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बिहार के 60 श्रमिकों की सहसपुर नगर पंचायत में जमा साईकिलों को उन तक पहुंचाने का प्रयास शुरू
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बिहार के श्रमिकों तक पहुंचाई जाएंगी 60 साइकिलें
धामपुर। जनता कर्फ्यू के दौरान आइसोलेट किए गए बिहार के 60 मजदूरों की साइकिलों को उन तक पहुंचाने की योजना पर काम शुरू हो गया है।
तहसीलदार रमेश चंद्र चौहान ने बताया कि अप्रैल में जनता कर्फ्यू के दौरान बिहार के 60 मजदूरों की साइकिल को सहसपुर बार्डर पर पुलिस ने कब्जे में लेकर सहसपुर नगर पंचायत की सुपुर्दगी में दी थी। मजदूरों को सहसपुर से वापस लाकर धामपुर के विनायक मंडप में बने आश्रय स्थल पर लाकर 21 दिन के लिए आइसोलेट कर दिया था। बाद में शासन के आदेश पर इन सभी श्रमिकों को मुरादाबाद से स्पेशल ट्रेन के माध्यम उनके घर पहुंचवाया गया था। लेकिन इनकी साइकिलें अभी नगर पंचायत सहसपुर की सुप़ुर्दगी में ही हैं। प्रशासनिक स्तर पर इन साइकिलों को संबंधित श्रमिकों के घर तक पहुंचाने की योजना बनाई जा रही है।
बकौल तहसीलदार, संबंधित श्रमिकों के नाम पते उनके पास लिखे हैं। वह श्रमिकों से बात करेंगे। यदि वे यहां से ले जाने पर सहमत हो जाएंगे। तो इससे बढ़िया और कोई बात नहीं है। यदि ऐसा संभव नहीं हो पाता तो विकल्प के रूप में जानकारी करेंगे। यदि वे रुपयों की बात पर रजामंद हो जाते हैं तो साइकिलों को एक साथ नीलाम कराने के बाद जमा रकम को बराबर बराबर कर उनके खातों में नेफ्ट के माध्यम से भेज दी जाएगी।
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धामपुर। जनता कर्फ्यू के दौरान आइसोलेट किए गए बिहार के 60 मजदूरों की साइकिलों को उन तक पहुंचाने की योजना पर काम शुरू हो गया है।
तहसीलदार रमेश चंद्र चौहान ने बताया कि अप्रैल में जनता कर्फ्यू के दौरान बिहार के 60 मजदूरों की साइकिल को सहसपुर बार्डर पर पुलिस ने कब्जे में लेकर सहसपुर नगर पंचायत की सुपुर्दगी में दी थी। मजदूरों को सहसपुर से वापस लाकर धामपुर के विनायक मंडप में बने आश्रय स्थल पर लाकर 21 दिन के लिए आइसोलेट कर दिया था। बाद में शासन के आदेश पर इन सभी श्रमिकों को मुरादाबाद से स्पेशल ट्रेन के माध्यम उनके घर पहुंचवाया गया था। लेकिन इनकी साइकिलें अभी नगर पंचायत सहसपुर की सुप़ुर्दगी में ही हैं। प्रशासनिक स्तर पर इन साइकिलों को संबंधित श्रमिकों के घर तक पहुंचाने की योजना बनाई जा रही है।
बकौल तहसीलदार, संबंधित श्रमिकों के नाम पते उनके पास लिखे हैं। वह श्रमिकों से बात करेंगे। यदि वे यहां से ले जाने पर सहमत हो जाएंगे। तो इससे बढ़िया और कोई बात नहीं है। यदि ऐसा संभव नहीं हो पाता तो विकल्प के रूप में जानकारी करेंगे। यदि वे रुपयों की बात पर रजामंद हो जाते हैं तो साइकिलों को एक साथ नीलाम कराने के बाद जमा रकम को बराबर बराबर कर उनके खातों में नेफ्ट के माध्यम से भेज दी जाएगी।
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