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दोबारा हुई जांच में भी बंदरों की मौत का कारण जहर निकला
Updated Tue, 10 Apr 2018 01:56 AM IST
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अमरोहा। भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान बरेली ने जहर से बंदरों की मौत की पुष्टि कर दी है। इस मामले में अब तक आईवीआरआई दो बार रिपोर्ट दे चुका है। दोनों बार रिपोर्ट में चूहे मार दवाई (जिंक फास्फेट) के सेवन से बंदरों की मौत होना आया है।
भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) ने रविवार को अपनी रिपोर्ट भेज दी। वन विभाग को भेजी रिपोर्ट में बंदरों की मौत जिंक फास्फेट से होना बताया गया है। गौरतलब है कि पिछले बीस दिनों से ढबारसी में बंदरों की मौत जारी है। डेढ़ सौ से ज्यादा बंदर अब तक दम तोड़ चुके हैं। वहीं, दर्जनों बीमार हैं। पशु चिकित्सकों ने एक बंदर का पोस्टमार्टम करते हुए विसरा बरेली भेजा था। विसरा रिपोर्ट में चूहे मार दवाई के सेवन से बंदरों की मौत बताई गई थी। इस रिपोर्ट से पूरी तरह से भरोसा नहीं किया गया। इसके बाद वन विभाग ने एक बंदर का शव बरेली जांच के लिए भेजा।
आईवीआरआई के वैज्ञानिकों की टीम भी ढबारसी आकर एक बंदर का शव ले गई। बरेली में ही वैज्ञानिकों ने शव का पोस्टमार्टम करते हुए रिसर्च किया। आखिरकार अपनी दूसरी रिपोर्ट भी बना दी। इसमें भी जिंक फास्फेट ही बंदरों की मौत का कारण आया है। इसके अलावा ढबारसी के पानी और नमकीन और अन्य खाद्य पदार्थों के नमूने आना बाकी है। फिलहाल ढबारसी में अभी भी बंदर बीमार चल रहे हैं। वन विभाग के एसडीओ एके सिंह ने बताया कि बरेली ने रिपोर्ट भेज दी है। जिसमें जिंक फास्फेट के सेवन से बंदरों की मौत होना बताया है। उधर विभाग भी मामले की जांच कर रहा है। जिसने भी बंदरों को जहर दिया है उसे बख्शा नहीं जाएगा।
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भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) ने रविवार को अपनी रिपोर्ट भेज दी। वन विभाग को भेजी रिपोर्ट में बंदरों की मौत जिंक फास्फेट से होना बताया गया है। गौरतलब है कि पिछले बीस दिनों से ढबारसी में बंदरों की मौत जारी है। डेढ़ सौ से ज्यादा बंदर अब तक दम तोड़ चुके हैं। वहीं, दर्जनों बीमार हैं। पशु चिकित्सकों ने एक बंदर का पोस्टमार्टम करते हुए विसरा बरेली भेजा था। विसरा रिपोर्ट में चूहे मार दवाई के सेवन से बंदरों की मौत बताई गई थी। इस रिपोर्ट से पूरी तरह से भरोसा नहीं किया गया। इसके बाद वन विभाग ने एक बंदर का शव बरेली जांच के लिए भेजा।
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आईवीआरआई के वैज्ञानिकों की टीम भी ढबारसी आकर एक बंदर का शव ले गई। बरेली में ही वैज्ञानिकों ने शव का पोस्टमार्टम करते हुए रिसर्च किया। आखिरकार अपनी दूसरी रिपोर्ट भी बना दी। इसमें भी जिंक फास्फेट ही बंदरों की मौत का कारण आया है। इसके अलावा ढबारसी के पानी और नमकीन और अन्य खाद्य पदार्थों के नमूने आना बाकी है। फिलहाल ढबारसी में अभी भी बंदर बीमार चल रहे हैं। वन विभाग के एसडीओ एके सिंह ने बताया कि बरेली ने रिपोर्ट भेज दी है। जिसमें जिंक फास्फेट के सेवन से बंदरों की मौत होना बताया है। उधर विभाग भी मामले की जांच कर रहा है। जिसने भी बंदरों को जहर दिया है उसे बख्शा नहीं जाएगा।
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