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567 प्रधानों पर तलवार
Bijnor
Updated Wed, 10 Apr 2013 05:30 AM IST
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बिजनौर। ग्राम पंचायतों के विकास के लिए आने वाली धनराशि का लेखा-जोखा न रखने पर 567 ग्राम प्रधानों पर कार्रवाई की तलवार लटक गई है। हैरानी की बात यह है कि इन प्रधानों ने दो वर्ष पहले कराए गए विकास कार्यों के कार्य पूर्ति प्रमाण पत्र अभी तक भी जमा नहीं किए हैं। इस प्रकरण में 185 ग्राम पंचायतों में जांच शुरू हो गई है। अंदेशा है कि पूर्ति प्रमाण पत्र जमा नहीं करने की वजह प्रधानों व सचिव द्वारा विकास कार्यों में हेराफेरी करना है। इन प्रधानों को अंतिम नोटिस भी जारी हो चुके हैं मगर पंचायत राज विभाग को अभी कोई जवाब नहीं मिला है।
केंद्र व राज्य सरकार द्वारा जिले की ग्राम पंचायतों को करीब दस करोड़ रुपये मिलता है। नियम है कि ग्राम प्रधान व सचिव इस धनराशि से कराए गए विकास कार्यों का कार्य पूर्ति प्रमाण पत्र विभाग को दें, जिसमें विकास कार्यों का पूरा ब्यौरा दर्ज होता है। कहां पर कितना धन लगा, किस किस मद में खर्च किया गया आदि। जिले में करीब 946 ग्राम पंचायतें हैं, जिनमें से केवल चालीस प्रतिशत ग्राम पंचायतों ने ही दो वर्ष पुराना कार्य पूर्ति प्रमाण पत्र जमा किया है। अन्य ग्राम पंचायतों के प्रधान व सचिव ने कोई ब्यौरा जमा नहीं किया।
गत वर्ष हुए विकास कार्यों का कार्य पूर्ति प्रमाण पत्र एक भी प्रधान ने जमा नहीं किया है। दो वर्ष पुराना कार्यपूर्ति प्रमाण पत्र जमा नहीं करने पर प्रधानों को कई बार नोटिस भी जारी हो चुके हैं, लेकिन किसी प्रधान ने इसका जवाब देने की भी जहमत नहीं उठाई। अंतिम नोटिस में पंचायती राज विभाग ने ऐसे प्रधानों को 30 अप्रैल तक की मोहलत दी है। एडीपीआरओ कमल किशोर ने प्रमाण पत्र जमा करने के लिए अंतिम तिथि 30 अप्रैल बताते हुए कहा है प्रधानों व सचिव के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
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केंद्र व राज्य सरकार द्वारा जिले की ग्राम पंचायतों को करीब दस करोड़ रुपये मिलता है। नियम है कि ग्राम प्रधान व सचिव इस धनराशि से कराए गए विकास कार्यों का कार्य पूर्ति प्रमाण पत्र विभाग को दें, जिसमें विकास कार्यों का पूरा ब्यौरा दर्ज होता है। कहां पर कितना धन लगा, किस किस मद में खर्च किया गया आदि। जिले में करीब 946 ग्राम पंचायतें हैं, जिनमें से केवल चालीस प्रतिशत ग्राम पंचायतों ने ही दो वर्ष पुराना कार्य पूर्ति प्रमाण पत्र जमा किया है। अन्य ग्राम पंचायतों के प्रधान व सचिव ने कोई ब्यौरा जमा नहीं किया।
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गत वर्ष हुए विकास कार्यों का कार्य पूर्ति प्रमाण पत्र एक भी प्रधान ने जमा नहीं किया है। दो वर्ष पुराना कार्यपूर्ति प्रमाण पत्र जमा नहीं करने पर प्रधानों को कई बार नोटिस भी जारी हो चुके हैं, लेकिन किसी प्रधान ने इसका जवाब देने की भी जहमत नहीं उठाई। अंतिम नोटिस में पंचायती राज विभाग ने ऐसे प्रधानों को 30 अप्रैल तक की मोहलत दी है। एडीपीआरओ कमल किशोर ने प्रमाण पत्र जमा करने के लिए अंतिम तिथि 30 अप्रैल बताते हुए कहा है प्रधानों व सचिव के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
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