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नाव बनी संकट मोचन
Bijnor
Updated Sat, 24 Nov 2012 12:00 PM IST
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मंड़ावर। नाव चलाने में चप्पू के बिना माझी बेकार है, लेकिन गांव चाहड़वाला के धर्मपाल सिंह ने बिना चप्पू से चलने वाली नाव बना कर गंगापार करने की योजना को अंजाम दिया है। उन्होंने इस नाव के सहार एक बार में तीन टन वजन ले जाने का दावा किया है। 25 फुट लंबी बनी नाव की लागत दो लाख रुपये बताई जाती है। इस नाव के बनने से ग्रामीण बेहद खुश हैं तथा धर्मपाल के कार्य की सराहना करते नहीं थकते।
मंड़ावार खादर क्षेत्र के गांव चाहड़वाला निवासी धर्मपाल ने रुड़की स्थित सेना एकेडमी से प्रेरित होकर ग्रामीणों को गंगापार करने की मंजिल को आसान कर दिया है। उन्होंने बिना चप्पू से चलने वाली नाव बना डाली। 25 फुट लंबी नाव को तार व बैरिंग के सहारे चलाया जा रहा है। धर्मपाल ने बताया कि इस नाव को बनाने में करीब दो लाख रुपये खर्च हुए है। नाव के नीचे चक्री में बैरिंग लगाए गए हैं, जो मोटे तारों में फिट किए है। गंगा के दोनों छोरों पर लगे पिलर में तार बांधे हैं तथा नाव के बीच में एक मोटा रस्सा बांधा है, जो नाव चलाने में सहायक है। नाविक रस्से को एकबार खींचता है और नाव धीरे धीरे चल कर दूसरे छोर पर पहुंच जाती है। इस नाव के सहारे क्षेत्र के किसान गंगा के दूसरे छोर पर अपनी खेती आसानी से कर सकेंगे। हर कोई धर्मपाल की काबलियत की तारीफ कर रहा है। क्षेत्र के किसान सरदार त्रिलोक चंद्र का कहना है कि इस नाव के पलटने की उम्मीद न के बराबर है। ग्रामीण अशोक कुमार, राम सिंह, संजय सिंह, जगमोहन सिंह, रमेश चंद्र व सुरेश कुमार का कहना था कि इस नाव के सहारे गंगा के दूसरे छोर पर खेती करना भी आसान हो गया है।
वसूलते हैं किराया
मंड़ावर।
डैबरलगढ़ से किसानों को नाव के सहारे गंगापार कराने का किराया भी निर्धारित किया गया है। साइकिल व मोटरसाइकिल का पांच रुपये, भैंसा बुग्गी का बीस रुपये तथा ट्रैक्टर-ट्राली उतारने के 50 रुपये वसूले जाते हैं।
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मंड़ावार खादर क्षेत्र के गांव चाहड़वाला निवासी धर्मपाल ने रुड़की स्थित सेना एकेडमी से प्रेरित होकर ग्रामीणों को गंगापार करने की मंजिल को आसान कर दिया है। उन्होंने बिना चप्पू से चलने वाली नाव बना डाली। 25 फुट लंबी नाव को तार व बैरिंग के सहारे चलाया जा रहा है। धर्मपाल ने बताया कि इस नाव को बनाने में करीब दो लाख रुपये खर्च हुए है। नाव के नीचे चक्री में बैरिंग लगाए गए हैं, जो मोटे तारों में फिट किए है। गंगा के दोनों छोरों पर लगे पिलर में तार बांधे हैं तथा नाव के बीच में एक मोटा रस्सा बांधा है, जो नाव चलाने में सहायक है। नाविक रस्से को एकबार खींचता है और नाव धीरे धीरे चल कर दूसरे छोर पर पहुंच जाती है। इस नाव के सहारे क्षेत्र के किसान गंगा के दूसरे छोर पर अपनी खेती आसानी से कर सकेंगे। हर कोई धर्मपाल की काबलियत की तारीफ कर रहा है। क्षेत्र के किसान सरदार त्रिलोक चंद्र का कहना है कि इस नाव के पलटने की उम्मीद न के बराबर है। ग्रामीण अशोक कुमार, राम सिंह, संजय सिंह, जगमोहन सिंह, रमेश चंद्र व सुरेश कुमार का कहना था कि इस नाव के सहारे गंगा के दूसरे छोर पर खेती करना भी आसान हो गया है।
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वसूलते हैं किराया
मंड़ावर।
डैबरलगढ़ से किसानों को नाव के सहारे गंगापार कराने का किराया भी निर्धारित किया गया है। साइकिल व मोटरसाइकिल का पांच रुपये, भैंसा बुग्गी का बीस रुपये तथा ट्रैक्टर-ट्राली उतारने के 50 रुपये वसूले जाते हैं।
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