात्राओं से कहा कि वन्य जीवों की सुरक्षा भी जरूरी है। ऐसा कोई काम नहीं करें, जिससे वन्य जीवों की सुरक्षा खतरे में पड़ जाए। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण पर जोर देते हुए प्रकृति के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला। छात्राओं को जागरूक करते हुए उनके अधिकारों के बारे में भी बताया।