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गांगू नंगला के स्कूल को निगल गया भ्रष्टाचार
Updated Fri, 04 Aug 2017 12:46 AM IST
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बिजनौर/ हल्दौर। गांगू नंगला का उच्च प्राथमिक विद्यालय निर्माण के दस वर्ष की अवधि में ही खस्ताहाल हो गया। आलम यह है कि स्कूल के बच्चे चार साल से गांव के ही प्राथमिक विद्यालय में बैठ कर पढ़ने को मजबूर हो गए। जबकि स्कूल भवन पर एक ग्रामीण का कब्जा है। बेसिक शिक्षा विभाग के अफसर चुप है। लाखों रुपये खर्च के बाद भी रिजल्ट शून्य है। अधिकारियों ने कागजों में लीपापोती कर चार से से मामले को दबाए रखा है।
विकास क्षेत्र हल्दौर के गांव गांगूनंगला में उच्च प्राथमिक विद्यालय दस वर्ष पूर्व बना था। तालाब के किनारे स्कूल बनाते समय मानकों को दर किनार किया गया। भवन निर्माण में घटिया सामग्री लगी या भ्रष्टाचार स्कूल को निगल गया? इस पर विभाग चुप्पी साधे हैं। निर्माण के लिए करीब छह लाख रुपये की धनराशि आवंटित की गई थी। विद्यालय में 30 पंजीकृत छात्र हैं। पर चार साल से सभी बच्चे गांव के प्राथमिक विद्यालय के दो कक्षों में बैठ कर शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। विभाग ने उच्च प्राथमिक विद्यालय की सुध तक नहीं ली। इस कारण स्कूल जर्जर हालत में पहुंच गया है। एक ग्रामीण ने स्कूल के एक कमरे पर कब्जा कर रखा है और वह स्कूल में ही रह रहा है। भवन से स्कूल का नाम भी मिट चुका है। कई वर्षों से इसकी रंगाई पुताई भी नहीं कराई गई। जबकि स्कूलों की रंगाई पुताई के लिए 10 हजार रुपये सालाना विभाग से भेजे जाते हैं। मामले की जांच हुई तो शिक्षकों समेत कई पर गाज गिरेगी।
स्कूल की इंचार्ज अध्यापिका दीपा सैनी का कहना है कि बच्चे चार साल से प्राइमरी स्कूल में बैठते हैं। 18 फरवरी 2016 को खंड शिक्षा अधिकारी को भवन खस्ता हाल की शिकायत की गई थी। मगर, कोई कार्रवाई नहीं की गई।
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प्राइमरी स्कूल का भी गिरा था लेंटर
गांव गांगू नंगला में वर्ष 2007 में प्राथमिक विद्यालय के भवन निर्माण के दौरान लेंटर भरभरा कर गिर गया था। मामले में स्कूल के तत्कालीन शिक्षक अब्दुल हफीज को मानक के अनुसार निर्माण नहीं कराने और लापरवाही बरतने के मामले में जेल भेजा गया था। तत्कालीन सहायक बेसिक शिक्षा अधिकारी यजपाल सिंह का प्रशासनिक तबादला बदायूं के लिए किया गया था।
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विकास क्षेत्र हल्दौर के गांव गांगूनंगला में उच्च प्राथमिक विद्यालय दस वर्ष पूर्व बना था। तालाब के किनारे स्कूल बनाते समय मानकों को दर किनार किया गया। भवन निर्माण में घटिया सामग्री लगी या भ्रष्टाचार स्कूल को निगल गया? इस पर विभाग चुप्पी साधे हैं। निर्माण के लिए करीब छह लाख रुपये की धनराशि आवंटित की गई थी। विद्यालय में 30 पंजीकृत छात्र हैं। पर चार साल से सभी बच्चे गांव के प्राथमिक विद्यालय के दो कक्षों में बैठ कर शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। विभाग ने उच्च प्राथमिक विद्यालय की सुध तक नहीं ली। इस कारण स्कूल जर्जर हालत में पहुंच गया है। एक ग्रामीण ने स्कूल के एक कमरे पर कब्जा कर रखा है और वह स्कूल में ही रह रहा है। भवन से स्कूल का नाम भी मिट चुका है। कई वर्षों से इसकी रंगाई पुताई भी नहीं कराई गई। जबकि स्कूलों की रंगाई पुताई के लिए 10 हजार रुपये सालाना विभाग से भेजे जाते हैं। मामले की जांच हुई तो शिक्षकों समेत कई पर गाज गिरेगी।
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स्कूल की इंचार्ज अध्यापिका दीपा सैनी का कहना है कि बच्चे चार साल से प्राइमरी स्कूल में बैठते हैं। 18 फरवरी 2016 को खंड शिक्षा अधिकारी को भवन खस्ता हाल की शिकायत की गई थी। मगर, कोई कार्रवाई नहीं की गई।
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प्राइमरी स्कूल का भी गिरा था लेंटर
गांव गांगू नंगला में वर्ष 2007 में प्राथमिक विद्यालय के भवन निर्माण के दौरान लेंटर भरभरा कर गिर गया था। मामले में स्कूल के तत्कालीन शिक्षक अब्दुल हफीज को मानक के अनुसार निर्माण नहीं कराने और लापरवाही बरतने के मामले में जेल भेजा गया था। तत्कालीन सहायक बेसिक शिक्षा अधिकारी यजपाल सिंह का प्रशासनिक तबादला बदायूं के लिए किया गया था।