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बाढ़ से निपटने की कार्य योजना तैयार, 10 बाढ़ चौकियां
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बाढ़ से निपटने की कार्य योजना तैयार, 10 बाढ़ चौकियां
धामपुर। तहसील प्रशासन ने साल 2022-23 में संभावित बाढ़ से उत्पन्न होने वाली प्रत्येक स्थिति से निपटने, प्रभावित लोगों को राहत प्रदान करने के लिए कार्य योजना तैयार कर ली है। क्षेत्र में 99 ऐसे गांव है, जिनमें बाढ़ की आशंका रहती है। इन गांवों में से 11 गांव उच्च स्तर के बाढ़ संभावित गांव है।
तहसीलदार गोपेश तिवारी का कहना है कि बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए 10 बाढ़ चौकियां स्थापित की गईं हैं। 14 आश्रय स्थल बने हैं। बाढ़ चौकियों पर कर्मियों की 24 घंटे ड्यूटी लगा दी गई है। विषम परिस्थितियों में लोगों को गांवों से निकालने के लिए पांच नावों की व्यवस्था की गई है।
उन्होंने बताया कि क्षेत्र में प्रमुखतया: छह नदियां हैं। इनमें गांगन नदी, खो नदी, रामगंगा नदी, फीका नदी, बैनाली नदी और नचना नकटा नदी शामिल हैं। बाढ़ क्षेत्र के 99 में से 46 गांव रामगंगा, 29 गांव खो नदी, दो-दो गांव बनैली और नचना नकटा नदी, 19 गांव गांगन और एक ग्राम फीका नदी से प्रभावित होते हैु। इनमें 24 गांवों में निम्न स्तर, 64 गांवों में मध्यम स्तर और 11 गांवों में उच्च स्तर बाढ़ आती है। प्रत्येक बाढ़ चौकी पर प्रभावित लोगों को जीवन उपयोगी वस्तुओं जैसे गुड़, गेहूं, चावल, चीनी, मिट्टी का तेल, नमक, माचिस, आटा आदि की जिम्मेदारी पूर्ति विभाग को दी गई है।
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तहसील मुख्यालय बना कंट्रोल रूम
तहसीलदार का कहना है कि संभावित बाढ़ को लेकर तहसील मुख्यालय पर कंट्रोल रूम बनाया गया है। जिस का फोन नंबर 1344-230035 है। बाढ़ शिविर में भोजन बनाने के लिए कारीगरों की भी व्यवस्था कर ली गई है। पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था करने के लिए भी लोगों को नामित कर दिया गया है।
ये होंगे आश्रय स्थल
तहसीलदार ने बताया कि निर्धारित 14 आश्रय स्थलों में से अफजलगढ़ में डाक बंगला, कादराबाद में नई टंकी सिंचाई विभाग का डाक बंगला, मकसूदाबाद पंचायत घर, जूनियर हाई स्कूल हरेवली, जूनियर हाईस्कूल सरकड़ा, रानी फूल कुमारी पाठशाला शेरकोट, दक्ष कन्या इंटर कॉलेज शेरकोट, पीजेएम इंटर कॉलेज शेरकोट, जिला परिषदीय प्राथमिक स्कूल शेरकोट, जूनियर हाईस्कूल व सीड्स स्टोर मुबारकपुर टप्पा भारती, एमक्यू इंटर कॉलेज स्योहारा, जिला परिषदीय प्राथमिक स्कूल बगवाड़ा व निरीक्षण भवन, एसएनएसएम इंटर कॉलेज नहटौर, जूनियर हाई स्कूल बालापुर अखेड़ा शामिल हैं। इन आश्रय स्थलों में 49 गांवों के लोगों को विस्थापित किया जा सकता है।
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धामपुर। तहसील प्रशासन ने साल 2022-23 में संभावित बाढ़ से उत्पन्न होने वाली प्रत्येक स्थिति से निपटने, प्रभावित लोगों को राहत प्रदान करने के लिए कार्य योजना तैयार कर ली है। क्षेत्र में 99 ऐसे गांव है, जिनमें बाढ़ की आशंका रहती है। इन गांवों में से 11 गांव उच्च स्तर के बाढ़ संभावित गांव है।
तहसीलदार गोपेश तिवारी का कहना है कि बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए 10 बाढ़ चौकियां स्थापित की गईं हैं। 14 आश्रय स्थल बने हैं। बाढ़ चौकियों पर कर्मियों की 24 घंटे ड्यूटी लगा दी गई है। विषम परिस्थितियों में लोगों को गांवों से निकालने के लिए पांच नावों की व्यवस्था की गई है।
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उन्होंने बताया कि क्षेत्र में प्रमुखतया: छह नदियां हैं। इनमें गांगन नदी, खो नदी, रामगंगा नदी, फीका नदी, बैनाली नदी और नचना नकटा नदी शामिल हैं। बाढ़ क्षेत्र के 99 में से 46 गांव रामगंगा, 29 गांव खो नदी, दो-दो गांव बनैली और नचना नकटा नदी, 19 गांव गांगन और एक ग्राम फीका नदी से प्रभावित होते हैु। इनमें 24 गांवों में निम्न स्तर, 64 गांवों में मध्यम स्तर और 11 गांवों में उच्च स्तर बाढ़ आती है। प्रत्येक बाढ़ चौकी पर प्रभावित लोगों को जीवन उपयोगी वस्तुओं जैसे गुड़, गेहूं, चावल, चीनी, मिट्टी का तेल, नमक, माचिस, आटा आदि की जिम्मेदारी पूर्ति विभाग को दी गई है।
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तहसील मुख्यालय बना कंट्रोल रूम
तहसीलदार का कहना है कि संभावित बाढ़ को लेकर तहसील मुख्यालय पर कंट्रोल रूम बनाया गया है। जिस का फोन नंबर 1344-230035 है। बाढ़ शिविर में भोजन बनाने के लिए कारीगरों की भी व्यवस्था कर ली गई है। पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था करने के लिए भी लोगों को नामित कर दिया गया है।
ये होंगे आश्रय स्थल
तहसीलदार ने बताया कि निर्धारित 14 आश्रय स्थलों में से अफजलगढ़ में डाक बंगला, कादराबाद में नई टंकी सिंचाई विभाग का डाक बंगला, मकसूदाबाद पंचायत घर, जूनियर हाई स्कूल हरेवली, जूनियर हाईस्कूल सरकड़ा, रानी फूल कुमारी पाठशाला शेरकोट, दक्ष कन्या इंटर कॉलेज शेरकोट, पीजेएम इंटर कॉलेज शेरकोट, जिला परिषदीय प्राथमिक स्कूल शेरकोट, जूनियर हाईस्कूल व सीड्स स्टोर मुबारकपुर टप्पा भारती, एमक्यू इंटर कॉलेज स्योहारा, जिला परिषदीय प्राथमिक स्कूल बगवाड़ा व निरीक्षण भवन, एसएनएसएम इंटर कॉलेज नहटौर, जूनियर हाई स्कूल बालापुर अखेड़ा शामिल हैं। इन आश्रय स्थलों में 49 गांवों के लोगों को विस्थापित किया जा सकता है।