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अमर उजाला अभियान : सब मिलकर बनाएंगे मालन को स्वच्छ
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बिजनौर में मालन नदी के चौड़ीकरण के लिए तट पर डाली गई मिट्टी।
- फोटो : BIJNOR
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अमर उजाला अभियान : सब मिलकर बनाएंगे मालन को स्वच्छ
बिजनौर। मैली हो चुकी मालन को स्वच्छ और निर्मल बनाने के लिए अब लोग आगे आने लगे हैं। तमाम समाजसेवी और अलग अलग संगठनों से जुड़े लोग भी कह रहे हैं कि हम सब मिलकर मालन को स्वच्छ बनाएंगे। इसके लिए श्रमदान ही पर्याप्त नहीं होगा बल्कि गांव से लेकर शहर तक जागरुक अभियान भी चलेगा। जिससे भविष्य में भी मालन की स्वच्छता को बरकरार रखा जा सके।
पुरु राजपूत मानव कल्याण समिति उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष ठाकुर सिंह का कहना है कि मालन नदी में खेती करने वाले कुछ किसानों ने नदी की धार घटाकर नाले के रूप में कर दी है। जो गलत है। श्रमदान कराकर नदी का चौड़ीकरण करना अच्छी बात है।
जगन्नाथ सिंह ने बताया कि कुछ किसानों ने मालन नदी में खेती करके मालन में बहने वाले पानी के रास्ते को कम कर के नाले के रूप में कर दिया है। उनकी भूमि भी मालन नदी में है। हमारी अतिरिक्त भूमि भी काटी गई है, हमें कोई एतराज नहीं है। मालन का चौड़ीकरण होगा तो नदी में आने वाले बरसात का पानी भी खुलकर बहेगा।
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मुकीमपुर धर्मसी के पूर्व प्रधान इंद्रवीर सिंह का कहना है कि मालन के पानी का जितना रास्ता चौड़ा होगा उतना ही गांव में बाढ़ का खतरा कम होगा। खेती की भूमि भी जलमग्न नहीं होगी, जलभराव से निजात मिलेगी, उपजाऊ भूमि भी जलभराव से मुक्त रहेगी।
अब्दुल शकूर का कहना है कि 50 साल पहले मालन नदी की धार की चौड़ाई एक किलोमीटर से अधिक थी, जो अब घटकर बहुत कम रह गई है। मालन नदी की धार कम होने से नदी का पानी गांवों में आ जाता है, चौड़ीकरण होने से अब गांव में बाढ़ का पानी नहीं आएगा। मालन नदी पर बने पुल से बरसात में मार्ग बंद होने का खतरा भी नहीं है।
जल ही जीवन है, नदियों के बचाए बिना यह संभव नहीं हो सकेगा। नदियों का अस्तित्व हमें बचाना है और यह प्रत्येक मानव का कर्तव्य है। जिसे लेकर हमने 2018 में पांच हजार लोगों के संग मालन पर अभियान चलाया था। मालन किनारे बसे सभी गांव में स्वच्छता कमेटी बनी थी। अब अगर प्रशासन वास्तव में गंभीर है तो पूरी तरह से सहयोग किया जाएगा - दिगंबर सिंह, मंडल अध्यक्ष भाकियू
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बिजनौर। मैली हो चुकी मालन को स्वच्छ और निर्मल बनाने के लिए अब लोग आगे आने लगे हैं। तमाम समाजसेवी और अलग अलग संगठनों से जुड़े लोग भी कह रहे हैं कि हम सब मिलकर मालन को स्वच्छ बनाएंगे। इसके लिए श्रमदान ही पर्याप्त नहीं होगा बल्कि गांव से लेकर शहर तक जागरुक अभियान भी चलेगा। जिससे भविष्य में भी मालन की स्वच्छता को बरकरार रखा जा सके।
पुरु राजपूत मानव कल्याण समिति उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष ठाकुर सिंह का कहना है कि मालन नदी में खेती करने वाले कुछ किसानों ने नदी की धार घटाकर नाले के रूप में कर दी है। जो गलत है। श्रमदान कराकर नदी का चौड़ीकरण करना अच्छी बात है।
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जगन्नाथ सिंह ने बताया कि कुछ किसानों ने मालन नदी में खेती करके मालन में बहने वाले पानी के रास्ते को कम कर के नाले के रूप में कर दिया है। उनकी भूमि भी मालन नदी में है। हमारी अतिरिक्त भूमि भी काटी गई है, हमें कोई एतराज नहीं है। मालन का चौड़ीकरण होगा तो नदी में आने वाले बरसात का पानी भी खुलकर बहेगा।
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मुकीमपुर धर्मसी के पूर्व प्रधान इंद्रवीर सिंह का कहना है कि मालन के पानी का जितना रास्ता चौड़ा होगा उतना ही गांव में बाढ़ का खतरा कम होगा। खेती की भूमि भी जलमग्न नहीं होगी, जलभराव से निजात मिलेगी, उपजाऊ भूमि भी जलभराव से मुक्त रहेगी।
अब्दुल शकूर का कहना है कि 50 साल पहले मालन नदी की धार की चौड़ाई एक किलोमीटर से अधिक थी, जो अब घटकर बहुत कम रह गई है। मालन नदी की धार कम होने से नदी का पानी गांवों में आ जाता है, चौड़ीकरण होने से अब गांव में बाढ़ का पानी नहीं आएगा। मालन नदी पर बने पुल से बरसात में मार्ग बंद होने का खतरा भी नहीं है।
जल ही जीवन है, नदियों के बचाए बिना यह संभव नहीं हो सकेगा। नदियों का अस्तित्व हमें बचाना है और यह प्रत्येक मानव का कर्तव्य है। जिसे लेकर हमने 2018 में पांच हजार लोगों के संग मालन पर अभियान चलाया था। मालन किनारे बसे सभी गांव में स्वच्छता कमेटी बनी थी। अब अगर प्रशासन वास्तव में गंभीर है तो पूरी तरह से सहयोग किया जाएगा - दिगंबर सिंह, मंडल अध्यक्ष भाकियू