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जेल के बंदी अब जैविक खाद से करेंगे जेल में खेती
Updated Tue, 10 Jul 2018 12:48 AM IST
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जेल के बंदी करेंगे जैविक खेती
बिजनौर। जिला कारागार के बंदी जेल में जैविक खाद से खेती किया करेंगे। इसकी तैयारी शुरू कर दी गई है। दिल्ली की एक संस्था के सदस्यों ने बंदियों को जेल में जैविक खाद से खेती करने के गुर सिखाए। बंदियों को बताया गया कि कैसे कितनी लागत से खेती की जानी है।
जिला करागार में खेती की साढ़े चार एकड़ जमीन है। जेल के बंदियों से इस जमीन में खेती कराई जाती है। जेल में 1050 बंदी है, जो बंदी जिस काम में निपुण होता है उसे वही काम दिया जाता है। खेती में रुचि लेन वाले जेल के बंदियों को श्री श्री इंस्टीट्यूट आफ एग्रीकल्चर साइंस ट्रस्ट दिल्ली से जुड़ी शोभना शर्मा और अर्चना झा ने जिला जेल में दो दिन तक बंदियों को जैविक खाद से खेती करने के गुर सिखाए। इसके लिए 30 से 40 बंदियों का अलग से चयन किया गया।
कहा कि इस खेती से बंदियों को भी फायदा होगा। जेल अफसरों को सुझाव दिया कि जैविक खाद से खेती करने के लिए जेल में ही देशी गाय पाली जाएं। तीन चार गाय पालने से इसकी शुरूआत हो सकती है। गाय के गोबर से खेती की जाए। गोबर के साथ अन्य जैविक सामग्री का भी खेती में प्रयोग हो। जेल अधीक्षक आर के मिश्रा के मुताबिक जेल में जैविक खाद से खेती करने की तैयारी शुरू कर दी गई है। जेल में गोशाला खोलने पर भी विचार किया जा रहा है। इसके लिए जेल में जमीन तलाशी जा रही है।
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फसलों में डाला जाने वाला कीटनाशक भी जैविक विधि से ही तैैयार होगा। गाय के गोबर, मूत्र, गुड़, बेसन और फलों के छिलके से कीटनाशक तैयार किए जाएंगे। हानिकारक पेस्टीसाइट के बजाए ये कीटनाशक फसलों पर छिड़के जाएंगे। एक देशी गाय एक हेक्टेअर जमीन में जैविक खेती करा सकती है। देशी गाय के गोबर और मूत्र बहुत उर्वरक होता है। अगर इसे सही तरह से प्रयोग किया जाए तो खेतों में रासायनिक खाद डालने की जरूरत ही नहीं होगी।
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बिजनौर। जिला कारागार के बंदी जेल में जैविक खाद से खेती किया करेंगे। इसकी तैयारी शुरू कर दी गई है। दिल्ली की एक संस्था के सदस्यों ने बंदियों को जेल में जैविक खाद से खेती करने के गुर सिखाए। बंदियों को बताया गया कि कैसे कितनी लागत से खेती की जानी है।
जिला करागार में खेती की साढ़े चार एकड़ जमीन है। जेल के बंदियों से इस जमीन में खेती कराई जाती है। जेल में 1050 बंदी है, जो बंदी जिस काम में निपुण होता है उसे वही काम दिया जाता है। खेती में रुचि लेन वाले जेल के बंदियों को श्री श्री इंस्टीट्यूट आफ एग्रीकल्चर साइंस ट्रस्ट दिल्ली से जुड़ी शोभना शर्मा और अर्चना झा ने जिला जेल में दो दिन तक बंदियों को जैविक खाद से खेती करने के गुर सिखाए। इसके लिए 30 से 40 बंदियों का अलग से चयन किया गया।
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कहा कि इस खेती से बंदियों को भी फायदा होगा। जेल अफसरों को सुझाव दिया कि जैविक खाद से खेती करने के लिए जेल में ही देशी गाय पाली जाएं। तीन चार गाय पालने से इसकी शुरूआत हो सकती है। गाय के गोबर से खेती की जाए। गोबर के साथ अन्य जैविक सामग्री का भी खेती में प्रयोग हो। जेल अधीक्षक आर के मिश्रा के मुताबिक जेल में जैविक खाद से खेती करने की तैयारी शुरू कर दी गई है। जेल में गोशाला खोलने पर भी विचार किया जा रहा है। इसके लिए जेल में जमीन तलाशी जा रही है।
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फसलों में डाला जाने वाला कीटनाशक भी जैविक विधि से ही तैैयार होगा। गाय के गोबर, मूत्र, गुड़, बेसन और फलों के छिलके से कीटनाशक तैयार किए जाएंगे। हानिकारक पेस्टीसाइट के बजाए ये कीटनाशक फसलों पर छिड़के जाएंगे। एक देशी गाय एक हेक्टेअर जमीन में जैविक खेती करा सकती है। देशी गाय के गोबर और मूत्र बहुत उर्वरक होता है। अगर इसे सही तरह से प्रयोग किया जाए तो खेतों में रासायनिक खाद डालने की जरूरत ही नहीं होगी।