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नागरपुर खड़गसेन गांव को 15 दिन में खाली करने का अल्टीमेटम, ग्रामीणों में हड़कंप
Updated Mon, 24 Jul 2017 12:31 AM IST
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नागरपुर खड़गसेन गांव 15 दिन में खाली करने का अल्टीमेटम
हरेवली/धामपुर (बिजनौर)।
मुरादाबाद सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने चार दशक से नागरपुर खड़गसेन में बसे ग्रामीणों को 15 दिन में गांव खाली करने का अल्टीमेटम दे दिया है। विभाग का कहना है कि गांव की जमीन उसकी है। इसे बाढ़ के दौरान शरणस्थली के रूप में दिया गया था। उधर, ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि सिंचाई विभाग ने उनके मकानों को उजाड़ने का प्रयास किया तो आंदोलन होगा।
गांव नागरपुर ख्रड़गसेन के हरि सिंह, अमर सिंह, राजवीर, वीरो देवी, कमला, छोटी, छोटे, लाल सिंह, प्रताप, भजन सिंह, राम सिंह, शीशराम का कहना है कि हरेवली में रामगंगा बैराज का निर्माण 1970 में हुआ था। निर्माण के दौरान वह गांव परमावाला में रहते थे। बैराज निर्माण के आठ साल बाद 1978 में भीषण बाढ़ आई, तो गांव परमावाला इसकी चपेट में आ गया। प्रशासन ने उस दौरान लोगों को गांव से निकालकर सिंचाई विभाग की जमीन पर रहने को कहा। वह तब से इस जमीन में घर बनाकर रह रहे हैं।
गांव में वर्तमान में करीब चार सौ से ज्यादा परिवार रहते हैं। तभी से इस गांव का नाम नागरपुर खड़गसेन पड़ा था। यह गांव पिछली कई योजनाओं से ग्राम सभा खिजरपुर में शामिल था, लेकिन 2015-16 में सरकार ने इसे पूर्ण ग्रामसभा का दर्जा दे दिया। ग्रामसभा का दर्जा मिलने के बाद उनके गांव में चुनाव भी हुआ और वर्तमान में प्रधान के रूप में अंचला देवी दायित्वों का निर्वहन कर रही हैं। इस लोहिया गांव में 125 लोगों को इंदिरा आवास बनाकर दिए गए हैं। 350 से अधिक शौचालय सरकारी हैं।
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आरोप है कि रविवार को सिंचाई विभाग के एसडीओ रामकुमार सिंह, जेई सुरेंद्र प्रताप, प्रमोद कुमार, जिलेदार अरुण त्यागी, सींचपाल केशव कुमार ने गांव में पहुंचकर ढिंढ़ोरा पिटवाया कि नागरपुर खड़गसेन गांव सिंचाई विभाग की जमीन पर अवैध रूप से बसा है। यदि 15 दिन के भीतर इस जमीन को कब्जामुक्त नहीं किया तो सिंचाई विभाग बुलडोजर चलाकर आवासों को ध्वस्त कर देगा और इसका खर्च ग्रामीणों से वसूलेगा।
सरकार के सख्त आदेश हैं : एसडीओ
एसडीओ रामकुमार सिंह ने बताया कि वर्तमान सरकार के सख्त आदेश हैं कि सरकारी जमीन को हर हाल में कब्जामुक्त कराया जाए। जब एसडीओ से पूर्व की सरकारों के आदेशों के अनुपालन के बारे में जानकारी ली गई तो बताया कि आदेश तो कई बार हुए, पर इतनी सख्ती नहीं होती थी। उन्होंने इन 40 साल के भीतर कई बार इन लोगों को नोटिस जारी किए। इन पर कोई प्रभाव नहीं हुआ तो अब सख्त कदम उठाने को विवश होना पड़ रहा है। उन्हें नहीं पता कि विभाग की जमीन में बसे इन ग्रामीणों को कहां शिफ्ट होना है। उनका काम तो केवल विभाग की जमीन को हर हाल में कब्जामुक्त कराना है।
ऐसे ही गांव खाली नहीं करेंगे
ग्राम प्रधान अंचला देवी का कहना है कि ग्रामीण ऐसे ही गांव खाली नहीं करेंगे। विभाग को अपनी जमीन की चिंता है तो वह पहले ग्रामीणों के लिए जमीन की व्यवस्था कर उन्हें आवास बनाकर दे। अन्यथा वह सरकारी अफसरों की घुड़की में आने वाले नहीं हैं।
