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मनचाहे अस्पताल जाना चाह रहे 108 सेवा से
Bijnor
Updated Sat, 17 Nov 2012 12:00 PM IST
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बिजनौर। 108 सेवा की एंबुलेंस के कड़े नियमों के बीच मरीज उलझे हुए हैं। एंबुलेंसों के जिले से बाहर व प्राइवेट अस्पताल में न जाने के कारण चालकों और मरीजों के बीच विवाद की स्थिति पैदा हो रही है। गुरुवार को सीएमओ ने हस्तक्षेप कर मामले को शांत किया।
108 एंबुलेंस सेवा 13 नवंबर से जिले में शुरू हुई है। गुरुवार को पूरनपुर नंगला में एक्सीडेंट के बाद 108 नंबर की सेवा ली गई। घायल को चांदपुर की एंबुलेंस ने जब पीएचसी नूरपुर पहुंचाया, तो वह मुरादाबाद पहुुंचाने के लिए कहने लगा। इस पर जब चालक ने मना किया तो उन्होंने एंबुलेंस को तोड़ देने की धमकी दी। सीएमओ से बात करने पर परिजन घायल को नूरपुर में एंबुलेंस से उतारकर अन्य स्थान पर उपचार हेतु ले गए। गुरुवार को चंदक क्षेत्र में तैनात एंबुलेंस को मरीज के लिए बुलाया गया। सांस के मरीज को जिला अस्पताल पहुंचाने पर वह चालकों पर मुजफ्फरनगर के एक प्राइवेट अस्पताल में पहुंचाने को कहने लगा। जिला अस्पताल के स्टाफ के समझाने पर तीमारदार किसी प्रकार से शांत हुए। तीसरी घटना धामपुर क्षेत्र की है। यहां नूरपुर छीवरी में एक युवक दुर्घटना में मामूली रूप से घायल हो गया। उसे धामपुर सीएचसी ले जाया गया। चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार के बाद घर भेज दिया और एक्सरे कराने की सलाह दी। दूसरे दिन परिजनों ने पांव के एक्सरे के लिए एंबुलेंस को बुला लिया और मात्र एक्सरे कराने के लिए एंबुलेंस से जिला अस्पताल लाया गया।
क्या है नियम :
घायलों, गंभीर बीमार या गर्भवती महिला, जिसे तुरंत उपचार की आवश्यकता है, को नजदीकी सीएचसी, पीएचसी तक पहुंचाना। यदि सीएचसी पीएचसी पर उपचार संभव नहीं है, तो जिला अस्पताल तक पहुंचाना। इसी लिए प्रत्येक ब्लाक क्षेत्र में एक-एक एंबुलेंसों की तैनाती की गई है।
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दुर्घटना में घायल, बिजली अथवा आग से जलने वाले, मारपीट में गंभीर घायल, प्रसव के लिए अस्पताल जाने को, हार्टअटैक, तेज बुखार जिसमें तुरंत उपचार की आवश्यकता हो व अन्य कोई भी बीमारी जिसमें इमरजेंसी की आवश्यकता हो, ऐसे में एंबुलेंस की सेवा ली जा सकती है।
सीएमओ डा. शशि कुमार अगिभनहोत्री ने बताया कि 108 स्वास्थ्य सेवा एंबुलेंस के द्वारा मरीज को सीएचसी अथवा जिला अस्पताल पहुंचाने के निर्देश हैं। तीन घायल व मरीजों के द्वारा चालकों पर दबाव बनाने की सूचना उन्हें मिली है। घायलों के लिए नि:शुल्क सेवा होने के कारण एंबुलेंस नियम विरुद्ध काम नहीं कर सकती है।
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108 एंबुलेंस सेवा 13 नवंबर से जिले में शुरू हुई है। गुरुवार को पूरनपुर नंगला में एक्सीडेंट के बाद 108 नंबर की सेवा ली गई। घायल को चांदपुर की एंबुलेंस ने जब पीएचसी नूरपुर पहुंचाया, तो वह मुरादाबाद पहुुंचाने के लिए कहने लगा। इस पर जब चालक ने मना किया तो उन्होंने एंबुलेंस को तोड़ देने की धमकी दी। सीएमओ से बात करने पर परिजन घायल को नूरपुर में एंबुलेंस से उतारकर अन्य स्थान पर उपचार हेतु ले गए। गुरुवार को चंदक क्षेत्र में तैनात एंबुलेंस को मरीज के लिए बुलाया गया। सांस के मरीज को जिला अस्पताल पहुंचाने पर वह चालकों पर मुजफ्फरनगर के एक प्राइवेट अस्पताल में पहुंचाने को कहने लगा। जिला अस्पताल के स्टाफ के समझाने पर तीमारदार किसी प्रकार से शांत हुए। तीसरी घटना धामपुर क्षेत्र की है। यहां नूरपुर छीवरी में एक युवक दुर्घटना में मामूली रूप से घायल हो गया। उसे धामपुर सीएचसी ले जाया गया। चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार के बाद घर भेज दिया और एक्सरे कराने की सलाह दी। दूसरे दिन परिजनों ने पांव के एक्सरे के लिए एंबुलेंस को बुला लिया और मात्र एक्सरे कराने के लिए एंबुलेंस से जिला अस्पताल लाया गया।
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क्या है नियम :
घायलों, गंभीर बीमार या गर्भवती महिला, जिसे तुरंत उपचार की आवश्यकता है, को नजदीकी सीएचसी, पीएचसी तक पहुंचाना। यदि सीएचसी पीएचसी पर उपचार संभव नहीं है, तो जिला अस्पताल तक पहुंचाना। इसी लिए प्रत्येक ब्लाक क्षेत्र में एक-एक एंबुलेंसों की तैनाती की गई है।
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दुर्घटना में घायल, बिजली अथवा आग से जलने वाले, मारपीट में गंभीर घायल, प्रसव के लिए अस्पताल जाने को, हार्टअटैक, तेज बुखार जिसमें तुरंत उपचार की आवश्यकता हो व अन्य कोई भी बीमारी जिसमें इमरजेंसी की आवश्यकता हो, ऐसे में एंबुलेंस की सेवा ली जा सकती है।
सीएमओ डा. शशि कुमार अगिभनहोत्री ने बताया कि 108 स्वास्थ्य सेवा एंबुलेंस के द्वारा मरीज को सीएचसी अथवा जिला अस्पताल पहुंचाने के निर्देश हैं। तीन घायल व मरीजों के द्वारा चालकों पर दबाव बनाने की सूचना उन्हें मिली है। घायलों के लिए नि:शुल्क सेवा होने के कारण एंबुलेंस नियम विरुद्ध काम नहीं कर सकती है।