हादसे के बाद अफरा-तफरी

Bijnor Updated Sat, 24 Nov 2012 12:00 PM IST
स्योहारा। डिस्टिलरी में जानलेवा हादसे के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। पीड़ित परिवारों ने पोस्टमार्टम न कराने के लिए हंगामा किया।
सुबह सात बजे प्रबंधक तंत्र से समझौता हो जाने के बाद मृतकों के परिजन शवों को बिना पोस्टमार्टम के ही घर ले जाना चाहते थे, जबकि पुलिस ने इसकी इजाजत नहीं दी। इसे लेकर कुछ देर तक परिजनों ने हंगामा किया। एसपी देहात प्रबल प्रताप सिंह व सीओ अफजलगढ़ अस्पताल पहुंचे। बाद में प्रबध्ंातंत्र केसमझाने पर मृतकाें के परिजन शवों का पोस्टमार्टम कराने पर राजी हुए।
इससे पूर्व, हादसे के बाद इलाके में अफरातफरी मच गई। आनन-फानन में अफसर मौके की और दौड़ पड़े। सुबह सात बजे तक श्रमिक संगठनों, पीड़ितों के परिजनों एवं मिल प्रबंधक के बीच हुई वार्ता के बाद अधिशासी अध्यक्ष सुखवीर सिंह ने घोषणा की कि सुरक्षाकर्मी लोकेश के भाई तथा जगदीश कर्णवाल की पत्नी को उसी क्रम में वेतन मिलता रहेगा। इसके अतिरिक्त एक लाख 25 हजार रुपये की आर्थिक सहायता तथा नियमानुसार मुआवजा दिया जाएगा। मृतकों के अंतिम संस्कार के लिए भी 20 हजार रुपये दिये जाएंगे।
लक्ष्य कालेज में शुगर मिल डिस्टलरी में हुए हादसे में तीन कर्मचारियों के निधन पर शोक सभा की गई।
ईंधन के रूप में प्रयोग होती है मिथेन
स्योहारा। डिस्टलरी में लगाए बायोगैस संयंत्र में बनी मिथेन गैस का प्रयोग बॉयलर के ईंधन के रूप में किया जाता है। बेहद ज्वलनशील मिथेन पानी में घुलनशील होती है। इसके प्रभाव से दम घुटने से मौत हो जाती है। डिस्टलरी में इसकी निगरानी के लिए क्रियेटर लगा हुआ है। गैस के अधिक बनने पर रिएक्टर ऊपर उठ जाता है। अधिशासी अध्यक्ष सुखवीर सिंह का कहना है कि जब पावर प्लांट चलाया जाता है तब ही बायोगैस प्लांट भी चलाया जाता है। जितनी गैस बनती है उतनी प्लांट में चली जाती है।
मास्क नहीं लगाता कोई कर्मचारी
डिस्टलरी में आग जैसी किसी भी दुर्घटना से बचने के लिए फायरफाइटिंग पम्प लगा है। अधिक गैस बनने पर उसे फ्लेम बनाकर उड़ा दिया जाता है। वैसे तो कर्मचारियों के लिए मास्क जरूरी है लेकिन कर्मचारी इसे लगाते नहीं है। कर्मचारियों का मानना है कि मिथेन के बचाव के लिए मुंह व नाक पर गीला कपड़ा लपेट लेने से सुरक्षा मिल जाती है, जबकि मिथेन पानी में घुलनशील है इसलिए गीला कपड़ा बांधना कोई कारगर उपाय नहीं है।

गैस कैसे लीकेज हुई किसी को नहीं मालूम
डिस्टलरी में मिथेन कब और कैसे लीकेज हुई और यह लीकेज कैसे बंद हो गई इसके बारे में कोई कर्मचारी नहीं जानता। माना जा रहा है कि भूलवश यह दुर्घटना हुई। संभवतया किसी वाल्व से गैस लीकेज हो रही हो जिसे आपरेटर जगदीश कर्णवाल ने बंद करने का प्रयास किया। इस प्रयास में गैस लीकेज तो बंद हो गई लेकिन तब तक जगदीश पर गैस प्रभाव हो चुका था। उसे बचाने आए लोकेश और प्रदीप को भी गैस ने चपेट में ले लिया। इसके बाद काशीराम और विजय भी गैस की चपेट में आ गए। चीनी मिल के अधिशासी अध्यक्ष सुखवीर सिंह का कहना दुर्घटना के कारण का पता लगाने के लिए जांच कराई जा रही है।
क्या है मिथेन
बिजनौर। मिथेन गैस मनुष्य के रक्त में आक्सीजन को कम करती है। इससे हृदयघात और दम घुटने की संभावना अधिक रहती है। डिस्टलरी के स्टैंड वॉश में मिथेन और वाटर बनता है। बॉयलर में यह जलकर एनर्जी देती है।
जांच शुरू
प्रशासन ने स्योहारा मिल में हुई दुर्घटना की जांच शुरू करा दी है। एडीएम प्रशासन विनोद चौधरी के अनुसार सेफ्टी इंडस्ट्रीयल मैनेजमेंट की टीम को जांच सौंपी गई है। एसपी नितिन तिवारी के अनुसार पुलिस की टीम भी जांच में जुट गई है।
नर्सिंग होम पर जुटी भीड़
स्योहारा। डिस्टलरी में मौत का ग्रास बने कर्मचारियों को देखने के लिए मुरादाबाद मार्ग स्थित नर्सिंग होम पर सुबह छह बजे से ही भीड़ जुटने लगी। अस्पताल के दो तख्त पर जगदीश कर्णवाल (54) और लोकेश (23) वर्ष के शव रखे थे। जगदीश की विधवा शोभा कर्णवाल, बेटी शिवानी व काजल को रोते देख सभी का कलेजा भर आया। पुत्र रजत कभी पिता के शव के पास शोकग्रस्त बैठाता तो कभी अपनी मां और बहनों को ढांढस बंधाता।
लोकेश कुमार ग्राम जागीर का रहने वाला था। पांच वर्ष पूर्व लोकेश के पिता राजपाल सिंह की मृत्यु के उसे डिस्टलरी में नौकरी मिली थी। अविवाहित लोकश की मां और बहन के रुदन से सभी की आंखें भर आईं। प्रदीप कुमार ग्राम इठौरा जिला मुजफ्फरनगर का रहने वाला था तथा कानपुर की सुरक्षा कंपनी एलएसएस में गार्ड था।

परिजनों को दी सांत्वना
चीनी मिल डिस्टलरी यूनिट में हुई दुर्घटना की सूचना मिलते ही हर कोई मृतकों के परिजनों को सांत्वना देने अस्पताल पहुंचा। इनमें बसपा नेता गिरीश चंद समेत राजेंद्र सिंह, महफूज गाजी, प्रियंकर राणा, रजत रस्तौगी, डा. यज्ञदत्त गौड़, सुशील चौहान, पम्मी यादव, मुजीबुल हसन, डा. राजबहादुर शर्मा आदि शामिल थे।

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