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हरेवली/धामपुर (बिजनौर)।
मुरादाबाद सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने चार दशक से नागरपुर खड़गसेन में बसे ग्रामीणों को 15 दिन में गांव खाली करने का अल्टीमेटम दे दिया है। विभाग का कहना है कि गांव की जमीन उसकी है। इसे बाढ़ के दौरान शरणस्थली के रूप में दिया गया था। उधर, ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि सिंचाई विभाग ने उनके मकानों को उजाड़ने का प्रयास किया तो आंदोलन होगा।
गांव नागरपुर ख्रड़गसेन के हरि सिंह, अमर सिंह, राजवीर, वीरो देवी, कमला, छोटी, छोटे, लाल सिंह, प्रताप, भजन सिंह, राम सिंह, शीशराम का कहना है कि हरेवली में रामगंगा बैराज का निर्माण 1970 में हुआ था। निर्माण के दौरान वह गांव परमावाला में रहते थे। बैराज निर्माण के आठ साल बाद 1978 में भीषण बाढ़ आई, तो गांव परमावाला इसकी चपेट में आ गया। प्रशासन ने उस दौरान लोगों को गांव से निकालकर सिंचाई विभाग की जमीन पर रहने को कहा। वह तब से इस जमीन में घर बनाकर रह रहे हैं।
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गांव में वर्तमान में करीब चार सौ से ज्यादा परिवार रहते हैं। तभी से इस गांव का नाम नागरपुर खड़गसेन पड़ा था। यह गांव पिछली कई योजनाओं से ग्राम सभा खिजरपुर में शामिल था, लेकिन 2015-16 में सरकार ने इसे पूर्ण ग्रामसभा का दर्जा दे दिया। ग्रामसभा का दर्जा मिलने के बाद उनके गांव में चुनाव भी हुआ और वर्तमान में प्रधान के रूप में अंचला देवी दायित्वों का निर्वहन कर रही हैं। इस लोहिया गांव में 125 लोगों को इंदिरा आवास बनाकर दिए गए हैं। 350 से अधिक शौचालय सरकारी हैं।
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आरोप है कि रविवार को सिंचाई विभाग के एसडीओ रामकुमार सिंह, जेई सुरेंद्र प्रताप, प्रमोद कुमार, जिलेदार अरुण त्यागी, सींचपाल केशव कुमार ने गांव में पहुंचकर ढिंढ़ोरा पिटवाया कि नागरपुर खड़गसेन गांव सिंचाई विभाग की जमीन पर अवैध रूप से बसा है। यदि 15 दिन के भीतर इस जमीन को कब्जामुक्त नहीं किया तो सिंचाई विभाग बुलडोजर चलाकर आवासों को ध्वस्त कर देगा और इसका खर्च ग्रामीणों से वसूलेगा।
सरकार के सख्त आदेश हैं : एसडीओ
एसडीओ रामकुमार सिंह ने बताया कि वर्तमान सरकार के सख्त आदेश हैं कि सरकारी जमीन को हर हाल में कब्जामुक्त कराया जाए। जब एसडीओ से पूर्व की सरकारों के आदेशों के अनुपालन के बारे में जानकारी ली गई तो बताया कि आदेश तो कई बार हुए, पर इतनी सख्ती नहीं होती थी। उन्होंने इन 40 साल के भीतर कई बार इन लोगों को नोटिस जारी किए। इन पर कोई प्रभाव नहीं हुआ तो अब सख्त कदम उठाने को विवश होना पड़ रहा है। उन्हें नहीं पता कि विभाग की जमीन में बसे इन ग्रामीणों को कहां शिफ्ट होना है। उनका काम तो केवल विभाग की जमीन को हर हाल में कब्जामुक्त कराना है।
ऐसे ही गांव खाली नहीं करेंगे
ग्राम प्रधान अंचला देवी का कहना है कि ग्रामीण ऐसे ही गांव खाली नहीं करेंगे। विभाग को अपनी जमीन की चिंता है तो वह पहले ग्रामीणों के लिए जमीन की व्यवस्था कर उन्हें आवास बनाकर दे। अन्यथा वह सरकारी अफसरों की घुड़की में आने वाले नहीं हैं।