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बुखार से तपती छात्रा को कर दिया डिस्चार्ज
Updated Tue, 13 Nov 2018 01:21 AM IST
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अमरोहा। जिला अस्पताल में मरीजों के इलाज में लापरवाही का मामला सामने आया है। जहां दो दिन पहले इलाज के लिए लाई गई छात्रा को डॉक्टर ने डिस्चार्ज कर दिया। छात्रा के परिजनों के मुताबिक तीन दिन से अस्पताल में भर्ती बुखार से तपती छात्रा को डॉक्टर ने इलाज करने के बजाय डिस्चार्ज कर दिया।
जोया के मोहल्ला जाटव कालोनी के रहने वाले प्रकाश तोमर की 18 वर्षीय पुत्री डिंपल 11 वीं की छात्रा है।
तेज बुखार के चलते छात्रा को शनिवार की दोपहर को परिजनों ने जिला अस्पताल में भर्ती कराया था। सोमवार को छात्रा की जांचें कराई गईं। जांचें कराने के बाद परिजन डॉक्टर के पास पहुंचे।
परिजनों के मुताबिक जांच रिपोर्ट देखने के बाद डॉक्टर ने सबकुछ ओके बताते हुए छात्रा को डिस्चार्ज कर दिया। परिजनों का कहना है कि छात्रा को तेज बुखार में डिस्चार्ज किया गया है। छात्रा का या तो इलाज किया जाए या डॉक्टर उसे रेफर करें। उसकी हालत में बिल्कुल भी सुधार नहीं है। इसके उलट छात्रा को डिस्चार्ज कर दिया गया। इसकी शिकायत लेकर परिजन अस्पताल के उच्चाधिकारियों पर गए तो सभी नदारद मिले।
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लापरवाही का मामला नहीं
सीएमएस डॉ. रामनिवास ने कहा कि छात्रा तीन दिन से अस्पताल में भर्ती है। सोमवार को उसकी जांचें की गईं। डॉक्टर ने जांच रिपोर्ट देखने के बाद ही डिस्चार्ज करने का फैसला लिया है। इसलिए इलाज में लापरवाही का सवाल ही नहीं उठता।
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जोया के मोहल्ला जाटव कालोनी के रहने वाले प्रकाश तोमर की 18 वर्षीय पुत्री डिंपल 11 वीं की छात्रा है।
तेज बुखार के चलते छात्रा को शनिवार की दोपहर को परिजनों ने जिला अस्पताल में भर्ती कराया था। सोमवार को छात्रा की जांचें कराई गईं। जांचें कराने के बाद परिजन डॉक्टर के पास पहुंचे।
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परिजनों के मुताबिक जांच रिपोर्ट देखने के बाद डॉक्टर ने सबकुछ ओके बताते हुए छात्रा को डिस्चार्ज कर दिया। परिजनों का कहना है कि छात्रा को तेज बुखार में डिस्चार्ज किया गया है। छात्रा का या तो इलाज किया जाए या डॉक्टर उसे रेफर करें। उसकी हालत में बिल्कुल भी सुधार नहीं है। इसके उलट छात्रा को डिस्चार्ज कर दिया गया। इसकी शिकायत लेकर परिजन अस्पताल के उच्चाधिकारियों पर गए तो सभी नदारद मिले।
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लापरवाही का मामला नहीं
सीएमएस डॉ. रामनिवास ने कहा कि छात्रा तीन दिन से अस्पताल में भर्ती है। सोमवार को उसकी जांचें की गईं। डॉक्टर ने जांच रिपोर्ट देखने के बाद ही डिस्चार्ज करने का फैसला लिया है। इसलिए इलाज में लापरवाही का सवाल ही नहीं उठता।