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खास रिपोर्ट: बिजनौर में सेंधमारी से रोचक हुआ मुकाबला, चंद्रशेखर की धमक से नगीना लोकसभा का बिगड़ा समीकरण

Sat, 20 Apr 2024 02:02 PM IST
कपिल kapil रजनीश त्यागी, संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
रजनीश त्यागी, संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर Published by: कपिल kapil Updated Sat, 20 Apr 2024 02:02 PM IST
सार

Election 2024 : बिजनौर और नगीना लोकसभा सीट पर एक-दूसरे के कोर में वोट में सेंधमारी से मुकाबला रोचक हो गया है। दोनों सीटों को लेकर अमर उजाला की विशेष रिपोर्ट पढ़िए।

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Amar Ujala special report on Bijnor and Nagina Lok Sabha elections
बिजनौर में मतदान करतीं महिलाएं। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बिजनौर लोकसभा में एक दूसरे के कोर वोट में हुई सेंधमारी से मुकाबला रोचक हो गया है। मुस्लिम वोट बैंक में बसपा ने सेंधमारी कर राजनीतिक पंडितों को चौंका दिया है। वहीं भाजपा-रालोद गठबंधन के वोटबैंक माने जाने वाले सैनी समाज का बड़ा हिस्सा सपा की झोली में जाता दिखाई। दलितों में रालोद की आंशिक असर नजर आया। मुकाबला त्रिकोणीय बताया जा रहा। इसमें मुख्य मुकाबला रालोद और सपा के बीच माना जा रहा है। 

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बिजनौर लोकसभा क्षेत्र में 11 प्रत्याशी मैदान में थे। इनमें भाजपा-रालोद गठबंधन से चंदन चौहान, सपा से दीपक सैनी, बसपा से चौधरी बिजेंद्र सिंह मुख्य मुकाबले में नजर आए। बिजनौर विधानसभा क्षेत्र में अधिकांश मुस्लिम सपा की ओर जाते दिखाई दिए। हालांकि बसपा को भी कई जगह मुस्लिम वोट करने की बात कहते नजर आए। वहीं दलित बसपा जबकि जाट और भाजपा के काडर वोट रालोद प्रत्याशी के खाते में जाते हुए नजर आए। यही हाल चांदपुर विधानसभा का भी रहा। वहां सैनी वोट में जरूर सपा ने सेंध लगाई है। काफी हद तक यह वोट बैंक सपा के पास जाता दिखा। 

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हस्तिनापुर में मुस्लिम मतदाताओं में बिखराव दिखा। यहां पर साइकिल और बसपा दोनों ओर ही मुस्लिम मतदाताओं का रुझान नजर आया। दलित वोट अधिकांश बसपा की झोली में गया। रालोद के साथ गठबंधन के कारण भाजपा का वोटबैंक साथ नजर आया। यहां मुकाबला त्रिकोणीय बनता दिखा।

- बसपा प्रत्याशी चौधरी विजेंद्र सिंह पर दलित मतदाता लामबंद दिखाई दिया। वह जाट और मुस्लिम में भी कहीं-कहीं सेंधमारी करते दिखे। मीरापुर व पुरकाजी विधानसभा में त्यागी बाहुल्य गांवों में वोटों का बंटवारा हुआ। त्यागी रालोद और निर्दलीय प्रत्याशी बॉबी त्यागी में बंटे दिखाई दिए। 

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पुरकाजी-मीरापुर विधानसभा में बंटते नजर आए मतदाता
बिजनौर लोकसभा की पुरकाजी और मीरापुर विधानसभा सीट पर त्रिकोणिय मुकाबला नजर आया। मीरापुर क्षेत्र में मुस्लिमों ने साइकिल चलाई, जबकि सैनी वोट बंटते नजर आए। दलित मतदाताओं का रुझान बसपा की तरफ दिखा, जबकि जाट और गुर्जर रालोद के पक्ष में जाते दिखाई दिए। बसपा ने मुस्लिम और जाट मतों में भी सेंधमारी की। छपार क्षेत्र के त्यागी और राजपूत मतदाताओं में भी  बिखराव नजर आया। 

बिजनौर लोकसभा की मीरापुर सीट से रालोद प्रत्याशी चंदन चौहान विधायक हैं। उनके लिए उनका विधानसभा क्षेत्र ही बड़ी चुनौती बन गया। मीरापुर सहित अन्य कुछ स्थानों पर बसपा ने भी मुस्लिमों में सेंधमारी की है। सैनी वोट भाजपा और सपा में बंटते दिखाई दिए। रालोद प्रत्याशी चंदन चौहान के पक्ष में जाट और गुर्जर लामबंद दिखे। इसके अलावा अति पिछड़ा और स्वर्ण मतदाता भी उनके साथ बताया जा रहा है। 

चंद्रशेखर की धमक से रोचक हुआ मुकाबला
नगीना लोकसभा सीट पर अप्रत्याशित नजारा देखने को मिला। यहां करीब 45 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाले मुस्लिम समाज में बिखराव नजर आया। दिलचस्प यह है कि दलित और मुस्लिम वोट बैंक में आसपा के चंद्रशेखर ने जमकर सेंधमारी की। उधर, भाजपा के काडर वोट त्यागी, जाट, राजपूत और कुछ पिछड़े वर्ग के मतदाता भी छिटकते हुए दिखे। राजनीतिक पंडित भाजपा के ओमकुमार और आसपा के चंद्रशेखर के बीच मुकाबला मान रहे हैं। 

मुस्लिम मतदाताओं में आसपा की हिस्सेदारी ने सपा की चिंता बढ़ा दी। नगीना विधानसभा क्षेत्र में मुस्लिमों में साइकिल धीमी दिखी तो केतली का असर अधिक नजर आया। नजीबाबाद में अलग-अलग क्षेत्रों में दोनों ने वोट लिए। धामपुर, नहटौर और नूरपुर में भी ऐसी ही स्थिति रही। दलित समाज की बात करें तो यह वोटबैंक अधिकांश आसपा और उसके बाद बसपा के पास जाता दिखा। भाजपा भी इसमें कुछ हद तक सेंध लगाने में कामयाब होती दिखी। बात भाजपा के काडर वोट की करें तो नहटौर में त्यागी, कोतवाली देहात के पास जाट, धामपुर क्षेत्र में राजपूत वोटबैंक का कुछ हिस्सा छिटका। यह वोट भी आसपा की ओर जाता दिखा।

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हार जीत का अंतर हजारों में होने का अनुमान-
पिछले 2019 के चुनाव में बसपा प्रत्याशी 568,378 वोट मिले थे, जबकि भाजपा प्रत्याशी दूसरे नंबर पर रहे और उन्हें 4,01,546 वोट मिले थे। पिछली बार बसपा के साथ सपा और रालोद भी थी। हार जीत का अंतर डेढ़ लाख से ज्यादा था। इस बार बिखराव के कारण जो समीकरण बन रहे हैं, उनसे यह अंतर हजारों में होने का अनुमान लगाया जा रहा है।

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