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Bijnor News: 14 महीने से मुआवजे के लिए भटक रही 70 वर्षीय मां
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कालागढ़। केंद्रीय कॉलोनी के संजयनगर निवासी भारत सिंह की मां पुत्र के 14 माह पूर्व बाघ का शिकार होने के बाद से मुआवजे के लिए भटक रही है। जायवती ने वन विभाग को लिखे पत्र में मुआवजे की मांग की है।
जायवती के अनुसार 20 मार्च 2025 को उसका 40 वर्षीय पुत्र भारत सिंह घर से साइकिल से बाहर गया था। जब वह वापस नहीं लौटा तो उसी दिन से उसकी खोज की गई। हाथीशाला के निकट सड़क के किनारे उसकी साइकिल व चप्पल मिले। जिस पर शक हुआ कि उसे कोई जंगली जानवर खींचकर जंगल में ले गया। पुलिस ने गुमशुदी में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी। 30 मार्च को हाथीशाला के दूसरी ओर सड़क पर पुलिया के पास एक नर खोपड़ी बरामद की गई।
कुछ दूरी पर भारत सिंह के कपड़े आदि मिले, जिन्हें परिवार वालों ने पहचान लिया। खोपड़ी पर कोई मांस नहीं था। पुलिस ने देहरादून की विधि प्रयोगशाला से खोपड़ी की डीएनए जांच कराई, जिसकी रिपोर्ट में खोपड़ी भारत सिंह की ही बताई गई। जायवती ने पत्र में वन विभाग से गुहार लगाई है कि भारत सिंह ही उसका सहारा था।
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बेटे की मौत के बाद वह आर्थिक कठिनाई से गुजर रही है। इसलिए उसे उचित मुआवजा दिया जाए। वनक्षेत्राधिकारी एनके रूवाली का कहना है कि जायवती के आवेदन को उच्च अधिकारियों को भेजा गया है। उच्च अधिकारियों से निर्देश मिलने पर ही कुछ कहा जा सकेगा।
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जायवती के अनुसार 20 मार्च 2025 को उसका 40 वर्षीय पुत्र भारत सिंह घर से साइकिल से बाहर गया था। जब वह वापस नहीं लौटा तो उसी दिन से उसकी खोज की गई। हाथीशाला के निकट सड़क के किनारे उसकी साइकिल व चप्पल मिले। जिस पर शक हुआ कि उसे कोई जंगली जानवर खींचकर जंगल में ले गया। पुलिस ने गुमशुदी में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी। 30 मार्च को हाथीशाला के दूसरी ओर सड़क पर पुलिया के पास एक नर खोपड़ी बरामद की गई।
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कुछ दूरी पर भारत सिंह के कपड़े आदि मिले, जिन्हें परिवार वालों ने पहचान लिया। खोपड़ी पर कोई मांस नहीं था। पुलिस ने देहरादून की विधि प्रयोगशाला से खोपड़ी की डीएनए जांच कराई, जिसकी रिपोर्ट में खोपड़ी भारत सिंह की ही बताई गई। जायवती ने पत्र में वन विभाग से गुहार लगाई है कि भारत सिंह ही उसका सहारा था।
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बेटे की मौत के बाद वह आर्थिक कठिनाई से गुजर रही है। इसलिए उसे उचित मुआवजा दिया जाए। वनक्षेत्राधिकारी एनके रूवाली का कहना है कि जायवती के आवेदन को उच्च अधिकारियों को भेजा गया है। उच्च अधिकारियों से निर्देश मिलने पर ही कुछ कहा जा सकेगा।