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किसानों पर लगाया जा रहा जुर्माना, सरकारी कार्यालयों में खुलेआम जल रहा कूड़ा
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बिजनौर में पीडब्लूडी गेस्ट हाउस के अंदर जला कूड़ा
- फोटो : BIJNOR
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किसानों लगाया जा रहा जुर्माना, सरकारी कार्यालयों में खुलेआम जल रहा कूड़ा
बिजनौर। पराली जलाने के नाम पर किसानों के खेतों की सेटेलाइट से निगरानी कराने वाला प्रशासन कलक्ट्रेट तक की निगरानी नहीं कर पा रहा है। कलक्ट्रेट में हर रोज खुलेआम कूड़ा जलाया जा रहा है। डीएम कंपाउंड में भी दोपहर को कूड़ा जलता है। अफसर इस ओर देखते भी नहीं हैं। लेकिन किसानों के खेतों में अवशेष जलाने के नाम पर उन पर जुर्माना लगाया जा रहा है। उन्हें सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित रखने की चेतावनी दी जा रही है।
वायुमंडल प्रदूषण को लेकर इस समय एनजीटी और सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रवैया अपना रखा है। प्रदूषण को खत्म करने के लिए फसलों के अवशेष, नगर पालिका का कूड़ा आदि जलने से रोकने के सख्त निर्देश जारी किए गए हैं। किसानों के खेतों की निगरानी सेटेलाइट से रखी जा रही है। फसलों के अवशेष जलाने वाले किसानों से जुर्माना वसूला जा रहा है। लेकिन सरकारी विभागों में अफसरों के सामने ही जलाए जा रहे कूड़े पर किसी का ध्यान नहीं है। कलक्ट्रेट, डीएम कंपाउंड में रोज कूड़ा जलाया जाता है। बुधवार को भी पीडब्लूडी के गेस्ट हाउस में कूड़ा जलाया गया। सिविल लाइन पुलिस चौकी पीडब्लूडी के गेस्ट हाउस से केवल दस कदम की दूरी पर है। कूड़ा जलाने वालों को पुलिस भी चिह्नित कर रही है। लेकिन दोपहर को करीब 12 बजे दो घंटे तक जलते रहे कूड़े पर किसी ने ध्यान देने की कोशिश नहीं की।
उठता रहा धुआं, दो बार निकले डीएम
जिस समय पीडब्लूडी के गेस्ट हाउस में कूड़ा जलाया जा रहा था, वहां से डीएम रमाकांत पांडेय दो बार गुजरे। डीएम नेहरू स्पोर्ट्स स्टेडियम में खेलों का शुभारंभ करने जा रहे थे। कर्मचारियों को डीएम का भी जरा खौफ नहीं था। करीब दो घंटे तक कूड़ा जलता रहा। एसपी, एसपी सिटी, एसपी देहात भी पीडब्लूडी गेस्ट हाउस के सामने से होकर अपने कार्यालय आते जाते हैं। किसानों को फसलों के अवशेष जलाने के बजाए खेत में गलाने के लिए कहा जाता है। सरकारी आवासों व उनके सामने जो कूड़ा जलाया जाता है वह भी पेड़ों की पत्ती व छाल रहती है। डीएम कंपाउंड के चारों ओर नगर पालिका की लैंड स्केपिंग बनी हैं। इन लैंड स्केपिंग में पत्तियों को डाला जा सकता है।
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होगी सख्त कार्रवाई : एसडीएम
एसडीएम बृजेश कुमार के अनुसार उन्हें मामले की जानकारी नहीं है। कूड़ा जलाने वाले कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई होगी। एनजीटी, सुप्रीम कोर्ट और शासन-प्रशासन प्रदूषण को लेकर सख्त है। आदेशों का हर हाल में पालन कराया जाएगा।
किसानों पर नहीं, खुद पर ध्यान दें अफसर
राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के प्रदेश महासचिव कैलाश लांबा के अनुसार खेतों से कई गुना ज्यादा अवशेष सफाई कर्मचारी सरकारी आवास व कार्यालय में जला देते हैं। फिर भी प्रदूषण का ठीकरा किसानों के सिर पर फोड़ा जा रहा है। प्रशासन केवल अपने कर्मचारियों को बस में कर ले तो प्रदूषण खत्म हो जाएगा।
