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किसान कैसे बचाएं धान की फसल
Bijnor
Updated Mon, 20 Aug 2012 12:00 PM IST
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धामपुर। बारिश न होने और नहरों में पानी न आने से किसानाें को भारी परेशानी हो रही है। बिजली कम आने से खेतों की सिंचाई नहीं हो रही है। उन्होंने देहात मेें 14 घंटे आपूर्ति कराने की मांग की है।
गांव सरकड़ा के योगेश कुमार, जैतरा के दुष्यंत कुमार, ठकरी सिंह आदि का कहना है कि इस बार बारिश कम होने के बावजूद किसानाें ने जैसे तैसे धान की रोपाई की। लेकिन अब बगैर सिंचाई के धान को बचा पाना मुश्किल हो गया है। डीजल इंजन से एक बीघा सिंचाई तीन सौ रुपये में बैठ रही है। धान की फसल की औसत पैदावार के लिए सात-आठ बार पानी की जरूरत होती है। किसानाें का कहना है कि जब तक उन्हें 14 घंटे बिजली नहीं दी जाएगी, फसलाें को सूखे की मार से बचा पाना संभव नहीं है। वहीं एक्सईएन वीरेंद्र कुमार ने स्वीकारा कि कम बिजली से सिंचाई का काम पूरा नहीं हो रहा है। आपूर्ति के मामले में वह अपने स्तर से अधिकारियों को अवगत तो करा सकते हैं, पर हस्तक्षेप कुछ नहीं कर सकते।
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गांव सरकड़ा के योगेश कुमार, जैतरा के दुष्यंत कुमार, ठकरी सिंह आदि का कहना है कि इस बार बारिश कम होने के बावजूद किसानाें ने जैसे तैसे धान की रोपाई की। लेकिन अब बगैर सिंचाई के धान को बचा पाना मुश्किल हो गया है। डीजल इंजन से एक बीघा सिंचाई तीन सौ रुपये में बैठ रही है। धान की फसल की औसत पैदावार के लिए सात-आठ बार पानी की जरूरत होती है। किसानाें का कहना है कि जब तक उन्हें 14 घंटे बिजली नहीं दी जाएगी, फसलाें को सूखे की मार से बचा पाना संभव नहीं है। वहीं एक्सईएन वीरेंद्र कुमार ने स्वीकारा कि कम बिजली से सिंचाई का काम पूरा नहीं हो रहा है। आपूर्ति के मामले में वह अपने स्तर से अधिकारियों को अवगत तो करा सकते हैं, पर हस्तक्षेप कुछ नहीं कर सकते।
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