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गोवर्धन की पूजा कर बांटा अन्नकूट
अमर उजाला/बिजनौर
Updated Thu, 08 Nov 2018 11:45 PM IST
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बिजनौर के मोहल्ला गीतानगरी में गोवर्धन की पूजा करते श्रद्धालु।
- फोटो : अमर उजाला
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बिजनौर में जिले भर में गोवर्धन पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। गांवों से लेकर शहरों तक में गोवर्धन पूजा की धूम रही। श्रद्धालुओं ने मंदिरों एवं घरों में भगवान गोवर्धन महाराज, श्रीकृष्ण और गायों आदि की पूजा-अर्चना कर अन्नकूट का प्रसाद वितरित किया। श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर पुण्य लाभ अर्जित किया।
जिले भर में गोवर्धन पर्व उत्साह से मनाया गया। शहर एवं गांवों के मंदिरों में श्री गोवर्धन महाराज की पूजा-अर्चना के बाद अन्नकूट का प्रसाद भी वितरित किया गया। इस अवसर पर भगवान गोवर्धन महाराज की विधि विधान के साथ पूजा-अर्चना की गई। शास्त्रों के अनुसार कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष प्रतिपदा को गोवर्धन का त्योहार मनाया जाता है।
इस दिन भगवान श्रीकृष्ण, गोवर्धन पर्वत, गायों आदि की पूजा की जाती है। मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करने के बाद गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा करने से विशेष फल मिलता है।
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लोग घरों में गोबर से गोवर्धन पर्वत बनाकर जल, मौली, रोली, चावल, दही और दीप जलाकर पूजा अर्चना करते हैं। बृहस्पतिवार को लोगों ने अपने पशुओं को नहलाकर उनके सींगों पर गेरू लगाया। अष्टगंध, सामग्री सुंघाकर भगवान गोवर्धन से पशुओं के रोगमुक्त होने की कामना की। इसके बाद गायों को मिठाई का भोग लगाकर उनकी आरती उतारी गई। श्रद्धानुसार ब्राह्मणों को दान-दक्षिणा देकर उन्हें विदा किया गया। इस अवसर पर लोगों ने अपने घरों में विभिन्न तरह के पकवान बनाए और अन्नकूट का प्रसाद भी बनाया। सभी ने आनंदपूर्वक त्योहार मनाया।
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जिले भर में गोवर्धन पर्व उत्साह से मनाया गया। शहर एवं गांवों के मंदिरों में श्री गोवर्धन महाराज की पूजा-अर्चना के बाद अन्नकूट का प्रसाद भी वितरित किया गया। इस अवसर पर भगवान गोवर्धन महाराज की विधि विधान के साथ पूजा-अर्चना की गई। शास्त्रों के अनुसार कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष प्रतिपदा को गोवर्धन का त्योहार मनाया जाता है।
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इस दिन भगवान श्रीकृष्ण, गोवर्धन पर्वत, गायों आदि की पूजा की जाती है। मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करने के बाद गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा करने से विशेष फल मिलता है।
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लोग घरों में गोबर से गोवर्धन पर्वत बनाकर जल, मौली, रोली, चावल, दही और दीप जलाकर पूजा अर्चना करते हैं। बृहस्पतिवार को लोगों ने अपने पशुओं को नहलाकर उनके सींगों पर गेरू लगाया। अष्टगंध, सामग्री सुंघाकर भगवान गोवर्धन से पशुओं के रोगमुक्त होने की कामना की। इसके बाद गायों को मिठाई का भोग लगाकर उनकी आरती उतारी गई। श्रद्धानुसार ब्राह्मणों को दान-दक्षिणा देकर उन्हें विदा किया गया। इस अवसर पर लोगों ने अपने घरों में विभिन्न तरह के पकवान बनाए और अन्नकूट का प्रसाद भी बनाया। सभी ने आनंदपूर्वक त्योहार मनाया।