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900 रुपये में मिलता है पानी की बर्बादी का लाईसेंस
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बिजनौर में टोटी न होने के कारण टंकी से बहता पानी।
- फोटो : BIJNOR
900 रुपये में मिलता है पानी की बर्बादी का लाइसेंस
बिजनौर। वाहन और सड़क धोने के नाम पर जिले में हर रोज लाखों लीटर पानी बर्बाद कर दिया जाता है। शहरों में तो पानी की बर्बादी का लाइसेंस केवल 900 रुपये में मिल जाता है। कस्बों में पानी की बर्बादी के लिए कोई शुल्क तक नहीं देना होता है। अफसरों के घरों व सरकारी आवासों के आसपास भी हर रोज पानी की बर्बादी होती है लेकिन इसकी केवल अनदेखी ही होती है।
वाहनों को धोने के लिए जगह जगह डग बने हुए हैं। यहां 20 से 100 रुपये लेकर वाहनों को धोया जाता है। वाहनों को धोने में एक ही डग पर हर रोज हजारों लीटर पानी बर्बाद किया जाता है। नगर पालिका से डग का कामर्शियल कनेक्शन केवल 900 रुपये में मिलता है। यानि केवल 900 रुपये जमा करके पूरे साल पीने के पानी की बर्बादी का लाइसेंस मिल जाता है। केवल एक बाइक धोने में 100 लीटर से ज्यादा पानी खर्च होता है। इससे एक डग पर होने वाले पानी खर्च का अनुमान लगाया जा सकता है। देहात के बाजारों में भी ये डग चल रहे हैं। जिले भर में सैकड़ों डग चल रहे हैं। वाहन को धोने में इस्तेमाल होने वाला पानी बाद में नाली में ही बह जाता है। जिले भर में लाखों लीटर साफ पानी जमीन से निकालकर उसे प्रदूषित करके नालियों में बहा दिया जाता है।
-- सड़क धोने में खर्च पानी हमेशा के लिए खत्म
दुकानदार सुबह को दुकान खोलने से पहले अपनी दुकानों के बाहर सड़क धोते हैं। काफी लोग अपने घरों के बाहर भी सड़क धोते हैं। धूल को खत्म करने के लिए सड़क धोते हैं जबकि इससे धूल थोड़ी देर के लिए ही सड़क पर चिपकती है और बाद में फिर उड़ती है। लेकिन धूल चिपकाने के लिए पानी को बर्बाद करके उड़ा दिया जाता है। सड़क पर डाला गया पानी जमीन के अंदर भी नहीं जा पाता और हमेशा के लिए खत्म हो जाता है।
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-- पानी बर्बाद करने वालों पर होगी कार्रवाई
एसडीएम बृजेश कुमार का कहना है कि पानी की बर्बादी करने वाले लोगों को चिह्नित किया जाएगा। ऐसे लोगों पर कार्रवाई की जाएगी। पानी को बर्बाद करने के बजाए इसकी बचत की आदत डालनी चाहिए।
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बिजनौर। वाहन और सड़क धोने के नाम पर जिले में हर रोज लाखों लीटर पानी बर्बाद कर दिया जाता है। शहरों में तो पानी की बर्बादी का लाइसेंस केवल 900 रुपये में मिल जाता है। कस्बों में पानी की बर्बादी के लिए कोई शुल्क तक नहीं देना होता है। अफसरों के घरों व सरकारी आवासों के आसपास भी हर रोज पानी की बर्बादी होती है लेकिन इसकी केवल अनदेखी ही होती है।
वाहनों को धोने के लिए जगह जगह डग बने हुए हैं। यहां 20 से 100 रुपये लेकर वाहनों को धोया जाता है। वाहनों को धोने में एक ही डग पर हर रोज हजारों लीटर पानी बर्बाद किया जाता है। नगर पालिका से डग का कामर्शियल कनेक्शन केवल 900 रुपये में मिलता है। यानि केवल 900 रुपये जमा करके पूरे साल पीने के पानी की बर्बादी का लाइसेंस मिल जाता है। केवल एक बाइक धोने में 100 लीटर से ज्यादा पानी खर्च होता है। इससे एक डग पर होने वाले पानी खर्च का अनुमान लगाया जा सकता है। देहात के बाजारों में भी ये डग चल रहे हैं। जिले भर में सैकड़ों डग चल रहे हैं। वाहन को धोने में इस्तेमाल होने वाला पानी बाद में नाली में ही बह जाता है। जिले भर में लाखों लीटर साफ पानी जमीन से निकालकर उसे प्रदूषित करके नालियों में बहा दिया जाता है।
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-- सड़क धोने में खर्च पानी हमेशा के लिए खत्म
दुकानदार सुबह को दुकान खोलने से पहले अपनी दुकानों के बाहर सड़क धोते हैं। काफी लोग अपने घरों के बाहर भी सड़क धोते हैं। धूल को खत्म करने के लिए सड़क धोते हैं जबकि इससे धूल थोड़ी देर के लिए ही सड़क पर चिपकती है और बाद में फिर उड़ती है। लेकिन धूल चिपकाने के लिए पानी को बर्बाद करके उड़ा दिया जाता है। सड़क पर डाला गया पानी जमीन के अंदर भी नहीं जा पाता और हमेशा के लिए खत्म हो जाता है।
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-- पानी बर्बाद करने वालों पर होगी कार्रवाई
एसडीएम बृजेश कुमार का कहना है कि पानी की बर्बादी करने वाले लोगों को चिह्नित किया जाएगा। ऐसे लोगों पर कार्रवाई की जाएगी। पानी को बर्बाद करने के बजाए इसकी बचत की आदत डालनी चाहिए।