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कैंसर बांट रहा नदी का जल
Updated Sat, 30 Dec 2017 11:57 PM IST
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बिजनौर। नदियों में डाला जा रहा फैक्ट्रियों का गंदा पानी गांव वालों को कैंसर जैसी घातक बीमारी बांट रहा है। जिले की छोईया नदी तो प्रदूषित पानी का नाला तक बन गई है। नदी किनारे बसे गांवों में कई तरह की बीमारियां फैल रही हैं। नदियों को प्रदूषणमुक्त करने के लिए अभी तक प्रदूषण नियंत्रण विभाग द्वारा कोई कवायद नहीं की गई है। साल 2011 में केंद्रीय मंत्री उमा भारती भी छोईया नदी का पानी जांच कराने के लिए शीशी में ले गईं थीं, पर आज तक हुआ कुछ नहीं। वहीं जल मंत्रालय से आई टीम छोईया का दूषित स्तर देख दंग रह गई थी।
पहाड़ों से आई छोईया नदी का पानी जिले के काफी हिस्से में बिल्कुल अपने निर्मल रूप में बहता है। लेकिन फैक्ट्रियों के पास से गुजरने के तुरंत बाद नदी का स्वरूप बदल जाता है। नदी में फैक्ट्रियों का प्रदूषित कचरा बुरी तरह डाला जाता है। इससे नदी का रंग बिल्कुल काला हो जाता है। नदी बदबूदार नाले में तब्दील हो जाती है। नदी की हालत यह हो जाती है कि नदी में मछली तक नहीं हैं। यह नदी गांव जलालपुर छोईया, छोईया नंगली, अगरी, अगरा, पथरा, कंभौर, शाहपुर लाल आदि गांवों के पास से होकर गंज में गंगा में मिल जाती है। इन गांवों के नलों तक से प्रदूषित पानी निकलने लगा है। नदी किनारे बसे गांवों में पेट के रोगों सहित कैंसर तक फैल रहा है। अगरी गांव में कैंसर से कई मौत हो चुकी हैं। जंगल में चरने जाने वाले पशुओं की छोईया नदी का प्रदूषित जल पीने से मौत तक हो जाती है। जलीलपुर क्षेत्रमें यह नाला तो गंदगी के कारण बिल्कुल काला हो गया। यहां यह नाला काली नदी कहलाता है। अगरी गांव का मामला कई बार उठाया गया। प्रशासन ने गांव अगरी में पानी की टंकी भी बनवाई, लेकिन छोईया नदी में डाले जा रहे गंदे पानी पर रोक नहीं लगाई गई। साल 2011 में केंद्रीय मंत्री उमा भारती भी छोईया नदी का जल जांच कराने के लिए शीशी में ले गईं थीं। हाल ही में जल मंत्रालय से आई टीम ने छोईया नदी का जल देखा था तो टीम भी प्रदूषण के स्तर को देखकर दंग रह गई थी। टीम ने अपनी रिपोर्ट मंत्रालय को देने की बात कही थी, लेकिन अभी तक कुछ नहीं हुआ है।
पहाड़ों से आई छोईया नदी का पानी जिले के काफी हिस्से में बिल्कुल अपने निर्मल रूप में बहता है। लेकिन फैक्ट्रियों के पास से गुजरने के तुरंत बाद नदी का स्वरूप बदल जाता है। नदी में फैक्ट्रियों का प्रदूषित कचरा बुरी तरह डाला जाता है। इससे नदी का रंग बिल्कुल काला हो जाता है। नदी बदबूदार नाले में तब्दील हो जाती है। नदी की हालत यह हो जाती है कि नदी में मछली तक नहीं हैं। यह नदी गांव जलालपुर छोईया, छोईया नंगली, अगरी, अगरा, पथरा, कंभौर, शाहपुर लाल आदि गांवों के पास से होकर गंज में गंगा में मिल जाती है। इन गांवों के नलों तक से प्रदूषित पानी निकलने लगा है। नदी किनारे बसे गांवों में पेट के रोगों सहित कैंसर तक फैल रहा है। अगरी गांव में कैंसर से कई मौत हो चुकी हैं। जंगल में चरने जाने वाले पशुओं की छोईया नदी का प्रदूषित जल पीने से मौत तक हो जाती है। जलीलपुर क्षेत्रमें यह नाला तो गंदगी के कारण बिल्कुल काला हो गया। यहां यह नाला काली नदी कहलाता है। अगरी गांव का मामला कई बार उठाया गया। प्रशासन ने गांव अगरी में पानी की टंकी भी बनवाई, लेकिन छोईया नदी में डाले जा रहे गंदे पानी पर रोक नहीं लगाई गई। साल 2011 में केंद्रीय मंत्री उमा भारती भी छोईया नदी का जल जांच कराने के लिए शीशी में ले गईं थीं। हाल ही में जल मंत्रालय से आई टीम ने छोईया नदी का जल देखा था तो टीम भी प्रदूषण के स्तर को देखकर दंग रह गई थी। टीम ने अपनी रिपोर्ट मंत्रालय को देने की बात कही थी, लेकिन अभी तक कुछ नहीं हुआ है।
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