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बिजनौर। पराली जलाने के नाम पर किसानों के खेतों की सेटेलाइट से निगरानी कराने वाला प्रशासन कलक्ट्रेट तक की निगरानी नहीं कर पा रहा है। कलक्ट्रेट में हर रोज खुलेआम कूड़ा जलाया जा रहा है। डीएम कंपाउंड में भी दोपहर को कूड़ा जलता है। अफसर इस ओर देखते भी नहीं हैं। लेकिन किसानों के खेतों में अवशेष जलाने के नाम पर उन पर जुर्माना लगाया जा रहा है। उन्हें सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित रखने की चेतावनी दी जा रही है।
वायुमंडल प्रदूषण को लेकर इस समय एनजीटी और सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रवैया अपना रखा है। प्रदूषण को खत्म करने के लिए फसलों के अवशेष, नगर पालिका का कूड़ा आदि जलने से रोकने के सख्त निर्देश जारी किए गए हैं। किसानों के खेतों की निगरानी सेटेलाइट से रखी जा रही है। फसलों के अवशेष जलाने वाले किसानों से जुर्माना वसूला जा रहा है। लेकिन सरकारी विभागों में अफसरों के सामने ही जलाए जा रहे कूड़े पर किसी का ध्यान नहीं है। कलक्ट्रेट, डीएम कंपाउंड में रोज कूड़ा जलाया जाता है। बुधवार को भी पीडब्लूडी के गेस्ट हाउस में कूड़ा जलाया गया। सिविल लाइन पुलिस चौकी पीडब्लूडी के गेस्ट हाउस से केवल दस कदम की दूरी पर है। कूड़ा जलाने वालों को पुलिस भी चिह्नित कर रही है। लेकिन दोपहर को करीब 12 बजे दो घंटे तक जलते रहे कूड़े पर किसी ने ध्यान देने की कोशिश नहीं की।
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उठता रहा धुआं, दो बार निकले डीएम
जिस समय पीडब्लूडी के गेस्ट हाउस में कूड़ा जलाया जा रहा था, वहां से डीएम रमाकांत पांडेय दो बार गुजरे। डीएम नेहरू स्पोर्ट्स स्टेडियम में खेलों का शुभारंभ करने जा रहे थे। कर्मचारियों को डीएम का भी जरा खौफ नहीं था। करीब दो घंटे तक कूड़ा जलता रहा। एसपी, एसपी सिटी, एसपी देहात भी पीडब्लूडी गेस्ट हाउस के सामने से होकर अपने कार्यालय आते जाते हैं। किसानों को फसलों के अवशेष जलाने के बजाए खेत में गलाने के लिए कहा जाता है। सरकारी आवासों व उनके सामने जो कूड़ा जलाया जाता है वह भी पेड़ों की पत्ती व छाल रहती है। डीएम कंपाउंड के चारों ओर नगर पालिका की लैंड स्केपिंग बनी हैं। इन लैंड स्केपिंग में पत्तियों को डाला जा सकता है।
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होगी सख्त कार्रवाई : एसडीएम
एसडीएम बृजेश कुमार के अनुसार उन्हें मामले की जानकारी नहीं है। कूड़ा जलाने वाले कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई होगी। एनजीटी, सुप्रीम कोर्ट और शासन-प्रशासन प्रदूषण को लेकर सख्त है। आदेशों का हर हाल में पालन कराया जाएगा।
किसानों पर नहीं, खुद पर ध्यान दें अफसर
राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के प्रदेश महासचिव कैलाश लांबा के अनुसार खेतों से कई गुना ज्यादा अवशेष सफाई कर्मचारी सरकारी आवास व कार्यालय में जला देते हैं। फिर भी प्रदूषण का ठीकरा किसानों के सिर पर फोड़ा जा रहा है। प्रशासन केवल अपने कर्मचारियों को बस में कर ले तो प्रदूषण खत्म हो जाएगा।