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पांच साल से जिला अस्पताल में नहीं एनेस्थेटिस्ट
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पांच साल से जिला अस्पताल में नहीं एनेस्थेटिस्ट
बिजनौर। जिला अस्पताल में पिछले पांच सालों से कोई एनेस्थेटिस्ट नहीं है। महिला अस्पताल से एनेस्थेटिस्ट को बुलाकर ऑपरेशन कराया जाता है। यह सिलसिला पिछले पांच सालों से चल रहा है। इस समय भी छह मरीज वेटिंग में हैं। इमरजेंसी की स्थिति होने पर अगर महिला अस्पताल से एनेस्थेटिस्ट नहीं आता है तो मरीज को मेरठ मेडिकल कॉलेज में रेफर किया जाता है।
जिला अस्पताल में सभी तरह की सुविधाएं होने का दावा किया जाता है, लेकिन इन दावों की पोल पिछले पांच सालों से कोई एनेस्थेटिस्ट नियुक्त नहीं होने पर खुल रही है। महिला अस्पताल के एनेस्थेटिस्ट से ही काम चलाया जा रहा है। अगर महिला अस्पताल से एनेस्थेटिस्ट नहीं आता है तो मरीज को मेरठ रेफर कर दिया जाता है। अस्पताल से मिली जानकारी के मुताबिक यह स्थिति करीब सात महीने पहले भी आई थी। एक महिला को पथरी का तेज दर्द हो रहा था। जिसकी वजह से उसका ऑपरेशन करना जरूरी था। लेकिन उसी समय महिला अस्पताल में भी एक महिला का ऑपरेशन होना था। जिसकी वजह से एनेस्थेटिस्ट नहीं आया। जिसके बाद महिला को मेरठ रेफर कर दिया गया।
इन बीमारियों के होते हैं ऑपरेशन
जिला अस्पताल में पित्त की थैली में पथरी, हर्निया, हाइड्रोसील और हड्डियों के ऑपरेशन ज्यादा होते हैं। इस समय भी करीब पांच मरीज हड्डियों के ऑपरेशन के लिए वेटिंग में हैं। रोजाना जिला अस्पताल में सर्जरी कराने के लिए करीब 15 मरीज आते हैं, जिन्हें जांच और अन्य चीजों के लिए एक सप्ताह तक का समय दिया जाता है। अगर महिला अस्पताल और जिला अस्पताल में एक ही समय में दो इमरजेंसी वाले मरीज आते हैं तो दोनों की हालत को देख फैसला लिया जाता है। अगर महिला अस्पताल वाले मरीज की हालत ज्यादा खराब होती है तो उसका ऑपरेशन पहले किया जाता है। जबकि दूसरे मरीज को रेफर कर दिया जाता है।
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शासन को भेज चुके हैं पत्र : सीएमएस
सीएमएस अरुण कुमार पांडेय का कहना है कि एनेस्थेटिस्ट के लिए सीएमओ और शासन को कई बार पत्र भेजा जा चुका है। लेकिन अभी तक जिला अस्पताल के लिए एनेस्थेटिस्ट की नियुक्ति नहीं हुई है। महिला अस्पताल में नियुक्त एनेस्थेटिस्ट से ही काम चलाया जा रहा है।
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बिजनौर। जिला अस्पताल में पिछले पांच सालों से कोई एनेस्थेटिस्ट नहीं है। महिला अस्पताल से एनेस्थेटिस्ट को बुलाकर ऑपरेशन कराया जाता है। यह सिलसिला पिछले पांच सालों से चल रहा है। इस समय भी छह मरीज वेटिंग में हैं। इमरजेंसी की स्थिति होने पर अगर महिला अस्पताल से एनेस्थेटिस्ट नहीं आता है तो मरीज को मेरठ मेडिकल कॉलेज में रेफर किया जाता है।
जिला अस्पताल में सभी तरह की सुविधाएं होने का दावा किया जाता है, लेकिन इन दावों की पोल पिछले पांच सालों से कोई एनेस्थेटिस्ट नियुक्त नहीं होने पर खुल रही है। महिला अस्पताल के एनेस्थेटिस्ट से ही काम चलाया जा रहा है। अगर महिला अस्पताल से एनेस्थेटिस्ट नहीं आता है तो मरीज को मेरठ रेफर कर दिया जाता है। अस्पताल से मिली जानकारी के मुताबिक यह स्थिति करीब सात महीने पहले भी आई थी। एक महिला को पथरी का तेज दर्द हो रहा था। जिसकी वजह से उसका ऑपरेशन करना जरूरी था। लेकिन उसी समय महिला अस्पताल में भी एक महिला का ऑपरेशन होना था। जिसकी वजह से एनेस्थेटिस्ट नहीं आया। जिसके बाद महिला को मेरठ रेफर कर दिया गया।
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इन बीमारियों के होते हैं ऑपरेशन
जिला अस्पताल में पित्त की थैली में पथरी, हर्निया, हाइड्रोसील और हड्डियों के ऑपरेशन ज्यादा होते हैं। इस समय भी करीब पांच मरीज हड्डियों के ऑपरेशन के लिए वेटिंग में हैं। रोजाना जिला अस्पताल में सर्जरी कराने के लिए करीब 15 मरीज आते हैं, जिन्हें जांच और अन्य चीजों के लिए एक सप्ताह तक का समय दिया जाता है। अगर महिला अस्पताल और जिला अस्पताल में एक ही समय में दो इमरजेंसी वाले मरीज आते हैं तो दोनों की हालत को देख फैसला लिया जाता है। अगर महिला अस्पताल वाले मरीज की हालत ज्यादा खराब होती है तो उसका ऑपरेशन पहले किया जाता है। जबकि दूसरे मरीज को रेफर कर दिया जाता है।
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शासन को भेज चुके हैं पत्र : सीएमएस
सीएमएस अरुण कुमार पांडेय का कहना है कि एनेस्थेटिस्ट के लिए सीएमओ और शासन को कई बार पत्र भेजा जा चुका है। लेकिन अभी तक जिला अस्पताल के लिए एनेस्थेटिस्ट की नियुक्ति नहीं हुई है। महिला अस्पताल में नियुक्त एनेस्थेटिस्ट से ही काम चलाया जा रहा है।